पहली बार देखे गए ब्रह्माण्ड में इतनी ऊर्जा से भरे प्रकाश के कण

इतनी उच्च ऊर्जा वाले कणों (High Energy Particles) के विकिरण की उम्मीद वैज्ञानिकों को भी नहीं थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

इतनी उच्च ऊर्जा वाले कणों (High Energy Particles) के विकिरण की उम्मीद वैज्ञानिकों को भी नहीं थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ब्रह्माण्ड (Universe) में पहली बार एक बहुत प्रचंड ऊर्जों (High Energy) वाले प्रकाश के कणों (Light Particles) को देखा गया है. इससे बहुत सी नई प्रक्रियाओं की जानकारी मिली है.

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ब्रह्माण्ड में आज भी बहुत से रहस्य ऐसे हैं जिन्हें खोजा जाना बाकी है. हमारे वैज्ञानिक और खगोलविद इन रहस्यों की पड़ताल में रोज नई जानकारियां हासिल कर रहे हैं. इसी कड़ी में तिब्बत के वेधशाला (Tibetan Observatory) ने एक चौंकाने वाली खोज की है. वैज्ञानिकों ने प्रकाश के कणों (Light Particles) की खोज की है जो बहुत ही अधिक ऊर्जा से भरे हैं. यह पहली बार है जब इतनी अधिक ऊर्जा वाले कणों (Highest Energy Particles) को देखा गया है.

एक बहुत बड़ी उपलब्धि

तिब्बत में चीन द्वारा स्थापित यह खगोलीय वेधशाला के जरिए की गई यह खोज एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. बताया गया है कि प्रकाश के खोजे गए इन कणों की ऊर्जा 1.4 पीटा इलेक्ट्रॉन वोल्ट है. यह ऊर्जा सूर्य से आने वाले प्रकाश के कण यानि फोटोन (Photons) की औसत ऊर्जा के दस लाख अरब गुना ज्यादा है.

उम्मीद के कई गुना ताकतवर
इन फोटोन के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि ये उम्मीद से एक हजार गुना ज्यादा ताकतवर हैं. उच्च ऊर्जा आवेशित कण जिन्हें कॉस्मिक विकिरण भी कहा जाता है फोटोन और परमाणु केंद्रक होते हैं जिनकी गति प्रकाश की गति के बराबर तक बढ़ जाती है. ये विकिरण सुपरनोवा जैसे किसी प्रचंड खगोलीय घटनाओं में निकलती हैं. सुपरनोवा मरते हुए तारे का अंतिम विस्फोट होता है जिससे नया तारा पैदा होता है.

विकिरणों के स्रोत का रहस्य

वैज्ञानिक आमतौर पर इस तरह के विकिरणों के स्रोत के बारे में नहीं जान पाते हैं क्योंकि ऐसी विशाल खगोलीय घटनाएं एक बहुत ही शक्तिशाली विद्युत चुंबकीय क्षेत्र बना देती हैं जो इन किरणों के रास्तों को मोड़ देती हैं. कॉस्मिक विकिरण की खोज सबसे पहले 100 साल पहले हुई थी. तभी से वैज्ञानिक इनके स्रोतों के बारे में जानने का प्रयास कर रहे हैं.



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ये उच्च ऊर्जा वाले कण पृथ्वी (Earth) पर अलग तरह के कणों की बारिश का कारण होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

विकिरण से ही एक और विकिरण

जब कॉस्मिक विकिरण निकलती हैं तो अपनी यात्रा के दौरान वे अपने फोटोन की ऊर्जा के दसवें हिस्से वाली ऊर्जा का फोटोन उत्सर्जित करती हैं जिन्हें गामा विकिरण कहते हैं. ये सीधा रास्ता अपना कर पृथ्वी तक आते हैं लेकिन पृथ्वी का वायुमंडल इन्हें रोक लेता है. लेकिन जब ये गामा विकिरण वायुमंडल में हवा क अणुओं से प्रतिक्रिया करता है तो दूसरे तरह के कणों की बारिश करता है.

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कब पकड़े गए ऊच्च ऊर्जा वाले फोटोन

तिब्बत की लार्ज हाई एल्टीट्यूड एयर ऑबजर्वेटरी का काम पृथ्वी पर गामा विकरण और वायुमंडल के अणुओं से टकराव के कारण निकलने वाले इस तरह के उच्च ऊर्जा वाले कणों को पकड़ना है. 2019 में अपने पहले अवलोकन में इस चीनी वेधशाला में शोधकर्ताओं ने 530 से ज्यादा ऐसे फोटोन पकड़े जिनकी ऊर्जा 0.1 पीटावोल्ट से भी ज्यादा थी.

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क्रैब नेबुला (Crab Nebula) जैसी विशाल खगोलीय घटनाओं से ही इस तरह के कण उत्सर्जित हो सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

स्रोत की पड़ताल

हाल ही में नेचर में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक ये फोटोन हमारी गैलेक्सी के 12 स्रोतों आ सकते हैं जिनमे इन कणों को इतनी अधिक त्वरण से गति प्रदान करने की क्षमता है. इनमें ज्यादा ऊर्जा वाले कणों को उत्सर्जित करने की संभावना सिगनस कैकून में है जो हमारे सूर्य से 4600 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है. उच्च ऊर्जा वाले इन स्रोतों को पीवेट्रॉन (PeVatron) कहा जाता है. ये हमारी गैलेक्सी में हर जगह पाए जाते हैं.

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इस अध्ययन के मॉडलों ने अनुमान लगाया है कि क्रैब नेबुला, जो हमारी मिल्की वे का एक उच्च ऊर्जा सुपरनोवा विस्फोट है, और एक अन्य संभावित स्रोत के मैग्नेटिक फील्ड भी इन कणों को 0.1 पीटावोल्ट की ऊर्जा तक उत्तेजित कर सकते हैं. लेकिन 1 पीटावोल्ट तक पहुंचाने के लिए भी कारकों को चरम स्तर तक कार्य करना होगा.

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