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कभी जंगलों से आबाद था अंटार्कटिका, डायनासोर के युग में लगा करती थी आग

कभी जंगलों से आबाद था अंटार्कटिका, डायनासोर के युग में लगा करती थी आग

अंटार्कटिका (Antarctica) में हमेशा से बर्फीला रेगिस्तान नहीं था, कभी यहां जंगल भी होते थे जिनमें आग भी  लगती थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अंटार्कटिका (Antarctica) में हमेशा से बर्फीला रेगिस्तान नहीं था, कभी यहां जंगल भी होते थे जिनमें आग भी लगती थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अंटार्कटिका (Antarctica) के बारे में कई लोगों का यह मानना है कि यहां बर्फ ही रही होगी. लेकिन आज से 6 से 8 करोड़ साल पहले जब पृथ्वी पर एक गर्म जलवायु का दौर था, यहां भी जंगल हुआ करते थे और डायनासोर विचरण करते थे. इस बात की पुष्टि अंटार्कटिका में ही मिले जीवाश्मों (Fossils) के अध्ययन से हुई है जिसमें पता चला है कि यहां के जंगलों में आग (Wildfire) लगा करती थी. वैज्ञानिकों ने मिले जीवाश्मों की पड़ताल में शोधकर्ताओं को राख के अवशेष मिले हैं.

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    आज के समय में पृथ्वी (Earth) का जो भूगोल है वह हमेशा ऐसा ही नहीं था. पृथ्वी के उत्तर और दक्षिणी दोनों ही ध्रुव इस समय बर्फ से ढके हैं. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं था. करोड़ों साल पहले डायनासोर के युग में दक्षिणी ध्रुव के अंटार्कटिका (Antarctica) में ऐसा नहीं था. कई ऐसा प्रमाण मिले हैं कि एक समय अंटार्कटिका में गर्म जलवायु हुआ करती थी. एक अध्ययन में वैज्ञानिकों को राख के अवशेष मिले हैं जिनसे पता चलता है कि क्रिकेटेशियस काल में यानि डायनासोर के युग में यहां के जंगलों में आग (Wildfire) लगी थी. इतना ही नहीं जब वैज्ञानिकों ने इस आग की वजह जानने का प्रयास किया तो उन्हें और हैरानी हुई.

    करोड़ों साल पहले जंगल
    अंटार्कटिका के बारे में कई लोगों को लगता है कि वहां विशाल बर्फ की चादरें पृथ्वी पर शुरू से ही मौजद थीं. आज यह इलाका भले ही बर्फीला रेगिस्तान हो और जीवन कम मात्रा में उपस्थित है. लेकिन एक समय यह जैविक और भूगर्भीय गतिविधियों के लिहाज से बहुत सक्रिय था. आज से 7.5 करोड़ साल पहले क्रिटेशियस काल में, जब पृथ्वी अपने सबसे गर्म दौर में थी,  यहां जंगल भी हुआ करते थे.

    जीवाश्म में राख
    ब्राजील की फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ पेर्नामबूको के शोधकर्ताओं की अगुआई में अंतराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने अंटार्कटिका के जेम्स रॉस द्वीप का दौरा किया है. साल 2015-16 के समय किए गए इस दौरे में शोधकर्ताओं को ऐसे जीवाश्म मिले जिनमें कोयले के अवशेष भी थे जिससे पता चला है कि इस इलाके में कभी जंगल की आग लगी थी.

    किस तरह के होते जंगल
    क्रिटेशियस काल में अंटार्कटिका एक शोतोष्ण जंगलों का इलाका था जहां शुंकधारी पेड़, फर्न और फूलों वाले पौधों की बहुतायत हुआ करती है. इतना ही नहीं इस इलाके में कुछ डायनासोर भी विचरण किया करते थे. लेकिन कई बार यहां के जंगलों में आग लगी थी जिससे यहां राख के अवशेष वैज्ञानिकों मिले हैं.

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    यह सब उसी दौर की बात है जब दुनिया में हर जगह डायनासोर (Dinosaurs) का राज था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    पहले भी बताया जा गया था
    अंटार्कटिका में जंगलों और उनमें आग लगने की धारणा नई नहीं हैं. छह साल पहले भी इस थ्योरी को प्रस्तावित किया गया था. तब भी जीवाश्म में राख का अवशेष को ही इसका प्रमाण बताया गया था. राख के अवशेष छोटे हैं. और इस अध्ययन में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की तस्वीरों से इस धारणा की पुष्टि हो सकी है.

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    और भी मिले हैं इस तरह की आग के प्रमाण
    शोधकर्ताओं ने पाया कि जीवाश्म में जो राख के अवशेष  हैं वे जिम्नोसपर्मस पेड़ पौधों के हैं जो शंकुधारी पेड़ एराकॉरिएसे परिवार के हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तीव्र जंगल की आग के उस युग में बहुत आम और वृहद हुआ करती थी. शोधकर्ताओं का कहना है कि इनके प्रमाण उत्तरी गोलार्द्ध में भी मिले हैं जिसमें कुछ मामले दक्षिणी गोलार्द्ध के तसमानिय, न्यूजीलैंड और अर्जेंटीना में भी मिले हैं.

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    यह काल में ज्वालामुखियों (Volcanic Activity) के भी बहुत अधिक सक्रिय होने के प्रमाण मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    आग का कारण
    जब शोधकर्ताओं ने इस आग का कारण पता करने का प्रयास किया तो उन्होंने एक चौंकाने वाली बात पता चली है. उन्हें पता चला कि इन आग के पीछे अन्य कारणों के अलावा ज्वालामुखी गतिविधियां भी हो सकती है. उत्तर क्रिटेशियस काल में विशालमहाद्वी गोंडवाना टूट रहा था जिससे अंटार्कटिका और अलग होता गया. तब इस बर्फ मुक्त इलाके में आग लगने के बहुत से स्रोत उपलब्ध थे जिसमें उल्कापिंडों की आग, आसमान से गिरने वाली बिजली और ज्वालामुखी गतिविधि तक थे. इसके अलावा वनस्पति ज्वलनशील थी और ऑक्सीजन स्तर भी बहुत ऊंचे थे.

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    पोलर रिसर्च में प्रकाशित इस अध्ययन के शोधकर्ताओं का कहना है कि जीवाश्मों में मिली राख के अध्ययन से पता चला है कि उस दौर में अंटार्कटिका में टेक्टोनिक प्लेट्स की वजह से बहुत तेज ज्वालामुखी गतिविधियां हुआ करती थीं. अब शोधकर्ताओं का इस दौर के नई रिकॉर्ड का भी अध्ययन करने वाले हैं.

    Tags: Antarctica, Dinosaurs, Earth, Research, Science

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