जानिए कितनी है आपके फेसबुक प्रोफाइल की कीमत

एक साल पहले एक औसत फेसबुक यूजर के मुकाबले अमेरिकी यूजर का डेटा पांच गुना ज्यादा महंगा था.

Avinash Dwivedi | News18Hindi
Updated: January 31, 2019, 1:30 PM IST
जानिए कितनी है आपके फेसबुक प्रोफाइल की कीमत
प्रतीकात्मक तस्वीर
Avinash Dwivedi | News18Hindi
Updated: January 31, 2019, 1:30 PM IST
फेसबुक को 2018 की आखिरी तिमाही में 6.88 बिलियन डॉलर यानी 48 हजार 782 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है. फेसबुक को 2017 में पूरे साल में 40 बिलियन डॉलर का मुनाफा हुआ था, 2018 में वह मुनाफा बढ़कर 55 बिलियन डॉलर के आस-पास पहुंच गया है. हैरानी की बात है कि पूरे साल कंट्रोवर्सी और स्कैंडल से जूझने के बावजूद फेसबुक का मुनाफा काफी बढ़ा. इन आंकड़ों के सामने आते ही कमाई में नुकसान को लेकर विशेषज्ञों और विश्लेषकों के सारे दावे ध्वस्त हो गए हैं.

फेसबुक की लोकप्रियता घटी पर बिजनेस पर नहीं पड़ा कोई असर
इससे साफ है कि 2018 में भले ही लोगों के बीच फेसबुक की लोकप्रियता में कमी आई हो लेकिन इसका शायद ही कोई फर्क इसके बिजनेस पर पड़ा है. हालांकि मुसीबतों का दौर फेसबुक के लिए अभी खत्म नहीं हुआ है क्योंकि बुधवार को भी उसे एप्पल ने एक झटका दिया.

दरअसल एप्पल ने फेसबुक को इसलिए दंडित किया क्योंकि फेसबुक ने एप्पल पर 13 साल तक के यूजर्स को एक ऐसी एप डाउनलोड करने का मौका दे दिया था, जो यूजर्स पर नजर रखती है. वैसे फेसबुक के लिए यह कोई बहुत नया खुलासा नहीं है. पहले भी फेसबुक पर आरोप लग चुके हैं कि वह थर्ड पार्टी कंपनियों के साथ यूजर्स का डेटा शेयर करता है.

पिछला साल कंट्रोवर्सी में गुजारने के बाद भी पिछले साल की इसी तिमाही के 4.27 बिलियन डॉलर के मुकाबले फेसबुक ने इस साल की अंतिम तिमाही में 6.88 बिलियन डॉलर का मुनाफा कमाया है. जिसके साथ ही कुल मुनाफा अब 30 फीसदी बढ़कर 16.64 बिलियन तक पहुंच गया है.

इसके अलावा रोज फेसबुक यूज करने वाले यूजर्स और महीने के हिसाब से फेसबुक यूज करने वाले यूजर्स दोनों में ही करीब 9 फीसदी की बढ़ोतरी पाई गई है. अब रोज दो करोड़ फेसबुक यूजर इसके परिवार की किसी न किसी ऐप, जिसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर और वॉट्सऐप शामिल हैं, पर रोज एक्टिव रहते हैं. बुधवार को इन आंकड़ों के सामने आने के कुछ ही घंटों के भीतर फेसबुक के शेयर्स के दाम 8 परसेंट बढ़ गए थे.

फेसबुक पर आप एक डिजिटल प्रॉडक्ट बन चुके हैं
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इंटरनेट का गणित समझने वाले जानते हैं कि फेसबुक और उसके जैसी सारी फ्री वेबसाइटें हमारे डेटा के जरिए पैसे कमाती हैं. हमें वेबसाइट तो फ्री में यूज करने को मिलती है, लेकिन यह हमारा सारा डेटा इकट्ठा करती हैं, फिर इस डेटा के जरिए हमारे लिए बने ऐड दिखाकर पैसे कमाती हैं.



हालांकि यह बात सुनते ही आपके मन में एक सवाल जरूर उठ रहा होगा कि अगर फेसबुक हमारे डेटा यानी हमारी डिजिटल इमेज से पैसे कमा रहा है तो इसका (आपकी फेसबुक प्रोफाइल का) असली दाम क्या है? सीधे कहें तो कितने रुपये का है हमारा फेसबुक एकाउंट?

मेरे फेसबुक डेटा की पूरी फाइल 940 एमबी की है. और मैं पिछले 10 सालों से फेसबुक पर हूं. इस फाइल में वो सारा डाटा है, जिसे मैंने आज तक फेसबुक के साथ शेयर किया है. चाहे वो मेरे बारे में पर्सनल जानकारी हो, मेरी पोस्ट्स हों, तस्वीरें हों या फिर दोस्तों के साथ की गई चैट. इसके अलावा वे इवेंट भी जिनमें जाने का मेरा मन था. साथ ही वह भी जिनमें मैं आखिरी वक्त पर नहीं गया.

यह भी कि मैंने कब शादी की और कब कॉलेज गया? कितने दिन किसी रिलेशनशिप में रहा? यहां तक कि फेसबुक के पास इस बात की जानकारी भी है कि मैंने कब किस लिंक पर या ऐड पर क्लिक किया था? इतने सब के बाद भी मेरे सारे डेटा को एनलाइज करके फेसबुक ने मेरे बारे में कुछ अनुमान भी बना रखे हैं. जिसके चलते वह मुझे वैसी चीजें प्राइरिटी में दिखाता है, भले ही मैं इन चीजों पर क्लिक करूं या नहीं.

अमेरिकी यूजर्स का डेटा औसत फेसबुक यूजर से पांच गुना महंगा है
इस मामले में एक बार केक्यूऐड नाम की कंपनी ने 'डेटाकूप' कंपनी के सीईओ मैट होगन से बात की थी. यह एक ऐसी कंपनी है जहां पर आप अपने डेटा को सीधे एडवरटाइजर्स को बेच सकते हैं. और पूछा था कि हम वाकई अपनी फेसबुक प्रोफाइल के जरिए कितना पैसा बनाते हैं? इसने कहा था, "अमेरिकी लोगों की फेसबुक प्रोफाइल, आम फेसबुक प्रोफाइल के मुकाबले पांच गुना ज्यादा कीमती हैं."

इसके अलावा मैट होगन से यह भी पूछा गया था कि हमारी हर पोस्ट का फेसबुक के लिए कितना दाम होता है? एक फोटो अपलोड करने, अपने बारे में कोई जानकारी फेसबुक से शेयर करने या किसी पोस्ट को लाइक करने का कितन दाम होता है? इस पर होगन ने कहा था, "हर व्यक्ति के हिसाब से अगर आप जानना चाहें तो बहुत ज्यादा नहीं."

उन्होंने कहा था, "किसी भी अकेली जानकारी का दूसरे डेटा सेट के बिना कोई खास दाम का नहीं होता. फेसबुक हमारे खास तरह के डेटा का एक पूरा सेट तैयार करता है, जिससे मेरी रुचियों या पर्सनालिटी के बारे में अच्छे से पता चलता है. वह भी मेरे बारे में इतने अच्छे से पता चल जाता है जितने अच्छे से कोई और दूसरा शख्स नहीं बता सकता." होगन कहते हैं कि यह डेटा आपके बारे में ऐसी जानकारी है, जैसी किसी और ने तैयार नहीं कर रखी है.

हर यूजर के जरिए फेसबुक कितने रुपये कमाता है?
पहले फेसबुक की कुल कमाई की बात करते हैं. 30 सितंबर, 2018 तक पिछले 1 साल की फेसबुक की कमाई करीब 52 बिलियन डॉलर थी. जो साल की आखिरी तिमाही में करीब-करीब 55 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है.



इसे अगर इसपर एक्टिव यूजर के डेटा से भाग दिया जाए तो एक यूजर के एक साल के डेटा की वैल्यू तो आ जाएगी. लेकिन दुनिया भर के यूजर के डेटा की वैल्यू बराबर नहीं है. क्योंकि जो कंपनियां फेसबुक से यूजर डेटा लेकर उसे एड देती हैं, वे ऐसे यूजर्स का डेटा चाहती हैं जो औसत लोगों के मुकाबले अमीर हों और किसी प्रॉडक्ट का एड देखकर उसे खरीद सकें. जैसा कि पहले भी बताया गया कि एक साल पहले एक औसत फेसबुक यूजर के मुकाबले अमेरिकी यूजर का डेटा पांच गुना ज्यादा महंगा था.

एक साल पहले के रेट से हिसाब लगाएं तो एक अमेरिकी का एक साल का डेटा औसतन 200 डॉलर यानी करीब 14 हजार रुपये का हुआ. वहीं औसत फेसबुक यूजर जिसमें भारतीय भी शामिल हैं, उनका डेटा हुआ करीब 2800 रुपये का हुआ यानी आपकी फेसबुक प्रोफाइल की कीमत हुई करीब 2800 रुपये.

सोशल मीडिया वेबसाइट्स से अलग है विकिपीडिया
अगर आप बहुत ज्यादा फेसबुक यूज करते हैं और चाहते हैं कि फेसबुक को आपको हर घंटा उस पर गुजारने के लिए पैसे देने चाहिए तो खुश मत होइए क्योंकि अगर फेसबुक पैसे दे तो शायद आपको हर घंटे के हिसाब से मात्र 6 से 7 रुपये मिलेंगे. हालांकि बड़े दुख की बात है कि फेसबुक आपको अपना डेटा शेयर करने के लिए एक भी पैसा नहीं देता है और बस आपके डेटा से खुद पैसे कमाता है. वैसे ही जैसे गूगल, ट्विटर और ऐसी दूसरी कई सारी कंपनियां कमाती हैं. ऐसी सारी ही वेबसाइटों में विकिपीडिया बिल्कुल अलग है, वह ऐसा नहीं करती इसीलिए उसे डोनेशन पर निर्भर रहना पड़ता है.

ओपीरिया नाम की एक दूसरी कंपनी जो सीधे यूजर का डेटा बेचती है. उसके सीईओ क्रिश्चियन लैंग कहते हैं कि अगर आप इंटरनेट पर किसी वेबसाइट का यूज करने के लिए पैसे नहीं चुकाते हैं तो आप खुद प्रॉडक्ट बन चुके हैं. और ठीक यही बात फेसबुक के साथ लागू हो रही है, वह आपके डेटा को प्रॉडक्ट की तरह यूज कर रहा है. लैंग कहते हैं कि हमें अपनी प्राइवेट जानकारी से कुछ न कुछ पैसे तो कमाने ही चाहिए. जबकि अभी हम रोज अपना डेटा फ्री में कंपनियों को दे रहे हैं.

यह भी पढ़ें: फेसबुक पर ये शब्द लिखते ही आपके खिलाफ लिया जा सकता है एक्शन
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