कहीं बाढ़, कहीं सूखा... जानें क्यों देश में जुदा जुदा है मौसम का मिज़ाज

देश के उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य हिस्सों में कैसा मौसम बना हुआ है? मुंबई में भारी बारिश से कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है तो दक्षिण के कई राज्यों में सूखे का संकट गहरा गया है. मौसम विभाग की भविष्यवाणियां भी फेल होती रही हैं.

News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 3:10 PM IST
कहीं बाढ़, कहीं सूखा... जानें क्यों देश में जुदा जुदा है मौसम का मिज़ाज
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Updated: July 3, 2019, 3:10 PM IST
एक तरफ मुंबई समेत महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भारी बरसात के चलते बाढ़ जैसी तबाही के हालात बन गए हैं, तो वहीं पश्चिमी राजस्थान और उत्तर भारत के कुछ इलाकों में गर्मी शबाब पर है. हालांकि मौसम विभाग ने फिर कहा है कि दिल्ली और पंजाब सहित उत्तर भारत के कुछ इलाकों में एक दो दिन के भीतर बारिश हो सकती है, लेकिन उत्तर भारत के संबंध में अब तक मौसम विभाग की भविष्यवाणियां सही साबित होती नहीं दिखीं. आइए जानें देश भर में कैसे अलग अलग है मौसम का मिज़ाज और इसके पीछे वजहें क्या हैं.

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जून का महीना उत्तर और मध्य भारत में जानें लेकर गुज़र चुका और मिड जून के बाद से बारिश के तमाम अनुमान यहां काफी हद तक फेल ही साबित हुए. जून के आखिरी दिनों से मुंबई और कोंकणी क्षेत्रों में बारिश शुरू हुई तो हालात इस कदर बिगड़ गए कि आम जनजीवन तकरीबन ठप हो गया और अब तक मुंबई व रत्नागिरि में सम्मिलित रूप से 40 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं.

मौस​म विभाग के हवाले से खबरें कह रही हैं पिछले एक हफ्ते में मुंबई में जितनी बारिश हुई है, उससे पिछले कई सालों नहीं दशकों के रिकॉर्ड टूट गए हैं. ये भी कहा जा रहा है कि इस साल 2005 के बाद से सबसे भीषण बरसात हुई है. याद रहे कि 2006 में मुंबई की बारिश ने कहर बरपा दिया था. इस बार उससे भी भीषण बरसात के कयास लगाए जा रहे हैं क्योंकि अब तक का मौसम देखते हुए कहा जा रहा है कि स्थिति 2006 के करीब तो पहुंच ही चुकी है.

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मुंबई में बारिश के हालात पर लगातार नेटवर्क18 आप तक खबरें पहुंचा रहा है.


उत्तर भारत में क्या हाल है?
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पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के आगरा में सबसे ज़्यादा 42 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया और लखनऊ, वाराणसी, नोएडा व इलाहाबाद में भी दिन का तापमान सामान्य से काफी ज़्यादा दर्ज किया गया. मौसम विभाग का कहना है कि मानसून तेज़ी से उत्तर व मध्य भारत की ओर बढ़ रहा है इसलिए अगले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश खासकर पूर्वी उप्र के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है.

वहीं, एनएलएम यानी नॉर्दर्न लिमिट मानसून के दिल्ली सहित जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड व पंजाब की तरफ बढ़ने की बात कही जा रही है. फिलहाल दिल्ली और एनसीआर में गर्मी के चलते बिजली की मांग बढ़ने से आपूर्ति प्रभावित हो रही है. वहीं, पंजाब और हरियाणा में गुरुवार को बरसात की संभावना जताई गई है और हिमाचल प्रदेश में चार से आठ जुलाई के दौरान भारी बरसात की भविष्यवाणी है.

पश्चिम में मौसम का मिज़ाज
भारत के पश्चिम में स्थित मुंबई, कोंकण में तो बारिश के हाल से आप वाकिफ हैं ही, लेकिन राजस्थान के खासकर पश्चिमी हिस्से में गर्मी से लोग बेहाल हैं. पश्चिमी राजस्थान में कुछ हिस्सों में तो सोमवार—मंगलवार को 50 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा तापमान दर्ज किया गया. वहीं, गुजरात में मिला जुला मौसम है. कुछ हिस्सों में छुटपुट बारिश हुई है तो कुछ हिस्सों में उमस भरी गर्मी बनी हुई है.

मुंबई की बारिश के बुधवार के आंकड़े देखें तो सांताक्रूज में सबसे ज्यादा 375.2 मिलीमीटर और पवई में 371.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. वर्ली में 67.4 मिमी बारिश दर्ज की गई तो नवी मुंबई के नेरूल में सबसे कम 67.2 मिमी बारिश हुई.

दक्षिण में सूखे का संंकट
तमिलनाडु, खासकर चेन्नई में जलसंकट गंभीर हो चुका है. पीने के पानी के लिए भी लोग तरस रहे हैं. वहीं कर्नाटक में भी जलसंकट गहरा चुका है और जल्द ही मानसून से राहत नहीं मिली तो दक्षिण के बहुत बड़े इलाके में गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं. अब तक आए आंकड़ों के मुताबिक भारत की 60 करोड़ की आबादी जलसंकट से जूझ रही है और हालात और बदतर होने का खतरा बना हुआ है.

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भारी बारिश से मुंबई में कई जगह पानी भरने की शिकायतें लगातार बनी हुई हैं.


पूर्व में कैसा है मौसम
पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में अब तक छिटपुट बारिश हो चुकी है और मौसम विभाग की भविष्यवाणी मानें तो आने वाले 24 से 72 घंटों के दौरान यहां रुक रुककर बारिश होती रहेगी. इसका कारण बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनना और आर्द्रता भरी हवाओं का बहना बताया जा रहा है. वहीं ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में भी छिटपुट या रुक रुककर बारिश होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन कुल मिलाकर पूरे पूर्व भारत में उमस भरा मौसम बना हुआ है.

मध्य भारत में बारिश
पिछले करीब एक हफ्ते से मध्य भारत में बारिश हो रही है, कहीं कम तो कहीं औसत. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार एनएलम पूर्वी राजस्थान सहित मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में पहुंच चुका है. दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ में अच्छी बारिश हो रही है और महाराष्ट्र की सीमा से सटे कुछ इलाकों में भारी बारिश हो चुकी है. राज्य के जिन इलाकों में बारिश नहीं हुई है, वहां भी मानसून के जल्द पहुंचने की भविष्यवाणी है.

क्यों है विभिन्न हिस्सों में मौसम जुदा
कई स्तरों पर पर्यावरणीय प्रदूषण और ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते प्राकृतिक संतुलन लगातार बिगड़ा है. समुद्री चक्रवातों और हवाओं में एक तरफ बढ़ोत्तरी के हालात बने हैं तो दूसरी ओर भूमिगत जलस्तर और नदियों व तालाबों जैसे जलस्रोत सिकुड़ चुके हैं. इन तमाम वजहों से मानसून अस्थिर हो चुका है. सिर्फ मानसून ही नहीं, बल्कि कई बार मौसम का सही आकलन न हो पाने की स्थिति बन चुकी है.

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भारतीय मौसम विभाग की वेबसाइट पर इस नक्शे के ज़रिए देश में मानसून की स्थिति समझाई गई है.


देश में मानसून की स्थिति बंगाल की खाड़ी और महाराष्ट्र व गुजरात की तरफ के अरब सागर से बनती है. इन दोनों ही क्षेत्रों में लगातार स्थिति बदलने के कारण मौसम के मिज़ाज और आकलन दोनों ही प्रभावित हुए हैं.​ फिलहाल कहा जा रहा है कि दक्षिण पश्चिमी मानसून सक्रिय है. इस तरह की खबरें भी हैं कि मौसम से जुड़े एप्स भी आपको सही जानकारी या सही अनुमान दे पाने में नाकाम हो रहे हैं. सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में मौसम असंतुलित हो चुका है.

फिलहाल मौसम ​विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार दक्षिण पश्चिम मानसून तेज़ी से बढ़ रहा है और देश के कई हिस्सों में जुलाई में अच्छी बरसात की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार खरीफ के सीज़न में धान जैसी फसल की बुवाई पर अब तक नहीं बारिश के बावजूद असर नहीं पड़ेगा.

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First published: July 3, 2019, 3:08 PM IST
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