चीन के झुकने के बाद भी क्यों जारी है हांगकांग में नाराज़गी? जानें क्या है 2047 फियर?

हांगकांग के लाखों नागरिकों के सड़कों पर उतर आने के बाद विवादास्पद प्रत्यर्पण कानून को वापस लेने पर चीनी प्रशासन को मजबूर होना पड़ा लेकिन सवाल ये है कि इतने ज़बरदस्त विरोध के लिए लाखों लोग सड़कों पर आखिर आ कैसे गए?

News18Hindi
Updated: June 17, 2019, 4:28 PM IST
चीन के झुकने के बाद भी क्यों जारी है हांगकांग में नाराज़गी? जानें क्या है 2047 फियर?
हांगकांग में भारी विरोध प्रदर्शन.
News18Hindi
Updated: June 17, 2019, 4:28 PM IST
हांगकांग में जनता के ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शनों के बाद चीन को प्रत्यर्पण के अधिकार के नाम पर कथित रूप से मनमानी करने का लाइसेंस देने वाला कानून वापस ले लिया गया है. चीन समर्थक मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैरी लैम ने इस बाबत घोषणा कर दी और हांगकांग की जनता से माफी भी मांगी. लेकिन, अब लैम के इस्तीफे की मांग ने ज़ोर पकड़ लिया है. हालांकि चीन की सरकार इस कानून को लागू करने को लेकर सख्त थी क्योंकि इसके लागू होते होने पर कथित तौर पर चीन हांगकांग के किसी भी नागरिक को अपने यहां ले जा सकता था और उन पर केस चलाकर सज़ा दे सकता था.

पढें : हांगकांग में फिर क्यों फूट रहा है चीन के खिलाफ गुस्सा?



इस प्रत्यर्पण कानून के विरोध में हांगकांग की जनता ने बीते 9 जून को भारी विरोध दर्ज करवाया था, जिसमें कहा गया कि दस लाख से ज़्यादा लोग सड़कों पर उतर आए थे. इस तरह के भारी जनसैलाब वाले प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहने के बाद अब शहर की शीर्ष नेता कैरी लैम ने मामले को सही ढंग से न संभाल पाने पर माफी मांगी. कभी ब्रिटिश शासन के अधीन रहे हांगकांग में चीन के खिलाफ पहले भी प्रदर्शन होते रहे हैं. (हांगकांग और चीन के बीच तनाव भरे रिश्ते से जुड़ी विस्तृत कहानी यहां पढ़ें.)

ज़रूरी जानकारियों, सूचनाओं और दिलचस्प सवालों के जवाब देती और खबरों के लिए क्लिक करें नॉलेज@न्यूज़18 हिंदी

हांगकांग की कुल आबादी 74 लाख से कुछ ज़्यादा है. साल 1997 में हांगकांग को चीन के सुपुर्द कर दिया गया था. इसके बाद से बीते रविवार को हुआ ये प्रदर्शन सबसे बड़ा रहा. आयोजकों की मानें तो 10 लाख से ज़्यादा लोग सड़कों पर उतरे. हांगकांग में जिस कानून के विरोध के लिए घंटों तक ये प्रदर्शन हुआ, उस कानून को मानव अधिकारों और लोकतंत्र के लिए खतरा माना जा रहा है क्योंकि ताइवान समेत यूएन, अमेरिका और कई नामचीन संस्थाएं इस कानून के बारे में चीन को पहले ही चेता चुकी थीं.

आखिरकार चीन को ये कानून वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा. लेकिन इस पूरी कवायद में सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर कौन सी वजह रही, जिसने हांगकांग को इस कदर उकसा दिया कि लाखों लोग सड़कों पर उतरे? आइए कारणों को समझें.



हांगकांग में है भविष्य को लेकर डर
2014 में भी हांगकांग के लोग चीन के खिलाफ बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे थे, लेकिन उस वक्त विरोध प्रदर्शन कामयाब नहीं हुए थे और चीन ने अपनी मनमानी कर ली थी. लेकिन, इस बार विरोध प्रदर्शनों में क्या खास रहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और लगातार दबाव बनाने में कामयाब हुए. इसका एक बड़ा कारण है हांगकांग के भविष्य को लेकर धुंधली तस्वीर से पनपने वाला डर.

अस्ल में, हांगकांग पहले ब्रिटिश के अधीन रहा और ब्रिटिश और चीनी सरकार के बीच हुए हैंडओवर समझौते के बाद हांगकांग को आज़ादी और विशेष अधिकार मिले. लेकिन ये विशेष अधिकारों का दर्जा हांगकांग के पास 2047 तक ही रहेगा, उसके बाद नहीं. इससे भी ज़्यादा मुश्किल ये है कि उसके बाद स्थिति होगी क्या? इसे लेकर कोई स्पष्ट सहमति नहीं है और न ही कोई जानता है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये एक बड़ा कारण है कि हांगकांग के युवाओं में भविष्य के आशंकित खतरों को लेकर एक डर पनप रहा है. खतरा चीनी सरकार से ही नज़र आ रहा है इसलिए हांगकांग के युवा इसके विरोध में खड़े हो रहे हैं.

वोटरों की बढ़ी आबादी
हांगकांग इतनी मज़बूती के साथ विरोध दर्ज करा पा रहा है, इसका एक प्रमुख कारण ये भी है कि पिछले दो दशकों में यहां के युवाओं में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी है. 18 से 35 साल की उम्र वाले वोटरों की संख्या साल 2000 में जहां 58 फीसदी थी, वहीं 2016 में ये संख्या बढ़कर 70 फीसदी हो चुकी है. इसके साथ ही, चीन के साथ रिश्तों को लेकर युवाओं में जागरूकता और समझ बढ़ने को भी एक कारण माना जा रहा है.

आज़ादी छीनने के चीन के दांव
'हम जिस आज़ादी के माहौल में पले बढ़े हैं, उसे छीनने वाली चीनी नीतियों और कदमों को हम देख पा रहे हैं और ऐसे पल हमें सिखाते हैं कि हम हांगकांग के अपने कानून और आज़ादी को किसी भी कीमत पर बचा पाने के लिए मज़बूत रहें.' यह बात बीबीसी ने एक प्रदर्शनकारी के हवाले से लिखी है.

hong kong news, china news, china law, china hong kong relations, historic people movement, हांगकांग समाचार, चीन समाचार, चीनी कानून, चीन हांगकांग रिश्ते, ऐतिहासिक प्रदर्शन
चीन के खिलाफ हांगकांग में प्रदर्शन करते लोग. फाइल फोटो.


इस रिपोर्ट के मुताबिक चीनी नीतियों के प्रति पनप रहा आक्रोश अब हांगकांग के युवाओं में साफ दिखने लगा है. हाल में, चीन का एक कानून था कि चीनी राष्ट्रीय गान के प्रति असम्मान ज़ाहिर करने वालों को सख्त सज़ा दी जाएगी. इसके साथ ही, ऐसे कानून भी बनाए गए थे जिनके तहत आज़ादी के लिए प्रदर्शन करने वालों, लोकतंत्र बचाने के लिए प्रदर्शन करने वालों को जेल में ठूंसा जा सकता था. इस तरह के तमाम कदमों के बाद हांगकांग जागरूक हो रहा है और विरोध में खड़ा हो रहा है.

बैकफुट पर आ रहा है चीन?
हांगकांग के भारी विरोध के बाद प्रत्यर्पण कानून वापस लिए जाने को चीन के बैकफुट पर आने के तौर पर देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि नीति निर्माताओं को इतने भारी असंतोष का अंदाज़ा नहीं था. इसी बीच, एक और अहम खबर ये है कि 2014 में लोकतंत्र बचाने के लिए हुए प्रदर्शन 'अंब्रेला मूवमेंट' के छात्र नेता जोशुआ वॉंग को जेल से रिहा कर दिया गया है. ('अंब्रेला मूवमेंट' से जुड़ी खबर के लिए यहां क्लिक करें.)

वॉंग को रिहा करने का कदम भी एक स्तर पर यही संकेत दे रहा है कि चीन बैकफुट पर जा रहा है और हांगकांग की नाराज़गी मोल लेने के मूड में फिलहाल नहीं दिख रहा है.

hong kong news, china news, china law, china hong kong relations, historic people movement, हांगकांग समाचार, चीन समाचार, चीनी कानून, चीन हांगकांग रिश्ते, ऐतिहासिक प्रदर्शन
हांगकांग में उठ रही है नेता कैरी लैम के इस्तीफे की मांग.


अब भी जारी रहेगा प्रदर्शन?
प्रत्यर्पण कानून के खिलाफ हांगकांग के भारी विरोध प्रदर्शन का सिलसिला क्या कानून वापस लिए जाने के बाद रुक जाएगा? इस सवाल के जवाब में प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लैम जब तक इस्तीफा नहीं देंगी, तब तक और भी प्रदर्शन किए जा सकते हैं. गौरतलब है कि हांगकांग के प्रदर्शन को दबाने के लिए चीनी प्रशासन ने हिंसक तरीकों का सहारा लिया. आंसू गैस के साथ ही लाठियां तक भांजी गई थीं और कई प्रदर्शनकारियों को जेल में ठूंस दिया गया था.

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक प्रदर्शनकारी विरोध बंद करने के मूड में नहीं हैं. अपनी सुरक्षा की गारंटी और लैम के इस्तीफे की मांग को लेकर वो लगातार विरोध करने के लिए लामबंद रहने का ऐलान कर रहे हैं.

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

ये भी पढ़ें :
पाकिस्तान का 7वां सरेंडर: टीम इंडिया की जीत पर यह बोले देश-दुनिया के अखबार
भारत आया दुनिया का सबसे तेज़ AI सुपर कंप्यूटर, मिनटों में करेगा घंटों का काम
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...