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होमी जहांगीर भाभा की मौत का रहस्य, क्या इसके पीछे अमेरिकी साजिश थी

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Updated: October 30, 2019, 9:58 AM IST
होमी जहांगीर भाभा की मौत का रहस्य, क्या इसके पीछे अमेरिकी साजिश थी
होमी जहांगीर भाभा की मौत एक प्लेन हादसे में हुई थी

होमी जहांगीर भाभा (Homi Jehangir Bhabha) को भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम (Nuclear Programme) का जनक माना जाता है. 1966 में अगर उनकी मौत एक प्लेन क्रैश (plane crash) में नहीं हुई होती तो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में भारत महारत हासिल कर चुका होता.

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अगर होमी जहांगीर भाभा (Homi Jehangir Bhabha) की मौत एक विमान हादसे (plane crash) में न हुई होती तो शायद भारत न्यूक्लियर साइंस (Nuclear Science) के क्षेत्र में कहीं बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुका होता. सिर्फ 56 साल की उम्र में भारत में न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम (Nuclear Energy Programme) के जनक होमी जहांगीर भाभा की मौत हो गई.

कहा जाता है कि होमी जहांगीर भाभा की मौत के पीछे साजिश थी. भारत के न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम को रोकने के लिए भाभा की मौत की साजिश रची गई थी. होमी जहांगीर भाभा जिंदा होते तो भारत न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में महारत हासिल कर चुका होता.

भारत में न्यूक्लियर एनर्जी के जनक थे होमी जहांगीर भाभा

होमी जहांगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुंबई के एक अमीर पारसी परिवार में हुआ था. 18 साल की उम्र में भाभा ने कैंब्रिज यूनवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की. बाद में उनकी रुचि फिजिक्स की तरफ बढ़ी. अपने पिता की मर्जी पर 1930 में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई तो कर ली लेकिन आगे फीजिक्स की पढ़ाई जारी रखी. 1934 में उन्होंने क़ॉस्मिक रे को लेकर अपना पहला रिसर्च पेपर सामने रखा. न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में उन्होंने अपनी पढ़ाई और रिसर्च जारी रखी.

1939 में वो छुट्टियां मनाने भारत आए थे. लेकिन लौटकर वापस नहीं जा सके क्योंकि तब तक द्वितीय विश्वयुद्ध छिड़ चुका था. 1940 में नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ सी वी रमन ने उन्हें बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस जॉइन करने को कहा. वो फीजिक्स के रीडर के तौर पर कॉलेज में पढ़ाने लगे.

1945 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की स्थापना हुई. होमी जहांगीर भाभा को वहां का डायरेक्टर बनाया गया. 1948 में वो ट्रॉम्बे एटोमिक एनर्जी एस्टैबलिशमेंट के डायरेक्टर बनाए गए. बाद में इंदिरा गांधी ने उनकी याद में संस्थान का नाम बदलकर भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर कर दिया.

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होमी जहांगीर भाभा

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कैसे हुई होमी जहांगीर भाभा की मौत?

होमी जहांगीर भाभा की मौत एक विमान हादसे में हुई. लेकिन कहा जाता है कि वो विमान हादसा जानबूझकर करवाया गया था. अमेरिका नहीं चाहता था कि भारत का न्यूक्लियर प्रोग्राम आगे बढ़े. इसलिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने होमी जहांगीर भाभा जिस प्लेन से जा रहे थे, उसका क्रैश करवा दिया. हालांकि इसे कभी साबित नहीं किया जा सका.

24 जनवरी 1966 को होमी जहांगीर भाभा एयर इंडिया के फ्लाइट नंबर 101 से सफर कर रहे थे. मुंबई से न्‍यूयॉर्क जा रहा एयर इंडिया का बोइंग 707 विमान माउंट ब्‍लैंक पहाड़ियों के पास हादसे का शिकार हो गया. इस हादसे में होमी जहांगीर भाभा समेत विमान में सवार सभी 117 यात्रियों की मौत हो गई थी.

उस समय से इस हादसे को लेकर कई बातें हुई. कई लोगों का मानना है कि इस विमान को साजिश के जरिए दुर्घटना का शिकार बनाया गया. कुछ लोगों का मानना है कि विमान में बम धमाका हुआ था जबकि कुछ का कहना है कि इसे मिसाइल या लड़ाकू विमान के जरिए गिराया गया था. इसके पीछे तर्क है कि सीआईए ने भारतीय परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए भाभा की हत्या की साजिश रची थी. लेकिन इसे कभी साबित नहीं किया जा सका.

कैसे हुआ भाभा का प्लेन हादसे का शिकार?

आधिकारिक तौर पर जो जानकारी निकलकर सामने आई उसके मुताबिक जेनेवा एयरपोर्ट और फ्लाइट के पायलट के बीच गलतफहमी हुई थी. माउंट ब्लैंक की पहाड़ियों के बीच फ्लाइट के लोकेशन को लेकर कंफ्यूजन हुई थी. जिसकी वजह से विमान हादसे का शिकार हुआ. इसके बाद विमान का कुछ पता नहीं चला.

2017 में उस विमान हादसे के कुछ सबूत हाथ लगे थे. फ्रांस में आल्प्स पहाड़ियों के बीच स्थित माउंट ब्‍लैंक पर एक खोजकर्ता को मानव अवशेष मिले थे. उस वक्त बताया गया कि ये अवशेष उन लोगों के हो सकते हैं, जो 1966 के एयर इंडिया फ्लाइट क्रैश में मारे गए थे. मानव अवशेष की खोज करने वाले डेनियल रोशे ने कहा था कि मैंने इससे पहले इन पहाड़ियों पर कभी भी मानव अवशेष जैसे साक्ष्‍य नहीं पाए. इस बार मुझे एक हाथ और एक पैर का ऊपरी हिस्‍सा मिला है.

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भाभा का प्लेन हादसे का शिकार हुआ था


हालांकि बाद में पता चला कि जो अवशेष मिले हैं वो किसी महिला के हैं. हो सकता है वो महिला की जान उसी विमान हादसे में गई हो. ये दावा इसलिए मजबूत था क्योंकि मानव अवशेष के साथ वहां एक विमान का जेट इंजन भी मिला था.

सीआईए के अफसर ने मानी थी भाभा की मौत में साजिश की बात

होमी जहांगीर भाभा की रहस्यमय मौत की एक और थ्योरी 2008 में आई. 2008 में एक वेबसाइट ने एक पत्रकार ग्रेगरी डगलस और सीईआए अफसर रॉबर्ट क्राओली के बीच हुई एक बातचीत छापी. इस बातचीत में क्राओली कह रहे थे कि भारत ने 60 के दशक में परमाणु बम पर काम शुरू कर दिया था. जो हमारे लिए समस्या थी. रॉबर्ट के मुताबिक भारत ये सब रुस की मदद से कर रहा था.

इस बातचीत में रॉबर्ट क्राओली ने भाभा को खतरनाक बताया था. क्राओली के मुताबिक भाभा जिस वजह से वियना जा रहे थे, उसके बाद उनकी परेशानी और बढ़ती. कहा जाता है कि इसी वजह से विमान के कार्गो में बम विस्फोट के जरिए उसे उड़ा दिया गया.

भाभा ने किया था 18 महीनों में परमाणु बम बनाने का ऐलान

कहा जाता है कि अक्टूबर 1965 में भाभा ने ऑल इंडिया रेडियो से घोषणा की थी कि अगर उन्हें छूट मिले तो भारत 18 महीनों परमाणु बम बनाकर दिखा सकता है. भाभा चाहते थे कि उर्जा, कृषि और मेडिसीन के क्षेत्र में देश की प्रगति के लिए न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम बने.

भाभा ये भी चाहते थे कि देश की सुरक्षा के लिए परमाणु बम बने. कहा जाता है कि भारत की तरक्की को देखते हुए अमेरिका डर गया था. अमेरिका को लग रहा था कि अगर भारत ने परमाणु बम बना लिया तो ये पूरे दक्षिण एशिया के लिए खतरनाक होगा. इसलिए सीआईए ने भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने के लिए भाभा की हत्या की साजिश रची.

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First published: October 30, 2019, 9:58 AM IST
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