Dandi March: भारत में आज ही शुरू हुई थी ऐतिहासिक दांडी यात्रा की शुरुआत

दांडी यात्रा (Dandi March) सविनय अवज्ञा आंदोलन के अहिंसक होने के एक प्रमुख संकेत था.  (फोटो: Flickr)

दांडी यात्रा (Dandi March) सविनय अवज्ञा आंदोलन के अहिंसक होने के एक प्रमुख संकेत था. (फोटो: Flickr)

12 मार्च 1930 भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian Freedom Movement) में एक अहम शुरुआत की तरह माना जाता है जिसमें महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने दांडी यात्रा (Dandi March) शुरु कर सविनय अवज्ञा आंदोलन की नींव रखी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2021, 9:34 AM IST
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12 मार्च (12 March) की तारीख भारत के राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन (National Independence Movement) के इतिहास में बहुत अहम तारीख है. आज ही के दिन महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने भारत की आजादी के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन का आगाज करते हुए दांडी यात्रा (Dandi March) की शुरुआत की थी. अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से शुरू हुई इस यात्रा का उद्देश्य इसके अंत में नमक कानून को तोड़ना था जो अंग्रेजों के खिलाफ देश भर में विरोध का एक बड़ा संकेत था.

एक सुनियोजित आंदोलन

महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के बनाए अन्यायपूर्ण नमक कानून की खिलाफत को अंग्रेजों के विरोध के. लिए हथियार बनाया. इस यात्रा की पूरी तरह से योजना बनाई गई थी. इसमें कांग्रेस ने सभी नेताओं की भूमिकाएं तय गई थीं. यह भी तय किया गया था कि अगर अंग्रेजों ने गिरफ्तारी की तो कौन से कौन से नेता यात्रा को संभालेंगे. इस यात्रा को भारी तादात में जन समर्थन मिला और जैसे जैसे यात्रा आगे बढ़ती गई बहुत सारे लोग जुड़ते चले गए.

रोज 16 किलोमीटर चलते थे गांधीजी
अंग्रेजों के नमक कानून के खिलाफ गांधीजी ने अपने 79 साथियों के साथ 240 मील यानि 386 कोलीमीटर लंबी यात्रा कर नवसारी के एक छोटे से गांव दांडी पहुंचे जहां समुद्री तट पर पहुंचने पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से नमक कानून बनाकर नमक कानून तोड़ा. 25 दिन तक चली इस यात्रा में बापू रोज 16 किलोमीटर की यात्रा करते थे. जिसके बाद वे 6 अप्रैल को दांडी पहुंचे थे.

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गांधी जी (Gandhiji) दांडी पहुंच कर नमक कानून तोड़ते हुए. (तस्वीर: Wikimedia commons)


लोगों ने दिया पूरी तरह से बापू का साथ



12 मार्च 1930 का दिन भारत की आजादी की लड़ाई में अहम पड़ाव माना जाता है. यह वह समय था जब कुछ महीने पहले ही कॉन्ग्रेस ने पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया था. इससे पहले साल 1920 में असहयोग आंदोलन चौरीचौरा हिंसा की भेंट चढ़ गया था. इसके बाद यह पहला इतना बड़ा जनआंदोलन था जिसमें लोगों ने बापू का भरपूर साथ दिया और यह आंदोलन पूरी तरह अहिंसक रहते हुए सफल रहा.

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अहिंसा ने तोड़ा अंग्रेजी हुकूमत का गुरूर

दांडी मार्च खत्म होने के बाद चल असहयोग आंदोलन के तहत बड़े पैमाने पर गिरफतारियां हुईं. कांग्रेस के प्रथम पंक्ति के सभी नेता गिरफ्तार होते रहे, लेकिन आंदोलनकारियों और उनके समर्थकों ने किसी तरह से हिंसा का सहारा नहीं लिया. यहां तक कि अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर ने अंग्रेजों के सत्याग्रहियों पर हुए अत्याचार की कहानी दुनिया के सामने रखी तो पूरी दुनिया में  ब्रिटिश साम्राज्य की बहुत बेइज्जती हुई.

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दांडी यात्रा (Dandi March) में गांधी जी के साथ हर गांव में जनसैलाब जुड़ता चला गया. (तस्वीर: Wikimedia commons)


भारतीय स्वतंत्रता की नींव

इस आंदोलन का खात्मा गांधी इरविन समझौते के साथ हुआ था. इसके बाद अंग्रेजों ने भारत को स्वायत्तता देने के बारे में विचार करना शुरू कर दिया था. 1935 के कानून में इसकी झलक भी देखने को मिली और सविनय अवज्ञा की सफलता के विश्वास को लेकर गांधी जी ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया जिसने अंग्रेजों को भारत छोड़ने को मजबूर होना पड़ा.

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इस बार दांडी यात्रा की 91वीं सालगिरह है. लेकिन आजादी के 75 साल पूरे होने जा रह हैं. ऐसे में यह मौका और भी ज्यादा खास हो गया है. इसी वजह से भारत सरकार की ओर से आजादी के 75 साल पूरे होने के 75 सप्ताह पहले 12 मार्च को आजादी का अमृत महोत्सव शुरू किया जा रहा है.
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