Home /News /knowledge /

Homi Jehangir Bhabha Birthday: दशकों पहले भारत को परमाणु देश बना सकते थे भाभा

Homi Jehangir Bhabha Birthday: दशकों पहले भारत को परमाणु देश बना सकते थे भाभा

डॉ होमी जहांगीर भाभा (Homi Jehangir Bhabha) ने भारत की आजादी से पहले ही देश को परमाणु शक्ति से सम्पन्न बनाने का सपना देख लिया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

डॉ होमी जहांगीर भाभा (Homi Jehangir Bhabha) ने भारत की आजादी से पहले ही देश को परमाणु शक्ति से सम्पन्न बनाने का सपना देख लिया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

भारत (India) को आजादी के बाद से ही अपने पड़ोस से सामरिक चुनौती मिलती रही है. आजादी के फौरन बाद ही पाकिस्तान ने भारत के रार ठान ली. इसके बाद 1962 में चीन भारत को एक तरह से हमेशा के लिए अपना दुश्मन बना लिया. सुरक्षा कारणों से हमेशा ही भारत को अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने का दबाव बना रहा. इसलिए देश को हमेशा ही अपने परमाणु विकल्प पर विचार करते रहना पड़ा. आज देश परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program of India) के जनक ड़ॉ होमी जहांगीर भाभा (Homi Jehangir Bhaba) का जन्मदिन है. जिन्होंने देश में परमाणु ऊर्जा के उपयोग की नींव रखी.

अधिक पढ़ें ...

    द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही दुनिया में ताकत में का मतलब परमाणु बम की ताकत होना था. उस समय केवल अमेरिका और सोवियत संघ में ही ऐसी ताकत थी. लेकिन कई और भी देश थे जो 1960 के दशक में इस क्षमता को हासिल करने की क्षमता रखते थे. बहुत कम लोग जानते हैं कि इनमें भारत का भी नाम था और उस समय भारत को ना तो पूंजीवादी अमेरिका का सहयोगी था और ना ही साम्यवादी रूस का. लेकिन एक व्यक्ति ने अमेरिका जैसे देश तक को सकते में डाल रखा था. ये भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ होमी जहांगीर भाभा (Homi Jehangir Bhabha) जिन्होंने एक बार कहा था कि वे डेढ़ साल में परमाणु बम बना सकते हैं. देश 30 अक्टूबर को उनके जन्मदिन पर उन्हें याद कर रहा है.

    समृद्ध पारसी परिवार से थे होमी
    होमी जहांगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को समृद्ध पारसी परिवार में हुआ था. दिनशॉ मैनेकजी पेटिट और दोराबजी जैसे मशहूर व्यवसायी उनके रिश्तेदार थे. उनके पिता जहांगीर होर्मुसजी भाभा एक मशहूर वकील थे. होमी की शुरुआती शिक्षा मुंबई के कैथरेडल एंड जॉन कैनन स्कूल में हुई थी. ऑनर्स से सीनियर कैम्ब्रिज परीक्षा पास करने के बाद वे एल्फिस्टोन कॉलेज में पढ़े.

    पिता की मर्जी थी कुछ और
    दिलचस्प बात यह है कि उनका पिता और उनके चाचा दोराबजी चाहते थे कि होमी कैम्ब्रिज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करें और उनके ही कहने पर होमी को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के कैयस कॉलेज में जाने से पहले 1927 में रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में भाग लिया. वे चाहते थे कि होमी टाटा स्टील या टाटा स्टील मिल्स से मेटलर्जिस्ट के तौर पर जुड़ें.

    न्यूक्लियर फिजिक्स में रुचि
    होमी ने अपने पिता को लिखा कि वे इंजीनियरिंग नहीं करना चाहते हैं. पिता ने होमी की भावनाओं का ख्याल रखते हुए उन्हें गणित और भौतिकी पढ़ने की इजाजत और सहयोग दोनों दिया. पहले होमी ने मैथमैटिकिस ट्रिपोस कार्स आनर्स के साथ पूरा किया और साथ ही भौतिकी में भी शोध करते रहे. इसी दौरान होमी का झुकाव नाभकीय भौतिकी की ओर हुआ. और 1933 में उन्होंने न्यूक्लियर फिजिक्स में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की. इसके बाद कई मशहूर शोधकार्यों के साथ वे कैम्ब्रिज में कार्य करते रहे और भारत में छुट्टियां बिताते समय जब प्रथम विश्वयुद्ध के शुरु हुआ तो वे इंग्लैंड वापस नहीं गए.

    Homi Jehangir Bhabha, Homi Jehangir Bhabha Birthday, Indian nuclear program, father of Indian nuclear program, nuclear country, Nuclear Bomb

    भारत में परमाणु ऊर्जा से बिजली पैदा करने को संभव बनाने का काम डॉ भाभा ने ही किया था. तस्वीर: Wikimedia Commons)

    भारत में डॉ भाभा
    1941 में ड़ॉ भाभा को रॉयल सोसाइटी  सदस्य चुना गया. उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में रीडर का पदभार संभाला. उस समय उसके प्रमुख नोबेल विजेता सीवी रमन थे. 1945 में उन्होंने जेआरडी टाटा की मदद से  मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेटल रिसर्च की स्थापना की और अगले साल इसके निदेशक बने. आजादी के बाद भाभा के प्रयासों से ही भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना हो सकी. डॉ भाभा ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया.

    क्या है पराली, इसी मौसम में क्यों जलाई जाती है

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाभा
    भारत आने के बाद से ही भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने का सपना देखा था और इसके लिए कांग्रेस नेताओं को भी प्रेरित करते रहे. यही वजह थी 1948 में प्रधानमंत्री नेहरू ने डॉभाभा को न्यूक्लियर प्रोग्राम का प्रमुख बनाया.  1950 में डॉ भाभा ने इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया. 1955 में उन्होंने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की आणविक ऊर्जा के शांतिपूर्वक उपयोग पर हुए सम्मेलन की अध्ययक्षता की.

    Homi Jehangir Bhabha, Homi Jehangir Bhabha Birthday, Indian nuclear program, father of Indian nuclear program, nuclear country, Nuclear Bomb

    डॉ होमी जहांगीर भाभा (Homi Jehangir Bhabha) को पांच बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    परमाणु ऊर्जा का सदुपयोग
    डॉ भाभा को भारत के परमाणु शक्ति कार्यक्रम का पिता यूं ही नहीं कहा जाता. भाभा ही थे जिन्होंने बहुत कम मात्रा में उपलब्ध यूरेनियम की जगह थोरियम को परमाणु शक्ति कार्यक्रम में शामिल करने की पैरवी की. उनके ही प्रयासों मे से ट्रॉम्बे में एटॉमिक एनर्जी एस्टेबलिश्मेंट की स्थापना हुई. इसी साल भारत सरकार में आणविक ऊर्जा विभाग की स्थापना की गई.

    क्या होता है ला नीना इफेक्ट, जिससे भारत में पड़ेगी घनघोर ठंड

    होमी भाभा को पाँच बार भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया था. वहीं साल 1954 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया था. डॉ भाभा का मकसद भारत को परमाणु बम से सम्पन्न करना नहीं था. उन्होंने तो कहा था अगर इजाजत मिले तो वे डेढ़ साल में परमाणु बम बना सकते हैं. लेकिन उनका प्रमुख ध्यान भारत को परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भर  होना था. 24 जनवरी 1966 में एक वायुयान दुर्घटना में डॉ होमी जहांगीर भाभा का निधन हो गया.

    Tags: India, Nuclear Energy, Research, Science

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर