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2021 तक अंग्रेजी वालों को पीछे छोड़ देंगे हिंदी वाले

2021 तक हिंदी वाले अंग्रेजी वालों को पछाड़ देंगे

2021 तक हिंदी वाले अंग्रेजी वालों को पछाड़ देंगे

14 सितंबर 1949 को हिंदी (Hindi) को राजभाषा का दर्जा मिला. इन वर्षों में हिंदी ने प्रगति की है. इंटरनेट की दुनिया में भी हिंदी का इस्तेमाल बढ़ा है...

  • News18Hindi
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    आज हिंदी दिवस (Hindi Diwas) है. आज ही के दिन यानी 14 सितंबर 1949 को हिंदीभाषा को राजभाषा (official language of India) का दर्जा मिला था. उसके बाद हर 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है.

    2011 के एक डाटा के मुताबिक भारत की 44 फीसदी आबादी हिंदी बोलती है. हिंदी बोलने लिखने वाले लोग लगातार बढ़ रहे हैं और अच्छी बात ये है कि टेक्नोलॉजी में इसका इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. अक्सर अंग्रेजी से पिछड़ने और कमतर समझी जाने वाली हिंदी ने इंटरनेट की दुनिया पर भी अपनी पहचान बनाई है. इस बारे में गूगल ने कुछ दिलचस्प आंकड़े बताए हैं.

    गूगल की रिपोर्ट- अंग्रेजी को पीछे छोड़ देगी हिंदी

    गूगल की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले दो साल में अंग्रेजी को पीछे छोड़ देगी हिंदी. गूगल केपीएमजी ने अप्रैल 2017 में भारतीय भाषाओं को लेकर एक स्टडी की थी. केपीएमजी रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2016 के बीच इंटरनेट पर 41 फीसदी की दर से भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल बढ़ा. 2016 के आखिर में इंटरनेट पर भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़कर 234 मिलियन यानी करीब 23 करोड़ हो गई.

    इंटरनेट पर भारतीय भाषाओं में सबसे ज्यादा हिंदी का इस्तेमाल होता है. इंटरनेट पर हिंदी वाले अंग्रेजी को भी पीछे छोड़ने वाले हैं. केपीएमजी की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 तक भारत में इंटरनेट पर हिंदी का इस्तेमाल करने वाले अंग्रेजी भाषा वालों को पीछे छोड़ देंगे. 2021 तक इंटरनेट में हिंदी का इस्तेमाल करने वालों की संख्या अंग्रेजी वालों से भी ज्यादा हो जाएगी.

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    हिंदी भाषा को लेकर ये अच्छी खबर है. इंटरनेट पर हिंदी के साथ दूसरी भारतीय भाषाओं जैसे- मराठी, बंगाली और दक्षिण भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल करने वाले भी बढ़े हैं.

    इंटरनेट की दुनिया में हिंदी के इस्तेमाल को देखते हुए अब कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियां हिंदी भाषा को देखते हुए अपने फीचर्स बना रही है.

    भारत की आमभाषा भी है हिंदी

    हिंदी भारत की राजभाषा ही नहीं बल्कि आमभाषा भी है. 2001 की जनगणना के मुताबिक करीब 25.79 करोड़ भारतीय हिंदी को अपनी मातृभाषा मानते हैं. करीब 42.20 करोड़ लोग 50 बोलियों में से एक के तौर पर इस भाषा को बोलते हैं. 1998 से पहले मातृभाषा के तौर पर इस्तेमाल होने वाली भाषा के रूप में हिंदी को तीसरा स्थान हासिल था.

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    कैसे बनी हिंदी राजभाषा

    आजादी के बाद किस भाषा को राजभाषा बनाई जाए इसको लेकर बड़ा सवाल था. भारत में सैकडों भाषाएं बोली जाती हैं. उनमें से किसी एक भाषा को चुनना काफी मुश्किल काम था. भारतीय संविधान को बनाने के लिए 6 दिसंबर 1946 को संविधान सभा का गठन हुआ. 26 नवंबर 1949 को संविधान के अंतिम प्रारुप को मंजूरी दी गई. 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान अपनाया.

    भाषा को लेकर संविधान सभा में भी खूब सवाल उठे. हिंदी के साथ अंग्रेजी को भी शामिल करवाने के पक्षधर थे. काफी सोचविचार के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधानसभा ने एक मत से फैसला लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी.

    हिंदी भाषा को राजभाषा बनाए जाने का विरोध भी हुआ था. अंग्रेजी भाषा को हटाए जाने की खबर से देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तक हुए थे.

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