भारतीय सैनिकों ने ऐसे हमला कर सिक्किम पर किया कब्‍जा, फिर आज ही के दिन बना भारत का 22वां राज्‍य

भारतीय सैनिकों ने ऐसे हमला कर सिक्किम पर किया कब्‍जा, फिर आज ही के दिन बना भारत का 22वां राज्‍य
सिक्किम का भारत में विलय करने के लिए संसद में पेश किया विधेयक 26 अप्रैल 1975 को दोनों सदनों से पारित हो गया था.

भारतीय सैनिकों ने 6 अप्रैल 1975 की सुबह सिक्किम (Sikkim) के राजमहल पर हमला कर दोपहर 12.45 बजे तक चोग्‍याल (King) को बंदी बना लिया था. इसके बाद कराए गए जनमत संग्रह में 97.5 फीसदी लोगों ने भारत में विलय की वकालत की. फिर सिक्किम को 22वां राज्‍य बनाने के लिए पेश किया बिल 26 अप्रैल को भारतीय संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2020, 9:46 PM IST
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देश के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों की बात हो और खूबसूरत राज्‍य सिक्किम (Sikkim) का जिक्र ना आए ये हो ही नहीं सकता. हालांकि, सिक्किम का भारत में विलय काफी संघर्षों के बाद 26 अप्रैल 1975 को हो पाया था. सिक्किम के भारत (India) में विलय का चीन (China) ने खूब विरोध किया था. तब से ही दोनों देशों के बीच इस पूर्वोत्‍तर राज्‍य को लेकर विवाद जारी है.

दरअसल, सिक्किम 1642 में तब अस्तित्‍व में आया, जब फुन्त्सोंग नामग्याल को सिक्किम का पहला चोग्याल (King) घोषित किया गया. नामग्याल को तीन बौद्ध भिक्षुओं ने राजा घोषित किया था. यहां से सिक्किम में राजशाही (Monarchy) की शुरुआत हुई. इसके बाद नामग्याल राजवंश ने 333 साल तक सिक्किम पर राज किया.

भारतीय सैनिकों ने 6 अप्रैल की सुबह किया हमला
आजादी के बाद भारत (Independent India) की तमाम रियासतों का देश में विलय कराया गया. हालांकि, सिक्किम को भारत में विलय कराने में 28 साल लग गए. दरअसल, चोग्‍याल भारत में विलय करने को तैयार नहीं थे. वह सिक्किम के लिए भूटान (Bhutan) के बराबर आजादी और स्‍वायत्‍तता चाहते थे. वह कहते थे कि हमने इसके लिए भारत के साथ संधि की हुई है. वह कहते थे कि मैं सिक्किम का आजाद देश का दर्जा बनाए रखने की कोशिश करता रहूंगा.
भारतीय सैनिकों ने 6 अप्रैल 1975 की दोपहर तक सिक्किम के राजा को राजमहल में बंदी बना लिया था.




चोग्‍याल की ऐसी कोशिशों के बीच 6 अप्रैल, 1975 की सुबह सिक्किम के चोग्याल को अपने राजमहल (Palace) के बाहर भारतीय सैनिकों के ट्रकों की आवाज सुनाई दी. उनके राजमहल को चारों तरफ से 5,000 भारतीय सैनिकों ने घेर रखा था. इसके बाद भारतीय सैनिकों ने ताबड़मोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. राजमहल के गेट पर तैनात बसंत कुमार छेत्री को गोली लगी और वहीं ढेर हो गए.

30 मिनट में राजमहल पर कर लिया गया कब्‍जा
भारतीय सैनिकों को राजमहल में तैनात 243 गार्डों को काबू में करने में बमुश्किल 30 मिनट लगे. दोपहर 12.45 बजे तक सिक्किम का आजाद देश का दर्जा खत्‍म हो चुका था. चोग्याल को महल में ही नजरबंद कर दिया गया. उसी दिन दिल्ली के तत्‍कालीन नगरपालिका आयुक्त बीएस दास के पास विदेश सचिव केवल सिंह का फोन आया कि वह तुरंत आकर मिलें.

बीएस दास 8 अप्रैल को विदेश मंत्रालय के आदेश पर सिक्किम पहुंच गए. दास ने 9 अप्रैल को चोग्याल से मिलने का समय मांगा तो उन्होंने बहाना बनाकर मिलने से इनकार कर दिया. अगले दिन यानी 10 अप्रैल को चोग्याल ने बहुत ही तल्‍खी से दास से कहा, 'इस मुगालते में न रहिएगा कि सिक्किम गोवा है. हम एक स्वतंत्र, संप्रभु देश हैं. भारत ने आपकी सेवाएं मेरी सरकार को दी हैं. हमें दबाने की कभी कोशिश मत करना. आपको मेरी सरकार के तहत काम करना है.'

बीएस दास बताते हैं कि तत्‍कालीन प्रधामंत्री इंदिरा गांधी ने विलय शब्द का कभी इस्तेमाल ही नहीं किया.


23 अप्रैल को विलय का बिल संसद में पेश हुआ
बीएस दास ने 11 अप्रैल को इंडिया हाउस पहुंचकर अपने दोस्त शंकर बाजपेई से पूछा कि मेरे लिए केवल सिंह का क्‍या आदेश है. बीबीसी की एक रिपोर्ट में दास के हवाले बताया गया है कि उनके पास सिक्किम को लेकर कोई निर्देश नहीं थे. बस इतना कहा गया था कि हम सिक्किम के लोगों की उम्‍मीदों को पूरा करने में मदद करें. तत्‍कालीन प्रधामंत्री इंदिरा गांधी ने कोई औपचारिक राजनीतिक वादा नहीं किया था. विलय शब्द का तो कभी इस्तेमाल ही नहीं किया गया.

97 फीसदी से ज्‍यादा ने भारत में विलय की वकालत की
इसके बाद सिक्किम में कराए गए जनमत संग्रह में 97.5 फीसदी लोगों ने भारत के साथ जाने की वकालत की. इसके बाद 23 अप्रैल, 1975 को सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाने का संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया गया. उसी दिन इसे 299-11 के मत से पास कर दिया गया. राज्यसभा में यह बिल 26 अप्रैल को पास हुआ. इसके बाद 15 मई, 1975 को तत्‍कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने बिल पर हस्ताक्षर कर दिए. इसी के साथ सिक्किम पर नामग्‍याल राजवंश का शासन समाप्त हो गया.

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