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26 साल का वो 'डॉक्टर' जो अब घाटी में बन गया है हिज्बुल का आतंकी सरगना

संगठन का नेतृत्व सैफल्‍लाह मीर (बाएं) उर्फ गाजी हैदर (Ghazi Haider) ने संभाल लिया है

संगठन का नेतृत्व सैफल्‍लाह मीर (बाएं) उर्फ गाजी हैदर (Ghazi Haider) ने संभाल लिया है

कश्मीर (Kashmir) में हिज्बुल मुजाहिदीन (Hizbul Mujahideen) के कमांडर रियाज नायकू (Riyaz Naikoo) के मारे जाने के बाद अब संगठन का नेतृत्व सैफल्‍लाह मीर उर्फ गाजी हैदर (Ghazi Haider) ने संभाल लिया है. नए नेता को संगठन के साथी डॉक्टर सैफ के नाम से भी बुलाते हैं. जानिए, आतंक के नए चेहरे की कहानी.

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    पिछले ही हफ्ते काफी संघर्ष के बाद आखिरकार सुरक्षबलों को हिज्बुल मुजाहिदीन (Hizbul Mujahideen) के कमांडर रियाज नायकू (Riyaz Naikoo) का सफाया करने में सफलता मिल सकी. बुरहान वानी (Burhan Wani) के बाद नायकू ही घाटी के युवाओं के लिए पोस्टर बॉय बना हुआ था, जिसके आतंकी कारनामों की वजह से उस पर 12 लाख रुपये का इनाम भी था. अब नायकू के खात्मे के बाद गाजी को हिज्बुल की कमान मिली है. महज 26 साल की उम्र के इस आतंकी में ऐसा क्या है जो उसे एक आतंकी संगठन का नेता चुना गया?

    नायकू की तरह ही इसका भी ताल्लुक कश्मीर के पुलवामा जिले से है. यहां के मलंगपोरा गांव में पले-बढ़े गाजी का बचपन दूसरे बच्चों की ही तरह सामान्य रहा. पुलवामा से ही बायोमेडिकल में डिप्लोमा करने के बाद गाजी श्रीनगर आया और बड़ी संभावनाओं की तलाश में श्रीनगर के ही नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इलेक्‍ट्रानिक्‍स एंड इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी में तकनीकी सहायक की तरह काम करने लगा. इसी दौरान उसकी मुलाकात रियाज नायकू से हुई.

    6 मई को भारतीय सुरक्षाबलों से एनकाउंटर में आतंकी रियाज नायकू की मौत हो गई


    यहीं से गाजी कट्टरपंथ के रास्ते पर चल निकला. माना जाता है कि इसके कुछ वक्त बाद ही इसने काम छोड़ दिया और पूरी तरह से आतंक का रास्ता अपना लिया. नायकू की तरह ही ये भी सेपरेटिस्ट था और पाकिस्तान का कट्टर समर्थक भी. कुछ ही दिनों के भीतर गाजी ने दक्षिण कश्मीर के इलाकों जैसे पुलवामा, कुलगाम और शोपियां जिलों में अपने आतंक का झंडा लहरा दिया. वो युवाओं को पढ़ाई और काम छोड़कर कट्टरपंथ का रास्ता अपनाने की सलाह देता था.

    कश्मीर में हिज्बुल में नए रंगरूटों की भर्ती और उन्हें हथियारों की ट्रेनिंग जैसे कामों के लिए भी गाजी खासा सक्रिय रहा. कमाई (terror-financing module) के लिए ये लोग नशीले पदार्थों जैसे अफीम की खेती और उसकी तस्करी जैसे काम करते हैं. इन कामों में भी युवा गाजी ने आगे बढ़-चढ़कर काम किया. जल्दी ही हिज्बुल में पुराने साथियों से ज्यादा उसकी पूछ होने लगी. वैसे इसकी एक और वजह भी रही. बायोमेडिकल की पढ़ाई के दौरान उसने जान बचाने की बेसिक ट्रेनिंग भी ले रखी थी. ये ट्रेनिंग जख्मी आतंकियों के इलाज या बीमारी में खूब काम आई. यही वजह है कि गाजी को संगठन के लोग डॉक्‍टर सैफ भी कहते हैं.

    वैसे पुलवामा में CRPF के दस्ते पर हमला करने वाला आदिल अहमद डार (Adil Ahmad Dar) C श्रेणी का आतंकी था


    नायकू ने जोश और गुस्से से भरे इस रंगरूट को खास आतंकी मिशन के लिए प्रशिक्षित किया. जैसे ही ट्रेनिंग खत्म करके गाजी आम लोगों के बीच पहुंचा, जल्दी ही उसकी दहशत छा गई. यही वजह है कि उसे कश्‍मीर में 'ए' श्रेणी के आतंकी का दर्जा मिला हुआ है. बता दें कि आतंक फैलाने के तरीके के आधार पर आतंकियों को सैन्यबल कई श्रेणियों में रखते हैं. ये श्रेणियां A++, A+ और A है. इसमें वे आतंकी शामिल होते हैं, जिनकी हरकतों से आमोखास सब दहल जाएं. इसके अलावा B++ और B+ भी है, जिसमें थोड़े कम खूंखार दहशतगर्द शामिल होते हैं. इसके अलावा एक सी कैटेगरी भी है, जिसमें आमतौर पर हिज्बुल में नए भर्ती युवा आते हैं. वैसे पुलवामा में CRPF के दस्ते पर हमला करने वाला आदिल अहमद डार (Adil Ahmad Dar) C श्रेणी का आतंकी था, जिसका कोई बड़ा रिकॉर्ड नहीं था लेकिन तब भी उसके हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे.

    इसी 6 मई को सैन्यबलों के एनकाउंटर में नायकू की मौत के बाद संगठन ने एक शोकसभा आयोजित की. इसी दौरान गाजी हैदर को जम्मू-कश्मीर का नया ऑपरेशनल चीफ कमांडर बनाने का ऐलान हुआ. इसके साथ ही 26 साल का ये आतंकी भी एकदम से सेना के निशाने पर आ गया है.

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