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वैज्ञानिकों ने खोजा एक अनोखा बाह्यग्रह, हैरान करने वाली हैं इसकी खूबियां

वैज्ञानिकों ने खोजा एक अनोखा बाह्यग्रह, हैरान करने वाली हैं इसकी खूबियां

इस बाह्यग्रह (Exoplanet) में बहुत सी ऐसी खूबियां हैं जो इससे पहले किसी ग्रह नहीं दिखी हैं.

इस बाह्यग्रह (Exoplanet) में बहुत सी ऐसी खूबियां हैं जो इससे पहले किसी ग्रह नहीं दिखी हैं.

नासा (NASA) के ट्रांजिट एक्जोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) ने अब तक बहुत अलग अलग प्रकार के बाह्यग्रह (Exoplanet) खोजे हैं. इन के अध्ययन के पीछे वैज्ञानिकों का प्रयास यह जानने का होता है कि वे सौरमंडल में ग्रह निर्माण की प्रक्रिया को और भी गहराई से समझ सके. नई खोज में वैज्ञानिकों ने अब तक के खोजे गए सबसे हलके बाह्यग्रहों में से एक है और यह अपने तारे का चक्कर केवल 8 घंटे में ही लगा लेता है.

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    बाह्यग्रहों की खोज में वैज्ञानिकों को नए तरह के ग्रह मिलते रहते हैं. लेकिन हाल ही में नासा (NASA) के ट्रांजिट एक्जोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) के आंकड़ों के जरिए एक अनोखे बाह्यग्रह (Exoplanet) की खोज की है जिसमें बहुत सी विशेषताएं ऐसी हैं जो अब तक किसी भी ग्रह में नहीं देखी गई हैं. यह अब के खोजे गए 5000 हजार बाह्यग्रहों में सबसे हलके ग्रहों में से एक है इसका भार पृथ्वी का लगभग आधा है और इसका व्यास 9 हजार किलोमीटर से ज्यादा है जो मंगल के व्यास से थोड़ा ज्यादा है.

    दो तरह से की गई गणना
    शोधकर्ताओं का कहना है कि उनका शोध दूसरी पृथ्वी की खोज की दिशा में एक अगला और अहम कदम है क्योंकि यह दर्शाता है कि खगोलविद अब बहुत छोटे ग्रहों की विशेषताओं का भी पता लगा सकते हैं. इस अध्ययन के सहलेखक और यूसीएल मुलार्ड स्पेस साइंस लैबोरेटरी के डॉ विन्सेंट वैन ईलिन का कहना है कि इस नए अध्ययन में ग्रह के आकार और भार की गणना दो पद्धतियों का उपयोग कर की गई थी.

    किन पद्धतियों का उपयोग
    इलिन ने इन दोनों पद्धति के बारे में बात करते हुए कहा कि दोनों ही पद्धतियों में ग्रह के तारे से आने वाले प्रकाश के अध्ययन की मदद ली गई. एक में तारे के सामने से बार बार गुजरने पर चमक में होने वाली कमी को मापा गया. वहीं दूसरी पद्धि में ग्रह के तारे की गतिविधि पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया.

    बहुत अधिक दूरी से महीन गतिविधि का अवलोकन
    उन्होंने कहा, “दूसरी पद्धति में गतिविधि बहुत ही धीमी गति से हो रही थी जो करीब 80 सेमी प्रति सेकेंड की दर थी. इसका अवलोकन इतना बढ़िया और रोमांचक रहा कि हम 31 प्रकाश वर्ष की दूरी से भी इस छोटे सी गतिविधि को देख पाने में सफल रहे. इस अध्ययन की प्रमुख लेखिका डॉ क्रिस्टीन लैम ने  बताया, “GJ 367b नाम के इस ग्रह की त्रिज्या और भार के सटीक निर्धारण के आधार पर इसे एक पथरीला ग्रह करार दिया गया है.”

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    इस बाह्यग्रह (Exoplanet) की जानकारी निकालने में दो पद्धतियों का उपयोग किया गया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    बहुत तेजी से अपने तारे की परिक्रमा
    लैम ने कहा कि इसे पृथ्वी से थोड़े छोटे ग्रह की श्रेणी में रखा गया है और इससे दूसरी पृथ्वी की खोज कि दिशा में एक अहम कदम मना जा सकता है. GJ 367b बाह्यग्रह को अल्ट्रा शॉर्ट पीरियड (USP) के समूह का ग्रह है जो अपने तारे का चक्कर 24 घंटे से भी कम समय में पूरा कर लेते हैं. यूएसपी की मूलभूत विशेताओं का सटीक अध्ययन कर हमें उसके ग्रह सिस्टम के निर्माण और विकास के इतिहास को समझ सकते हैं.

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    त्रिज्या और भार
    टेस के आंकड़ों के जरिए इस ग्रह की खोज और ट्रांजिट पद्धति लगाने के बाद पृथ्वी पर मौजूद यूरोपियन साउदर्न वेधशाला के टेलीस्कोप पर लगे HARPS उपकरण से इस ग्रह के तारे कास्पैक्ट्रम का अध्ययन किया गया. दोनों पद्धतियों के नतीजों को मिला कर इस ग्रह की त्रिज्या और भार का पता लगाया गया. इसकी त्रिज्या पृथ्वी की त्रिज्या का 72 प्रतिशत है और भार उसका 55 प्रतिशत था.

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    इस ग्रह का तारा (Star) हमारे सूर्य के आधे आकार है और एक एम श्रेणी का तारा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    आंतरिक संरचना का अनुमान
    शोधकर्ताओं ने इस ग्रह की त्रिज्या और भार की गणना 7 और 14 प्रतिशत सटीकता से मापन किया इसके अलावा शोधकर्ता यह भी अनुमान लगाने में सफल रहे कि इस बाह्यग्रह की आंतरिक संरचना कैसी होगी. यह कम  भार का पथरीला ग्रह होना चाहिए लेकिन इसका घनत्व पृथ्वी के घनत्व से ज्यादा है जिसका मतलब है कि इसकी क्रोड़ में लोहा बहुत अधिक होना चाहिए.

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    शोधकर्ताओं का कहना है कि ये विशेषताएं बुध ग्रह की तरह हैं. यह बाह्यग्रह भी अपने तारे के बहुत पास होने की वजह से बहुत गर्म है जहां पृथ्वी की तुलना में 500 गुना ज्यादा शक्तिशाली विकरण आते हैं. सतह का तापमान 1500 डिग्री सेल्सियसतक पहुंच जाता है जहां सभी चट्टानें पिघल जाती है. इसका सूर्य भी हमारे सूर्य के आधे आकार का है और एम श्रेणी का लाल बौना है जिससे उसके ग्रहों का अवलोकन आसान हो जाता है.

    Tags: Earth, Nasa, Research, Science, Space

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