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11 साल शेख अब्दुल्ला को नेहरू ने रखा था जेल में, बाद में हटाए गए सभी आरोप

News18Hindi
Updated: December 5, 2019, 5:12 PM IST
11 साल शेख अब्दुल्ला को नेहरू ने रखा था जेल में, बाद में हटाए गए सभी आरोप
शेख अब्दुल्ला पर तब कश्मीर कॉस्पिरेसी केस का आरोप लगाया गया था. अब्दुल्ला का आरोप था कि उन्हें नेहरू के इशारे पर गिरफ्तार किया गया है.

अब्दुल्ला (Sheikh Abdullah) ने सदन में बहुमत साबित करने के लिए गुहार लगाई लेकिन उन्हें इसका मौका नहीं दिया गया. शेख अब्दुल्ला की कैबिनेट के हिस्सा रहे बख्शी गुलाम मोहम्मद (Bakshi Ghulam Mohammad) को कश्मीर का प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया गया. कुछ ही दिन बाद शेख अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया. कश्मीर कॉन्सपिरेसी केस के आरोप में शेख अब्दुल्ला 11 सालों तक जेल में रहे.

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  • Last Updated: December 5, 2019, 5:12 PM IST
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बीते अगस्त महीने में नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Goverment) ने जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी समस्या माने जाने वाले आर्टिकल 370 (Article 370) का अंत कर लंबे समय से चले आ रहे एक गतिरोध को समाप्त करने की कोशिश की थी. तब कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) की गिरफ्तारी को लेकर संसद में गर्मागर्म बहस हुई थी. भारत के आजाद होने के बाद कश्मीर की राजनीति में अब्दुल्ला परिवार की अहम भूमिका रही है.

साल 1953 में कश्मीर के तत्कालीन प्रधानमंत्री (तब कश्मीर में मुख्यमंत्री की जगह प्रधानमंत्री शब्द का ही इस्तेमाल किया जाता था) रहे शेख अब्दुल्ला (फारूक अब्दुल्ला) के पिता की गिरफ्तारी पर भी बहुत बवाल मचा था. आज 5 दिसंबर को उनकी जन्मतिथि है. शेख अब्दुल्ला जब तक जीवित रहे, कश्मीर के लिए महत्वपूर्ण बने रहे. उन्हें लंबे समय तक जेल में भी रखा गया. 1953 में जम्मू-कश्मीर की सत्ता से हटाए जाने के बाद करीब 22 साल बाद वो 1975 में वहां के मुख्यमंत्री बने थे.

जब हुई शेख अब्दुल्ला की गिरफ्तारी
जम्मू-कश्मीर के भारतीय अधिग्रहण के बाद शेख अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री बने थे. लेकिन करीब पांच साल उनकी सरकार को तबके सदरे रियासत डॉ. कर्ण सिंह (राज्य का संवैधानिक प्रमुख) ने बर्खास्त कर दिया था. कर्ण सिंह का मानना था कि शेख अब्दुल्ला का सदन में बहुमत नहीं है.

शेख अब्दुल्ला ने सदन में बहुमत साबित करने के लिए गुहार लगाई लेकिन उन्हें इसका मौका नहीं दिया गया. शेख अब्दुल्ला की कैबिनेट के हिस्सा रहे बख्शी गुलाम मोहम्मद को कश्मीर का प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया गया. कुछ ही दिन बाद शेख अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद कश्मीर कॉन्सपिरेसी केस के आरोप में शेख अब्दुल्ला 11 सालों तक जेल में रहे.

शेख अब्दुला ने आरोप लगाया था कि उनकी बर्खास्तगी के पीछे जवाहर लाल नेहरू की अगुवाई वाली केंद्र सरकार का हाथ है. इतिहासकार एजी नूरानी ने भी शेख अब्दुल्ला के आरोपों का समर्थन अपने लेख में किया था. एजी नूरानी के मुताबिक शेख अब्दुल्ला की गिरफ्तारी के आदेश जवाहर लाल नेहरू ने ही दिए थे. दिलचस्प है ये कि जिस कश्मीर कॉन्सिपिरेसी केस की आड़ में शेख अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया गया था, उसमें सारे केस वापस ले लिए गए. शेख अब्दुल्ला के करीब 11 साल तक जेल में रहने के बाद सरकार ने उन पर से सारे आरोप वापस ले लिए थे. जब शेख अब्दुल्ला जेल से छूटकर वापस कश्मीर पहुंचे तो किसी हीरो की तरह उनका स्वागत किया गया.

जेल से छूटने के बाद नेहरू की  दरख्वास्त
हालांकि जेल से छूटने के बाद शेख अब्दुल्ला ने नेहरू के साथ ताल-मेल बिठा लिया था. और शायद यही वजह थी कि नेहरू ने शेख अब्दुल्ला से भारत-पाकिस्तान संबंध के बीच पुल बनने का आग्रह किया था. उन्होंने अब्दुल्ला से दरख्वास्त की थी कि वो राष्ट्रपति अयूब खाने से बात कर कश्मीर समस्या के आखिरी समाधान का रास्ता सुनिश्चित करवाएं. अयूब खान ने भी अब्दुल्ला और नेहरू को टेलीग्राम कर संदेश भेजा था कि उनके बिना कश्मीर समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं हो सकता.

अयूब खान के इस संदेश के बाद शेख अब्दुल्ला पाकिस्तान गए थे. पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के साथ उनकी कश्मीर को लेकर लंबी बातचीत हुई. बातचीत के दौरान शेख अब्दुल्ला ने अयूब खान को दिल्ली आने का न्यौता दिया. अयूब खान ने इसे स्वीकार कर 1964 जून में आने का वादा भी किया. यहां तक कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति के दिल्ली आने की खबर भारत सरकार की तरफ से भी कंफर्म कर दी गई थी.

27 मई को अयूब खान को अयूब खान पाक अधिकृत कश्मीर के दौरे पर थे. तभी भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु की खबर हर तरफ फैल गई. नेहरू की मौत के साथ कश्मीर समस्या के स्थाई समाधान के प्रयासों को जोर का धक्का लगा. शेख अब्दुल्ला की कोशिशों से कोई स्थाई समाधान निकलता दिख रहा था लेकिन नेहरू की मौत ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया.



नेहरू की मौत और कश्मीर वार्ता
नेहरू की मौत के बाद शेख अब्दुल्ला को एक बार फिर नजरबंद कर दिया गया. करीब तीन साल तक अब्दुल्ला को नजरबंद रखा गया और साल 1971 में 18 महीने के लिए कश्मीर बदर कर दिया गया. 1975 में शेख अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री फिर बने. लेकिन कश्मीर की समस्या के समाधान की जो शुरुआत 1964 में उन्होंने की थी वो दोबारा अपनी लय नहीं पकड़ पाई.
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First published: December 5, 2019, 3:42 PM IST
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