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    भेड़ जैसे अजीब से जानवर से भारत में विकसित हुए थे घोड़े

    घोडों (Hourses) को विकास उस जानवर से हुआ था जो 5.5 अरब साल पहले भारत(India) में पाया जाता था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
    घोडों (Hourses) को विकास उस जानवर से हुआ था जो 5.5 अरब साल पहले भारत(India) में पाया जाता था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    5.5 करोड़ साल पहले एक अजीब से भेड़ (Sheep) जैसे दिखने वाले जानवर से भारत में घोड़े (Hourse) और गैंडे (Rhinos) जैसे खुर वाले जानवरों (hoofed Animals) का विकास हुआ था.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 8, 2020, 1:12 PM IST
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    पृथ्वी (Earth) के जीवों (Organism) की उद्भाव (Evolution) की कहानी बहुत ही जटिल और गहरी है. इसे पूरी तरह से समझने के लिए वैज्ञानिकों को पुराने समय के जीवों के जीवाश्मों (Fossil) के अध्ययन पर काफी निर्भर रहना पड़ता है. इसके बाद भी उन्हें जीवों के बारे में बिखरी जानकारी मिल पाती है. भारत में हुए 15 साल के अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि घोड़े (Horses) और गैंडे (Rhinos) जैसे खुर(Hoof) वाले जानवरों को उद्भव (evolution) एक अजीब से भेड़ के आकार (Sheep shaped) के जानवर से हुआ था जो सुअर (Pig) और कुत्ते (dog) की संकर प्रजाति (Cross breed) का था.

    कहां पता लगा इस जानवर के बारे में
    शोधकर्ताओं का कहना है कि यह जानवर 5.5 करोड़ साल पहले भारत में घूमा करता था. जॉन हॉकिंस यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने गुजरात की खदानों में इस अजीब जानवर के अवशेष खोजे हैं. इस जीव का नाम कैम्बेथीरियम है.  कैम्बेथीरियम विलुप्त हो चुकी है यह प्रजाति पेरिसोडाक्टिलस की संबंधी है जो स्तनपायी जीवों का वह समूह है जिसमें घोड़े, गैंडे जैसे जीव शामिल हैं.  कैम्बेथीरियम भारतीय उपमहाद्वीप में रहा करते थे.

    2001 से शुरु हुई खोज
    इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता केन रोज ने बताया कि 2001 में राजस्थान में उनकी पहली यात्रा सफल नहीं हई थी. उन्होंने कहा, “हालांकि उन्हें इस यात्रा में केवल कुछ मछलियों की हड्डियां ही मिली थी, इसके अगले साल हमारे भारतीय साथी राजेंद्र राणा के साथ हमने गुजरात के वास्तन लिग्नाइट खदान में खोज जारी रखी.”



    2004 में मिला वह जानवर
    इस नई खदान में हमें काफी कुछ मिला. साल 2004 में हमारी टीम ने वापस इस खदान में गई जहां हमारे बेल्जियन साथी थिएरी स्मिथ को पहले स्तनपायी जीव का जीवाश्म मिले जिसमें कैम्बेथीरियम के जीवाश्म भी शामिल थे. यही वह जीव है जो आज के किसी भी जानवर से पूरी तरह से मेल नहीं खाता है.

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    जिस जानवर का जीवश्म(Fossil) मिला है वह भेड़ (sheep) से काफी मिलता जुलता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    दूसरी बार फिर जमा किए जीवाश्म
    रोज का यह शोध जर्नल ऑफ वर्टिबरेट पेलेएंटोलॉजी में प्रकाशित हुआ है. इन नतीजों से उत्साहीत टीम चुनौतियों के बाद भी एक बार फिर गुजरात की खदानों में गई और कैम्बेथीरियम और बहुत से रीढ़ वाले जीवों के जीवाश्म की हड्डियों को जमा किया.

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    भारत के आसपास विकसित हुए थे ये
    कैम्बेथीरियम अब तक ज्ञात पेरिसोडाक्टिलस के पुरातन काल के विकास के सबसे पुराने समय को प्रदर्शित करते हैं. यह समूह भारत और उसके आसापास विकसित हुआ था और एशिय के बनने के बाद वे दूसरे महाद्वीपों में चले गए होंगे.

    उस समय भारत एक द्वीप था
    शोधकर्ताओं का कहना है कि यह जानवर तब विकसित हुआ होगा जब भारत एक द्वीप था.  ये नतीजे इस मत की भी पुष्टि करते हैं तो तीस साल पहले प्रस्तावित किया था कि घोड़ों की उत्पत्ति भारत में हुई थी जब वह मैडागास्कर से उत्तर की ओर जा रहा था.

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    ज्यादातर खुर वाले (Hoofed) स्तनपायी जानवर (Mannmals) इसी प्रजाति से विकसित हुए थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    मैडागास्कर से अलग हो रहा था तब भारत
    रोज ने बताया, “1990  क्रॉज और मास ने प्रस्ताव दिया था कि ये जीव भारत में मैडागास्कर से उत्तर की ओर खिसकने के दौरान विकसित हुए थे और जब एशिया से यह महाद्वीप मिला था, तब उत्तरी महाद्वीपों में फैल गए थे.”ताजा खोज शोधकर्ताओं की एक वैश्विक टीम की 15 साल की अथक मेहनत का नतीजा है जिसमें पूरे भारत में मिले 350 जीवाश्मों से जमा किए गए टुकड़ों से कैम्बेथीरियम की हड्डियों का पूरा ढांचा बनाया था.

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    एशिया से जुड़ने से पहले
    उत्तरी गोलार्द्ध में पेरिसोडाक्टिलस की बहुतायत होने के बाद  कैम्बेथीरियम से पता चलता है कि यह समूह अलग-थलग रहकर भारत या उसके पास 6.5 करोड़ से लेकर 5.5 करोड़ साल तक विकसित हुआ होगा. ऐसा भारत के एशिया की धरती से जुड़ने से पहले हुआ होगा. कैम्बेथीरियम के बारे में पहली बार साल 2005 में बताया गया था. यह एक सबसे पुरातन विलुप्त समूह का सदस्य माना जाता है जिसकी उद्भव प्रक्रिया पेरिसोडाक्टिलस के विकसित होने से पहले अलग हो गई थी.
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