पृथ्वी की गहराइयों से रिस रहा है लोहा, जानिए क्या कहता है नया शोध

पृथ्वी की गहराइयों से रिस रहा है लोहा, जानिए क्या कहता है नया शोध
पृथ्वी के बाहर तो इंसान जाने की कोशिश करसकता है. लेकिन उसके अंदर के रहस्य जानना बहुत मुश्किल है. प्रतीकात्मक तस्वीर

नए शोध के नतीजों से जानकारी मिलती है कि इस बात की प्रबल संभावना है कि पृथ्वी की गहराइयों में विभिन्न परतों (layers of Earth) के बीच लोहे का रिसाव (leakage of Iron) हो है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2020, 4:06 PM IST
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नई दिल्ली: विज्ञान की दुनिया में छोटी से छोटी जानकारी भी कई बार बड़े नतीजे दे देती है. एक जरा सी जानकारी के लिए वैज्ञानिक कई बार लंबे और बड़े प्रयोग कर जाते हैं. तो कई बार एक जानकारी के लिए सैंकड़ों प्रयोग भी कर लिए जाते हैं. लंबे समय पृथ्वी के भीतर (Interior of the Earth) की जानकारी हासिल करने के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने कई शोध किए हैं. इनमें से एक शोध ने यह खास जानकारी निकाली है कि पृथ्वी की क्रोड (Core of Earth) से तरल लोहा (Iron) का रिसाव हो रहा है.

सीमित जानकारी है पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में
वास्तव में पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में हमारी जानकारी बहुत सीमित है. हम कभी भी पृथ्वी की ऊपरी सतरह के भी नीचे तक नहीं पहुंच सके हैं. इसके बाद भी कई शोधों और तकनीकों की मदद से हम अप्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी की संरचना से पूरी ही तरह से अनजान नहीं हैं.

अभी तक क्या पता है हमें
पृथ्वी की जमीन और उसके अंदर के भाग को तीन भाग में बांटा गया है. पहला है भूपर्पटी जिसे अंग्रेजी में क्रस्ट (Crust) कहते हैं. यह  5 किलोमीटर से 40 किलोमीटर की गहराई  तक होती है. इसकी औसत गहराई24 किलोमीटर है. यह चट्टानों से बनी ठोस सतह है.  क्रस्ट के नीचे मेंटल आता है जो 2890 किमी नीचे तक जाता है.यहां लोहे और मैग्नीशियम की बहुतायत है. इसके बाद 6371 किमी तक क्रोड या कोर है जहां बहुत ज्यादा मात्रा में लोहा और कुछ निकल भी है.



Earthquake
भूकंपीय गतिविधियों के माध्यम से वैज्ञानिकों को पृथ्वी के अंदर की कुछ जानकारी मिल जााती है. भूकंप की सांकेतिक तस्वीर


 क्या था अधययन का विषय
दशकों से वैज्ञानिक इस बात का पता लगा नहीं पा रहे थे कि क्या पृथ्वी की क्रोड़ और उसके मेंटल के बीच पदार्थों का आदान प्रदान होता है या नहीं. लेकिन अब नेचर में प्रकाशित ताजा शोध से पता चला है कि  पृथ्वी की कोर से ऊपरी मेंटल तक लोहे का रिसाव हो रहा है. जबकि ही जगहों पर हजारों डिग्री तापमान का अंतर है.

पृथ्वी से आने वाली तरंगें बताती है कि पृथ्वी की कोर में बहुत सारा लोहा है. इसके अलावा उसकी मेंटल परत में भी लोहे की काफी मात्रा है. इससे यह अनुमान भी लगाया गया था कि हो सकता है यह लोगा मेंटल में कोर से आया हो.

लैब में क्या प्रयोग किया वैज्ञानिकों ने
इस बारे में ज्यादा जानने के लिए शोधकर्ताओं ने लैब में ही प्रयोग किया और देखा कि क्या लोहे के आइसोटोप्स अलग अगल उच्च तापमान और उच्च दबाव वाले क्षेत्रों में आ जा सकते हैं.  इस तरह के प्रयोग से शोधकर्ताओं को उम्मीद थी कि इसके नतीजे यह जानने में मदद कर सकते हैं कि पृथ्वी की कोर,  जो बहुत ज्यादा गरम होती है, से हजारों डिग्री ठंडे मेंटल में लोहे का सरिसाव हो सकता है.

Earth
पृथ्वी के भीतर से आने वाली कई तरह की तरंगे वाैज्ञानिकों को अहम जानकारियां देतैी हैं.


क्या पाया नतीजों में
शोधकर्ताओं ने पाया कि जहां कोर से गर्म लोहा मेटल में रिस कर आ सकता है. वहीं हलके आइसोटोप भी ठंडे मेंटल से गर्म कोर में जा सकते हैं. ये नतीजे उतने प्रायोगिक नहीं हैं, लेकिन वे इस बारे में यह अहम जानकारी दे सकते हैं कि हमारे पृथ्वी का आंतरिक भाग कैसे काम करता होगा.

मददगार साबित हो सकते हैं शोध के नतीजे
डेनमार्क के आरहस यूनिवर्सिटी के जीयोलॉजिस्ट चार्ल्स लेशरका कहना है, “यदि यह आगे भी सही साबित हुआ तो यह हमारी कोर और मेटल के परस्पर संबंधों को समझने में बहुत मदद कर सकता है.” इससे भूगर्भीय गतिविधियों के समझने में मदद मिल सकती है और पृथ्वी के भीतर तापमान में बदलाव के बारे में जानकारी मिल सकती है.

पृथ्वी की सतह तक आ सकते हैं कोर के तत्व
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कम्प्यूटर सिम्यूलेशन से यह दर्शाया कि कैसे कोर से पृथ्वी की सतह तक पदार्थ आ सकते हैं. माना जाता है कि सामोआ और हवाई में ऐसी जगह हैं जहां तक कोर से पदार्थ रिसकर पृथ्वी की सतह तक आ सकते हैं.

.लेशर का कहना है उनके नतीजे संकेत दे रहे हैं कि मेंटल तक लोहे का रिसाव अरबों सालों से हो रहा होगा.उनका कहना है कि अगर ऐसा वाकई है तो इसका लंबे समय तक क्या प्रभाव रहा था.

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