जानें अम्फान तूफान से सुंदरबन में कितनी मची तबाही, पलायन को क्‍यों मजबूर हैं लोग

जानें अम्फान तूफान से सुंदरबन में कितनी मची तबाही, पलायन को क्‍यों मजबूर हैं लोग
सुपर साइक्‍लोन अम्‍फान के कारण यूनेस्‍को की धरोहर सूची में शामिल सुंदरबन में हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

सुपर साइक्‍लोन अम्‍फान (Super Cyclone Amphan) ने सुंदरबन इलाके में जबरदस्‍त तबाही मचाई है. सुंदरबन इलाके (Sunderban) में हर घर की दीवार और छत ढह गई है. वहीं, 13,000 से ज्‍यादा पेड़ जड़ से उखड़ गए हैं. खेतों और तालाबों में बंगाल की खाड़ी का खारा पानी घुस गया है. अब लोगों के सामने पलायन के अलावा दूसरा विकल्‍प नहीं बचा है.

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सुपर साइक्‍लोन अम्फान (Super Cyclone Amphan) ने यूनेस्को की धरोहरों की सूची में शामिल सुंदरबन (Sunderban) में भी भारी तबाही मचाई है. कोरोना वायरस (Coronavirus) के फैलने की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान इलाके के डेढ़ हजार परिवार पहले से ही भुखमरी के कगार पर थे. अब अम्‍फान तूफान ने वहां के लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा कर दिया है. उनके खेतों में समुद्र का खारा पानी (Sea Water) घुसने के कारण कुछ समय के लिए खेती (Farming) करना नामुमकिन हो गया है. इलाके में बाढ़ से बचाने के लिए बने ज्यादातर बांध (Dam) या तो टूट चुके हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बड़ी तादाद में यहां से लोग पलायन करने को मजबूर होंगे. अनुमान है कि इलाके में तूफान की वजह से हुए नुकसान की भरपाई में वर्षों लग जाएंगे.

सुंदरबन में जड़ से उखड़ गए हैं 13,000 पेड़
चक्रवाती तूफाल अम्फान ने इलाके के मैंग्रोव जंगल को तहत-नहस कर दिया है. द वीक की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2009 में आए तूफान आइला के बाद इलाके के तालाबों और खेतों में समुद्र का खारा पानी भरने से तीन साल तक खेती नहीं हो सकी थी. अब विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार कम से कम पांच साल बाद ही खेती हो पाएगी. इसके लिए भी बड़े पैमाने पर राहत और पुनर्वास का काम शुरू करना होगा. सुदरबन में अम्फान ने आइला से दोगुना ज्यादा इलाके को नुकसान पहुंचाया है. इलाके के द्वीपों से लगभग दो लाख लोगों को पहले ही निकाल कर सुरक्षित ठिकानों पर ले जाया गया था. इससे जान का नुकसान तो कम हुआ है, लेकिन खेती और संपत्ति के नुकसान का आकलन करना अभी मुश्किल लग रहा है. शुरुआती अनुमान के मुताबिक, करीब 13,000 पेड़ जड़ से उखड़ गए हैं. हर गांव में घरों की दीवारें और छतें ढह गई हैं.

'अम्‍फान' के कारण सुंदरबन इलाके में लोगों के घर टूट गए हैं और खेतों में खारा पानी घुस गया. ऐसे में वे कुछ साल खेती भी नहीं कर पाएंगे. (फोटो साभार: द वीक)




टूट गए इच्‍छामती और कालिंदी नदियों के बांध


सुंदरबन इलाके में इच्छामती और कालिंदी नदियों पर बने बांध टूट गए हैं. डीडब्‍ल्‍यू की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंगलगंज के बांकड़ा गांव के 55 साल के राशिद गाजी कहते हैं कि चक्रवाती तूफान हमारे जीवन का हिस्सा रहे हैं, लेकिन अम्फान ने बर्बाद ही कर दिया है. ऐसा कोई द्वीप नहीं बचा है, जहा बंगाल की खाड़ी का खारा पानी नदियों के रास्ते गांवों और तालाबों में नहीं पहुंच गया हो. वहीं, प्रदीप कहते हैं कि हमारी फसलें तबाह हो गई हैं. फिलहाल हमारी सबसे बड़ी चिंता अपना और परिवार का पेट पालने की है. सुंदरबन का घोड़ामारा द्वीप जलवायु परिवर्तन की वजह से धीरे-धीरे बंगाल की खाड़ी में समाने की वजह से अकसर सुर्खियां में रहता है. कभी 130 वर्ग किमी में फैला यह द्वीप अब सिमटकर महज 25 वर्ग किमी का रह गया है. यहां लगभग छह हजार लोग रहते हैं, लेकिन यहां एक भी मकान साबुत नहीं बचा है.

अब दोबारा बड़े पैमाने पर शुरू होगा पलायन
उत्तर गोपालनगर के रहने वाले 92 साल के रमेश मंडल कहते हैं कि मैंने अंग्रेजों से लेकर आजादी की लड़ाई और दूसरा विश्वयुद्ध तक बहुत कुछ देखा है, लेकिन अपने जीवन में कभी ऐसा तूफान नहीं देखा था. दक्षिण 24-परगना के जिलाशासक पी. उलंगनाथन बताते हैं कि अम्फान से इलाके में नदियों पर बने 140 किमी लंबे बांध को भारी नुकसान हुआ है. सरकार 100 दिनों की कार्ययोजना के तहत जल्‍द इसे बनाने का काम शुरू करेगी ताकि ज्वार-भाटे के समय पानी गांवों में नहीं घुस सके. सुंदरबन इलाके के लोग अकसर रोजी-रोटी की तलाश में देश के दूसरे शहरों और राज्यों में जाते रहे हैं. कोरोना की वजह से हजारों लोग अपने गांव लौटे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अम्‍फान से मची तबाही के बाद अब लॉकडाउन खत्म होने पर इलाके से दोबारा बड़े पैमाने पर पलायन शुरू होगा.

तूफान से आधारभूत ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान का असर लोगों की आजीविका पर पड़ना तय है. आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर लोग सुंदरबन इलाके को छोड़कर जाएंगे. 


'इलाके में हुआ है हजारों करोड़ का नुकसान'
द वीक की रिपोर्ट  सुंदरबन मामलों के मंत्री मंटूराम पाखिरा ने कहा कि अम्फान से सुंदरबन इलाके में हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है. अब सब नए सिरे से बनाना होगा. कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय के समुद्र विज्ञान संस्थान के निदेशक और सुंदरबन पर लंबे अरसे से शोध करने वाले डॉक्टर सुगत हाजरा ने कहा कि तूफान से आधारभूत ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान का असर लोगों की आजीविका पर पड़ना तय है. आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर लोग सुंदरबन इलाके को छोड़कर जाएंगे. बता दें कि उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों में फैले सुंदरबन के लगभग 40 लाख लोगों के लिए खेती, मछली पालन, वन्यजीव पर्यटन और मजदूरी ही जीवनयापन के साधन रहे हैं. अब इन सब के अम्फान तूफान में बर्बाद होने की वजह से पलायन ही रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया बचा है.

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