जरा संभलकर, जानें पाकिस्तान कैसे बिछा रहा है हनीट्रैप का जाल

हिंदू माइथोलॉजी के तहत आने वाले कल्की पुराण में विषकन्या का जिक्र इस तरह है- वो इतनी जहरीली होती हैं कि चुंबन लेनेभर से जान जा सकती है. मॉर्डन जमाने की विषकन्याओं को हनी ट्रैप भी कह सकते हैं. ये खासकर सेना के अधिकारियों से खुफिया जानकारियां उगलवाने का काम करती हैं.

News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 10:57 PM IST
News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 10:57 PM IST
बीते महीने इंडियन आर्मी ने एक एडवाइडरी जारी की. इसमें सेना ने अपने जवानों को सोशल मीडिया पर संभलकर रहने को कहा. WhatsApp के मामले में खास ताकीद देते हुए कहा गया कि वे किसी भी ऐसे ग्रुप से न जुड़ें, जिसके हरेक सदस्य को वो पर्सनली न जानते हों.

उनका कहना है कि ज्यादा आकर्षक नजर आने वाली चीजें 'हनीट्रैप' हो सकती हैं. जानिए क्या है हनीट्रैप और किस तरह काम करता है.

खुफिया जानकारियां जुटाने की कोशिश
कैंब्रिज डिक्शनरी में हनीट्रैप का मतलब बताया गया है- the use of an attractive person to try to get information from someone...यानी कोई सीक्रेट जानकारी निकलवाने के लिए किसी आकर्षक शख्स का इस्तेमाल. ये आकर्षक शख्स सिर्फ एक जरिया होता है जो किसी और के लिए काम कर रहा होता है. आमतौर पर युवतियां (या सोशल मीडिया के कॉन्टैक्स्ट में युवती की फेक प्रोफाइल) हनीट्रैप हो सकती हैं. यानी कोई बेहद खूबसूरत या आकर्षक युवती अपने अंदाज से दूसरे देश की सेना के अधिकारियों से जान-पहचान बढ़ाकर उनसे अपने देश (या जिनके लिए वो काम कर रही है) के लिए जरूरी जानकारी जुटाती है.

हनीट्रैप के जरिए भारतीय सीमाओं की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश होती रहती है (तस्वीर- प्रतीकात्मक)
हनीट्रैप के जरिए भारतीय सीमाओं की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश होती रहती है (तस्वीर- प्रतीकात्मक)


फीमेल स्पाई भी हनीट्रैप की तरह काम कर सकती है लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. माना जाता है कि हर देश की खुफिया एजेंसी के पास ट्रेंड लोग होते हैं जो वक्त-जरूरतन हनीट्रैप का काम करते हैं. वैसे वास्तव में इस टर्म का ईजाद शहद से मक्खियों के कनेक्शन को देखते हुए हुआ. मक्खी शहद खाने के लिए उसपर बैठती है लेकिन चिपक जाती है. फिर न वो उड़ पाती है और न ही ही शहद खा पाती है.

हमारे यहां आ रहे मामले
Loading...

पाकिस्तान लगातार फेक आईडी के जरिये भारतीय सुरक्षा तंत्र में घुसने की कोशिश कर रहा है. वहां की खुफिया एजेंसी अक्सर भारतीय सेना को हनीट्रैप करने की कोशिश करती है. आमतौर पर जानकारियों का इस्तेमाल आतंकी हमले के लिए किया जाता है. वर्चुअल वर्ल्ड में हनीट्रैप के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जा रहा है. खासकर इस तरह के कई मामले होने के बाद भारतीय सेना इसे लेकर खास सतर्क है.

ये भी पढ़ें-  जानें किस तरह चीन अब उइगर मुसलमानों से अलग कर रहा है उनके बच्चे

इसी साल की शुरुआत में एक भारतीय सैनिक पाकिस्तानी जासूस को महत्वपूर्ण जानकारियां देते पकड़ा गया. सोमबीर सिंह नाम का सिपाही जैसलमेर में बॉर्डर पर तैनात था. वो एक फेक फेसबुक अकाउंट के झांसे में आ गया. अकाउंट होल्डर ने खुद को भारतीय सेना में मेडिकल ऑफिसर बताया था. सालभर के वर्चुअल रिश्ते के दौरान सोमबीर ने सेना की कई जरूरी जानकारियां अपने उस फेक प्रेमी को दे दीं. पाकिस्तानी जासूस के उस अकाउंट का फेक नाम है अनिका चोपड़ा, जो अलग-अलग तस्वीरों के साथ अब भी एक्टिव बताया जा रहा है. सेना के जवान को ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट तोड़ने के जुर्म में 3 साल की कैद मिली. इसी तरह फरवरी, 2018 में भी वायुसेना के कैप्टन अरुण मारवाह को पाकिस्तानी एजेंट्स को गोपनीय सूचनाएं और दस्तावेज लीक करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था. उनपर ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत FIR हुई.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इंडियन एयरफोर्स ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह के खिलाफ चार्जशीट फाइल की
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इंडियन एयरफोर्स ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह के खिलाफ चार्जशीट फाइल की


पैसों का भी लालच
वैसे तो हनीट्रैप के तहत ज्यादातर प्रेम संबंध बनाकर जानकारियां ली जाती हैं लेकिन कई बार इसमें पैसों का लेनदेन भी शामिल होता है. जानकारियों के बदले आईएसआई की तरफ से पैसे दिए जाते हैं. कुछ वक्त पहले यूपी एटीएस के इनपुट पर मिलिट्री इंटेलीजेंस ने बबीना और वर्धा से दो सैनिकों को गिरफ्तार किया था. ये दोनों सैनिक हनीट्रैप में फंसकर आईएसआई को सेना की गोपनीय सूचनाएं दे रहे थे. दोनों को भुज के कुछ लोगों से पैसे भी मिल रहे थे.

ये भी पढ़ें-  क्या भारत के खिलाफ फिर बड़ी लड़ाई की तैयारी में जुटा हुआ है पाकिस्तान?

ऐसे काम करता है जाल
सोशल मीडिया हनी ट्रैप का बड़ा जरिया है. जरूरी नहीं कि जिस प्रोफाइल पर लड़की की तस्वीर और नाम हो, वो कोई लड़की ही हो. कोई पुरुष एजेंट भी उसे हैंडल कर सकता है. प्रोफाइल में कई ऐसी जानकारियां डाली जाती हैं, जिससे वो झूठ न लगे. सेना के लोगों पर पूरा होमवर्क करके फिर प्रोफाइल को उसी तरह से तैयार करते हैं. धीरे-धीरे संपर्क शुरू किया जाता है. जानकारी हासिल करने के क्रम में करीब आने के लिए नंबरों का लेनदेन होता है. whatsapp से चैटिंग होती है. निजी तस्वीरों और बातों का आदान-प्रदान भी होता है. इसी दौरान जब सेना के अधिकारी को यकीन हो जाता है, तब बात ही बात में उससे जानकारी लेने की कोशिश शुरू की जाती है.

हनीट्रैप के बढ़ते खतरे के मद्देनजर सोशल मीडिया को लेकर सेना ने कई नीतियां बनाई हैं (तस्वीर- प्रतीकात्मक)
हनीट्रैप के बढ़ते खतरे के मद्देनजर सोशल मीडिया को लेकर सेना ने कई नीतियां बनाई हैं (तस्वीर- प्रतीकात्मक)


इंस्टाग्राम और फेसबुक के खतरे
साल की शुरुआत में इंस्टाग्राम पर 'Oyesomya' और फेसबुक पर ‘Gujjar Soumya’ प्रोफाइल के बारे में सेना में अलग से सचेत किया गया था. संदेह है कि इन प्रोफाइलों के जरिए सेना के अधिकारियों पर नजर रखी जा रही है. कई आर्मी पदाधिकारी सोशल मीडिया पर इनके दोस्त हो चुके हैं. सेना की एडवाइजरी में बताया गया कि ये अकाउंट होल्डर पूर्व कैप्टन पवन कुमार की बहन होने का दावा करती है. वह बताती है कि अभी वो आईआईटी बॉम्बे में एक रिसर्च स्‍कॉलर है. एडवाइजरी में कहा गया कि ये प्रोफाइल दुश्मन देश की एजेंसी ने बना रखी है ताकि सेना के लोगों को फांसकर उनसे खुफिया जानकारियां निकाल सके. प्रोफाइल होल्डर ने सेना के अधिकारियों से दोस्ती कर उनसे बेहद खास जानकारियों की मांग की थी.



सेना ने बनाई गाइडलाइन
हनी ट्रैप के बढ़ते खतरे के मद्देनजर सोशल मीडिया को लेकर सेना ने कई नीतियां बनाई हैं. इसी कड़ी में सेना की ओर से जवानों और अधिकारियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई. हनी ट्रैप को वर्चुअल लड़ाई की तरह देखा जा रहा है. दुश्मन सेनाओं को खुद पर हावी न होने देने के लिए आर्मी 'सोशल मीडिया वरियर' बना रही है. इसके तहत इस तरह के मामलों पर नजर रखी जाएगी और समय-समय पर सेना को खतरों से आगाह किया जाएगा.

क्या करें और क्या न करें
जवानों और अफसरों को निर्देश दिया गया है कि वे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और किसी भी सोशल प्लेटफॉर्म पर यूनिफॉर्म, मिलिट्री उपकरणों, ऐसे बैकग्राउंड जिनसे उनके सेना में होने का पता चलता हो, ऐसी चीजें पोस्ट न करें. ये सेना के लिए एक लंबी सूची का हिस्सा है, जो खासतौर पर हनी ट्रैप से बचने के लिए बनाई गई हैं. इनके अलावा अपनी लोकेशन न बताना, अपनी प्रैक्टिस की तस्वीरें या जानकारी न देना, अजनबियों की फ्रेंड रिकवेस्ट न लेना, अपने पर्सनल कंप्यूटर, टैब या फोन पर सेना की कोई भी जानकारी न रखना जैसी बातें शामिल हैं. हनी ट्रैप से बचने के लिए एक हैंडबुक भी बनाई जा रही है, जिसमें सारी जानकारियां होंगी.

विषकन्याएं तैयार की एक खास प्रक्रिया होती थी (तस्वीर- प्रतीकात्मक)
विषकन्याएं तैयार की एक खास प्रक्रिया होती थी (तस्वीर- प्रतीकात्मक)


राजाओं के जमाने में भी हनीट्रैप
हनीट्रैप का उल्लेख हो रहा है तो ये भी बता दें कि हमारे देश में प्राचीन समय में भी इसका जिक्र मिलता है. तब इस टर्म का नाम था 'विषकन्या'. राजे-महाराजाओं के पास विषकन्याएं हुआ करती थीं जो उनके सबसे खतरनाक दुश्मन को मारने या कोई भेद निकालने के काम आती थीं. इन्हें तैयार करने की एक खास प्रक्रिया होती थी. सबसे पहले राज्य की खूबसूरत बच्चियों को छांटा जाता था. ये वे बच्चियां होती थीं जो अक्सर राजाओं की अवैध संतानें होती थीं, जैसे दासियों से साथ उनके मेल से आई संतानें. या फिर अनाथ या गरीब बच्चियां.

इन्हें राजमहल में ही रखकर खानपान का ध्यान रखा जाता. कुछ दिनों बाद इन्हें जहरीला बनाने की प्रक्रिया शुरू होती. कमउम्र से ही कम मात्रा में अलग-अलग तरह का जहर दिया जाता. ये जहर खाने में मिला होता था. धीरे-धीरे जहर की मात्रा बढ़ाई जाती थी. इस प्रक्रिया में ज्यादातर बच्चियां मर जाया करतीं. कुछ विकलांग हो जातीं. ऐसी बच्चियों को फिर विषकन्या बनाने की कवायद छोड़ दी जाती थी. जो बच्चियां जिंदा बच जातीं, उन्हें और घातक बनाया जाता था. यही बच्चियां आगे चलकर राजा के लिए जानकारियां निकलवाने या दुश्मन राजा को मारने का काम किया करतीं.

ये भी पढ़ें-  खूबसूरत गर्लफ्रेंड्स वाला अरबपति 'ड्रग लॉर्ड' जिससे डरते थे अमेरिका समेत कई देश
First published: July 22, 2019, 9:14 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...