शनि के चंद्रमा के बारे में क्या कहती हैं कैसिनी के आंकड़ों से बनी नई तस्वीरें

शनि (Saturn) के चंद्रमा (Moon) पर बर्फ से संबंधित स्पष्ट भूगर्भीय प्रक्रिया दिखाई दी है.
शनि (Saturn) के चंद्रमा (Moon) पर बर्फ से संबंधित स्पष्ट भूगर्भीय प्रक्रिया दिखाई दी है.

नासा (NASA) के कैसिनी यान के आंकड़ों से कुछ तस्वीरें बनाई गई हैं जो शनि (Saturn) के चंद्रमा एनसोलॉडस (Enceladus) के बारे में अहम जानकारी दे रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 20, 2020, 6:54 AM IST
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अंतरिक्ष (Space) में अब तक भेजे गए कई यान ऐसे हैं जो वैसे तो खत्म हो गए हैं या खो गए हैं या नष्ट हो चुके हैं, लेकिन उनके दिए आंकड़े हमारे खगोलविदों (Astronomers) के लिए बहुत कीमती  हैं. ऐसा ही एक यान है नासा के कैसिनी अंतरिक्ष यान. इसकी नई एकीकृत तस्वीरें शनि (Saturn) के चंद्रमा एनसोलॉडस (Enceladus) की अब तक की सबसे विस्तृत जानकारी देने वाली तस्वीरें हैं.

क्या बताया तस्वीरों ने
इन तस्वीरों से जो आंकड़े बने हैं उनसे इस बात के पक्के प्रमाण मिले हैं कि इस चंद्रमा के उत्तरी गोलार्द्ध में भीतर बर्फ निकल कर सतह पर आई है. कैसिनी के विजिबल एंड इंफ्रारेड मैपिंग स्पैक्ट्रोमीटर,विम्स (VIMS) ने शनि, उसके छल्ले (Rings) और उसके दस बर्फीले चंद्रमाओं से प्रतिबिंबित होने वाले प्रकाश को पकड़ा जो इंसान के द्वारा देखा जा सकता है.

तस्वीरों से मैप
इसके अलावा उसने इंफ्रारेड किरणों को भी पकड़ा जिससे बहुमूल्य आंकड़े मिले. विम्स ने इसके बाद देखे जा सकने वाले प्रकाश को अलग अलग वेवलेंथ में छांटा. इस जानकारी से वैज्ञानिकों को  उन पदार्थों के बारे में जानकारी मिली जो इस प्रकाश को प्रतिबिंबित कर रहे थे. विम्स के आकड़े और कैसिनी के इमेजिंग साइंस सबसिस्टम की ली गई विस्तारित तस्वीरों का उपयोग एनसेलॉडस का विस्तृत मैप बनाने के लिए उपयोग किया गया है.



कब खोजा गया था चंद्रमा
कैसेनी वैज्ञानिकों ने एनसेलॉडस को साल 2005 में खोजा था जो कि एक बहुत देखने में चमकीली बहुत ही ज्यादा प्रकाश प्रतिबिंबित करने वाली स्नोबॉल की तरह लगता है.  यह अपने क्रोड़ के महासागर से बहुत ही ज्यादा मात्रा में बर्फ के कण और भाप निकालता है. नए स्पैक्ट्रल मैप दर्शाते हैं कि इंफ्रारेड संकेत साफ तौर पर उस भूगर्भीय गतिविधि से संबंध बताते है जो दक्षिणी ध्रुव पर आसानी से देखी जा सकती है. वहीं से ही बर्फ के विस्फोट होते हैं वह भाप के साथ आंतरिक महासागर से निकलती है.



उत्तरी गोलार्द्ध की भी वैसी ही कहानी
लेकिन कुछ इंफ्रारेड हिस्से उत्तरी गोलार्द्ध में दिखाई देते हैं. इससे वैज्ञानिकों को यह पता चला कि उत्तरी क्षेत्र  भी ताजा बर्फ से तो घिरा ही है, इसके साथ ही वहां भी उसी तरह की भूगर्भीय गतिविधि सतह पर होती दिखाई दे रही है.  उत्तरी इलाके में  इस तरह की गतिविधि या तो बर्फीले जेट्स की वजह से हो सकती हैं या फिर क्रोड़ से फ्रैक्चर्स के जरिए बर्फ का महासागरों की सतह तक धीरे-धीरे आना इसका कारण हो सकता है.

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यह जानकारी भी
हाल ही में इकारस में प्रकाशित इस शोध के सहलेखक और फ्रांस के नैनटेस यूनिवर्सिटी के विम्स वैज्ञानिक गैब्रियल टोबे ने बताया, “इंफ्रारेड ने हमें बताया है कि दक्षिणी ध्रुव की सतह युवा है जो कि हैरान करने वाली बात नहीं है. क्योंकि हम वहां के जेट्स और बर्फीली सामग्रियों के विस्फोट के बारे में जानते थे.” गैब्रियल ने बताया कि, “अब इनकी वजह से हम कह सकते है कि उत्तरी क्षेत्र भी बहुत ज्यादा पुराना नहीं हैं कम से कम भूगर्भीय समयरेखा के लिहाज से नहीं.

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शनि (Saturn) ग्रह के चंद्रमा (Moon) में जीवन की संभावना होने की सबसे अधिक बताई जा रही है. (तस्वीर: Pixabay)


कैसिनी के 13 साल
दक्षिणी कैलीफोर्निया  स्थित नासा के जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी में कैसिनी 13 साल अधिक समय तक शनि ग्रह का ऑर्बिटर रहा था. लेकिन यह सितंबर 2017 में शनि ग्रह के वायुमंडल में गिर गया.

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एनसेलॉडस में जीवन का समर्थन करने वाली सक्षम हालात होने की पूरी गुंजाइश है.  इसमें एक ऐसा महासागर है जो अपने आंतरिक भाग की ऊष्मा से गर्मी लेता होगा, जैसा की हमारी पृथ्वी के महासागरों की जमीन पर होता है.
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