क्या सच में पाकिस्तान में हिंदू नेताओं की दुर्गति हो रही है?

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: September 10, 2019, 2:52 PM IST
क्या सच में पाकिस्तान में हिंदू नेताओं की दुर्गति हो रही है?
पाकिस्तान में हिंदू नेता

पाकिस्तान (Pakistan) के हिंदू नेता (hindu leader) बलदेव कुमार (Baldev Kumar) ने भारत में राजनीतिक शरण की मांग की है. उन्होंने पाकिस्तान में अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा बताया है. सवाल है कि अगर पाकिस्तान में हिंदू नेता सुरक्षित नहीं तो आम हिंदुओं का क्या होगा...

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पाकिस्तान (Pakistan) में हिंदू धर्म (Hindu) से आने वाले एक पूर्व विधायक (Former MLA) ने भारत में राजनीतिक शरण की मांग की है. पाकिस्तान में खैबर पख्तनूख्वां से विधायक रह चुके बलदेव कुमार (Baldev Kumar) ने वहां अपनी जान को खतरा बताया है. इमरान खान की पार्टी तहरीक ए इंसाफ (PTI) से बलदेव कुमार खैबर पख्तूनख्वां से विधायक चुने गए थे. बलदेव कुमार पाकिस्तान से भागकर भारत आए हैं और अपने परिवार की जान को खतरा बताकर भारत में राजनीतिक शरण की मांग कर रहे हैं.

अब सवाल ये उठ रहे हैं कि पाकिस्तान में अगर बलदेव कुमार जैसे नेता सुरक्षित नहीं हैं तो आम हिंदुओं का क्या हाल होता होगा? पाकिस्तान के हिंदू नेता बलदेव कुमार के बयान के बाद पाकिस्तान में हिंदू नेताओं की पड़ताल जरूरी हो जाती है. आइए जानते हैं कि पाकिस्तान में क्या है हिंदू नेताओं की स्थिति और बलदेव कुमार के राजनीतिक शरण की मांग कितनी उचित है?

पाकिस्तान की संसद की स्थिति
पाकिस्तान में भी भारत की तरह दो सदन होते हैं. निचला सदन नेशनल असेंबली कहलाता है और ऊपरी सदन को नेशनल सीनेट कहते हैं. पाकिस्तान की संसद नेशनल असेंबली ऑफ पाकिस्तान में कुल 342 सदस्य होते हैं. इन सदस्यों को पाकिस्तान का सांसद या मेंबर्स ऑफ नेशनल असेंबली कहा जाता है.

342 में 272 सदस्य चुनकर आते हैं. जबकि 70 सीटें महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित की गई हैं. अल्पसंख्यकों में हिंदू धर्म के लोगों की आबादी सबसे ज्यादा है. हिंदू के अलावा सिख और बौद्ध धर्म के लोग भी अल्पसंख्यक में आते हैं.

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पाकिस्तान में हिंदू नेता बलदेव कुमार


2018 के चुनाव में इमरान खान की पार्टी को मिली थी बंपर जीत
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2018 के चुनाव में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की 270 सीटों पर चुनाव हुए. इमरान खान की तहरीक ए इंसाफ चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसे कुल 149 सीटें हासिल हुईं. पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज गुट) को 82 और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को 53 सीटें हासिल हुईं. जीत के बाद 9 निर्दलीय विधायकों ने भी इमरान की पार्टी जॉइन कर ली. 13 अगस्त 2018 को पाकिस्तान के सांसदों ने शपथ ली.

2018 के चुनाव में पहली बार जीते 3 हिंदू नेता
2018 के चुनाव में पाकिस्तान के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि 3 जनरल सीटों से हिंदू नेता जीतकर आए. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीटों से हिंदू सांसद और विधायक चुने जाते रहे हैं. लेकिन 2018 के चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ कि मुस्लिम बहुल इलाकों से हिंदू नेता चुनाव जीतकर चुने गए. तीनों हिंदू नेता पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी से जीतकर आए थे. तीनों को पाकिस्तान के सिंध इलाके से जीत हासिल हुई थी.

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इमरान खान के साथ डॉ रमेश


पहली बार चुनाव जीतकर पाकिस्तान की संसद में पहुंचा हिंदू नेता
हिंदू नेता महेश मलानी पहली बार चुनाव जीतकर सांसद बने. उन्होंने नेशनल असेंबली की सिंध इलाके की थारपरकर सीट से जीत हासिल की थी. मलानी ने अपने निकटम मुस्लिम उम्मीदवार को 1 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था. जिस इलाके से मलानी चुने गए, वहां हिंदुओं की आबादी 49 फीसदी है.

वहीं दो हिंदू नेताओं ने प्रोवेंसियल असेंबली सीट से जीत हासिल की थी. हरि राम किश्वरी लाल ने प्रोविंसियल असेंबली की सीट नंबर 147 से जीत हासिल की. वहीं जमशोरो गियानू मल उर्फ गियान चंद एसरानी ने प्रोविंसियल असेंबली सीट नंबर 81 से जीत हासिल की थी. किश्वरी लाल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के पूर्व प्रमुख आसिफ अली जरदारी के करीबी बताए जाते हैं. उन्होंने मिरपुरखास से जीत हासिल की.

मीरपुरखास में हिंदुओं की आबादी 15 लाख के आसपास है. ये कुल आबादी का 33 फीसदी है. किश्वरी लाल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मुस्लिम उम्मीदवार को करीब 10 हजार वोटों के अंतर से हराया था.
जमशोरो गियानू मल ने सिंध प्रांत के कोहिस्तान इलाके के जमशोरो जिले से जीत हासिल की थी. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मुस्लिम उम्मीदवार को 7 हजार वोटों से हराया था.

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पाकिस्तान में हिंदू नेता महेश मलानी


2018 के चुनाव नतीजों का हिंदू समुदाय ने स्वागत किया था
इस चुनाव नतीजे का पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू समुदाय ने स्वागत किया था. उस वक्त पाकिस्तान में हिंदू सभा के चेयरमैन डॉ. गोविंद राम ने कहा था कि चुनाव के ऐसे नतीजे उत्साहवर्धक हैं. चुनावी नतीजे मीडिया में बनी पाकिस्तान की छवि के विपरीत रहे थे. हालांकि ये कह सकते हैं कि हिंदू नेताओं को पहली जीत भी उन्हीं इलाकों में मिली, जहां उनकी आबादी मुस्लिमों के बराबर तो नहीं लेकिन ठीक-ठाक थी.

पाकिस्तान की कुल आबादी में हिंदुओं की आबादी करीब 1.6 फीसदी है. जबकि सिंध इलाके में इनकी आबादी सबसे ज्यादा, करीब 6.51 फीसदी है. जिस थापरकर सीट से मलानी हिंदू सांसद चुने गए वहां हिंदुओं की आबादी करीब 41 फीसदी है.

कौन हैं महेश मलानी जिन्हें पहली बार सांसद चुना गया
महेश मलानी पाकिस्तान में राजस्थानी पुष्करना ब्राह्मण नेता हैं. उन्होंने 2013 में सिंध से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी. नेशनल असेंबली में पहली बार किस्मत आजमाने के बाद धीरे-धीरे उनकी सियासत चमकने लगी और 2018 में जाकर उन्हें जीत हासिल हुई.

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 10 सीटें अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं. इन 10 सीटों को संसद में पहुंची विभिन्न पार्टियां अपने संख्याबल के आधार पर बांट लेती हैं. हालांकि जानकार बताते हैं कि इससे हिंदुओं को कुछ खास फायदा नहीं मिलता है.

16 साल पहले मिला हिंदुओं को चुनाव लड़ने का अधिकार
पाकिस्तान में गैर मुस्लिमों को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं था. 2002 में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान के संविधान में संशोधन कर गैर मुस्लिमों को ये अधिकार दिलवाया. जिसके बाद हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोग भी नेशनल और प्रोविंसियल असेंबली का चुनाव लड़ने के योग्य हुए.

हालांकि अधिकार मिलने के बाद पहली जीत हासिल करने में 16 साल लग गए. 2018 में गैर मुस्लिम नेता के तौर पर महेश मलानी पहली बार चुनावी जीत हासिल कर संसद पहुंचे.

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 10 सीटें गैर मुस्लिमों के लिए आरक्षित हैं. इसमें से 6-7 सीटों पर हिंदू नेता चुनकर आते हैं. 2018 के चुनाव में 10 सीटों में इमरान खान की तहरीक ए इंसाफ की तरह से 5, पाकिस्तान मुस्लिम लीग की तरफ से 2, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की तरफ से 2 और मुत्तेहिदा मजलिस ए अमल से एक नेता चुने गए हैं. हिंदू नेताओं में लाल चंद, सुनीला रथ, रमेश कुमार वनक्वानी, जयप्रकाश उक्रानी, दर्शन पुंशी और रमेश लाल का नाम लिया जाता है.

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First published: September 10, 2019, 2:32 PM IST
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