चांद पर उम्मीद से ज्यादा है धातु, इस पड़ताल ने वैज्ञानिकों में ला दी बेचैनी

नए शोध से पता चला है कि जितना सोचा जा रहा था , चांद पर उससे कहीं ज्यादा धातु है.

नए शोध में पता चला है कि चांद (Moon) पर जितना सोचा गया था उससे ज्यादा धातु (Metal) है. इससे चांद की उत्पत्ति (Origin) की धारणा को चुनौती मिली है.

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    पिछले कुछ समय में दुनिया के देशों की अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) में दिलचस्पी बढ़ी है. चांद (Moon) तो अब छोटी बात रह गई है वैज्ञानिक अब मंगल (Mars) पर जाने की कोशिश में लगे हैं. लेकिन इस बीच चांद पर मानवीय गतिविधियां तेजी से बढ़ने के आसार भी हो गए हैं और उस पर शोध और अध्ययन भी तेज हो गया है. हाल ही में हुए एक शोध में पता चला है कि चांद की सतह पर जितना पहले सोचा गया था, उससे कहीं ज्यादा मात्रा में धातु (Metal) मौजूद है.

    वैज्ञानिकों को किया और बेचैन
    इस अध्ययन ने वैज्ञानिकों में एक तरह से बैचेनी बढ़ा ही दी है. इस अध्ययन ने सीधे-सीधे ही चंद्रमा की उत्पत्ति की प्रक्रिया को समझने की धारणाओं को चुनौती दी है. अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंस लैटर्स में प्रकाशित इस अध्ययन ने चंद्रमा के सतह पर धूल और अन्य पदार्थों के संयोजन पर नई रोशनी डाली है.

    किसने किया यह शोधकार्य
    USC विटेर्बी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रिकल एवं कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के रिसर्च साइंटिस्ट और नासा के लूनार रिकोनायसेंस ऑर्बिटर (LRO) के मिनी RF उपकरण के सह-अन्वेषक ऐसाम हेगी की अगुआई में यह शोध हुआ है. हेगी की टीम ने चंद्रमा की महीन धूल का अध्ययन करने के लिए राडार से तस्वीरें लीं  इस अध्ययन से उन्होंने पाया कि चंद्रमा की सतह पर धातुओं की उम्मीद से ज्यादा प्रचुरता हो सकती है. इसमें उन्होंने पाया कि ये लोहे और टिन के ऑक्साइड की प्रमुख हो सकती है.

    क्या पाया गया शोध में
    अध्ययन में पाया गया कि चंद्रमा के छोटे और उथले क्रेटरों की तुलना में गहरे और बड़े क्रेटरों में गहराई में ज्यादा मात्रा में धातु है. इससे उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि जब उल्कापिंडों के टकराने से चांद पर इन क्रेटरों का  निर्माण हुआ होगा तब चंद्रमा के अंदर से ये धातु सतह पर आए होंगे.

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    शोध में चांद की सतह की तस्वीरों का अध्ययन किया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


    क्या है चंद्रमा के निर्माण की मान्यता
    अभी तक वैज्ञानिकों का मानना है कि करीब 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी और थियानाम के एक मंगल के आकार का ग्रह के टकराव हुआ था. ज्यादातर वैज्ञानिकों का विश्वास है कि पृथ्वी की सतह के टुकड़े से ही चंद्रमा का निर्माण हुआ था जिसमें धातु ज्यादा मात्रा में नहीं थी.  लेकिन ताजा अध्ययन इसी धारणा को तोड़ता दिखाई देता है.

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    इसका चांद के निर्माण की धारणा से क्या संबंध है?
    इस धारणा के मुताबिक चंद्रमा पर धातुओं की बहुतायत नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह अध्ययन कुछ और ही कह रहा है. चंद्रमा पर लोहे की ऑक्साइड का पृथ्वी से ज्यादा होना इस धारणा में एक विरोधाभास पैदा करता है. इस अध्ययन ने चांद के उन हिस्सों का अध्ययन किया है जिनका अभी तक ज्यादा अध्ययन नहीं हुआ था. इतना ही नहीं इस अध्ययन से तो यह पता चलता है कि चंद्रमा पर और भी ज्यादा मात्रा में धातु हो सकती है. इसी वजह से चांद के निर्माण की प्रचलित धारणा पर भी सवाल उठे हैं.

    तो फिर अब क्या है समस्या
     यह तथ्य की चंद्रमा पर पृथ्वी से ज्यादा धातु है इस अवधारणा को चुनौती दे रहा है कि जब पृथ्वी से अलग होकर चंद्रमा का निर्णाण हुआ था, तब वह क्या पृथ्वी की क्रस्ट से अलग हुआ टुकड़ा हुआ था या फिर  पृथ्वी के मेंटल से.

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    इस अध्ययन में पृथ्वी से चंद्रमा के निर्माण की अवधारणा को चुनौती मिली है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


     

    कई मत सामने आ रहे हैं
    अब इस मामले में कई मत सामने आ रहे हैं. एक मतानुसार कहा जा रहा है कि हो सकता है कि थिया का टकराव पृथ्वी के लिए बहुत घातक रहा हो और उस टकराव से पृथ्वी के अंदरूनी हिस्से तक उसकी कक्षा में चले गए हों. एक अन्य मत के मुताबिक हो सकता है कि टकराव जब हुआ हो तब पृथ्वी बहुत ही युवावस्था मे हो और तब वह मैग्मा के सागर ढका हो. इसके अलावा एक मत यह भी है कि चंद्रमा पर ज्यादा धातुओं का होने उसके जटिल ठंडे होने की प्रक्रिया की वजह से हो सकता है.

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    टीम को योजना अपने शोध जारी रखने की है जिससे अवलोकन के लिए ज्यादा आंकड़े मिल सकें और चंद्रमा के  बारे में और बेहतर जानकारी मिल सके.

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