वैज्ञानिकों ने बताया, कैसा है ‘गर्म नेप्च्यून’ बाह्यग्रह का वायुमंडल

नेप्च्यून (Neptune) के आकार का बाह्यग्रह (Exoplanet) वास्तव में बहुत गर्म है जिसके वायुमंडल की जानकारी वैज्ञानिको ने निकाली है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
नेप्च्यून (Neptune) के आकार का बाह्यग्रह (Exoplanet) वास्तव में बहुत गर्म है जिसके वायुमंडल की जानकारी वैज्ञानिको ने निकाली है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

नासा के TESS और स्प्लिटजर के आंकड़ों का अध्ययन कर शोधकर्ताओं ने उस बाह्यग्रह (Exoplanet) के वायुमंडल की जानकारी निकाली जिसे खगोलविदों ने गर्म नेप्च्यून (Hot Neptune) ग्रह कहा था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2020, 6:50 AM IST
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पिछले साल ही खगोलविदों (Astronomers) ने एक अनोखा बाह्यग्रह खोजा था. 260 प्रकाशवर्ष दूर स्थित यह बाह्यग्रह (Exoplanet) हमारे सौरमंडल (Solar System) के नेप्च्यून ग्रह (Neptune) के आकार का था, लेकिन वह ठंडा होने की जगह बहुत ही गर्म ग्रह है. हमारे खगोलविदों ने उस ग्रह को गर्म नेप्च्यून कहा था. अब कानसस यूनिवर्सिटी के खगोलविदों ने इस गर्म नेप्च्यून ग्रह के वायुमंडल का खाका खींचा है.

TESS और स्प्लिटजर के आंकड़ों का अध्ययन
LTT 9779b नाम के इस बाह्यग्रह का अध्ययन शोधकर्ताओं ने नासा के TESS और स्प्लिट्जर स्पेस टेलीस्कोप के आंकड़ों का उपयोग कर किया है. यह पहली बार है कि खगोलविदों ने TESS  के खोज गए किसी बाह्यग्रह की स्पैक्ट्रल वायुमंडलीय विशेषताओं का इतने विस्तार से पता लगाया है. खगोलविदों ने यह भी इस ग्रह के प्रकाश का अध्ययन किया जो अब अस्तित्व में नहीं रह गया होगा.

केवल 19 घंटे का एक साल
असाधारण ग्रह होने के साथ ही LTT 9779b की कक्षा अपने तारे के काफी करीब थी. इसकी वजह से इसका एक साल केवल 19 घंटों का है वहीं उसके तारे के विकिरण के कारण उस ग्रह का तापमान 1727 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इसका वायुमंडल पूरी तरह से वाष्पीकृत हो गया होगा. लेकिन फिर भी स्प्लिट्जर के अवलोकन बताते हैं कि इसका एक वायुमंडल भी होगा.



पहला इस तरह का बाह्यग्रह
इस ग्रह से इंफ्रारेड प्रकाश उत्सर्जित हो रहा है. इस ग्रह पर कोई ठोस सतह नहीं है और यह हमारे सौरमंडल के बुध ग्रह से भी ज्यादा गर्म है. इसकी खोज होने के बाद यह TESS के द्वारा खोजा गया सबसे पहला ऐसा ग्रह था जो नेप्च्यून के आकार का था.

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इस बाह्यग्रह (Exoplanet) के बारे में पहले खगोलविदों को लगा था कि यह बहुत ही गर्म ग्रह होगा.. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


ग्रह का तापमान कैसा रहता है
शोधकर्ताओं ने नापा कि कैसे यह ग्रह बहुत ज्यादा इंफ्रारेड प्रकाश उत्सर्जित करता है जब वह अपनी धुरी पर 360 डिग्री से घूमता है. इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और केयू में भौतिकी और खगलोविज्ञानके असिस्टेंट प्रोफेसर इयान क्रॉसफील्ड ने बताया, “इंफ्रारेड प्रकाश आपको किसी चीज का तापमान बताता है और साथ ही यह भी कि ग्रह के कौन से हिस्से गर्म हैं और कौन से ठंडे. यह ठीक दोपहर को सबसे गर्म नहीं होता है, बल्कि यह दोपहर के कुछ घंटे बाद सबसे गर्म होता है.”

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उतना गर्म नहीं है यह ग्रह
इस लेख के सह लेखक और इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन एक्जोप्लैनेट (iREx) के निकोलस कोवान ने बताया, “यह ग्रह जितना हम उम्मीद कर रहे थे उससे कहीं ज्यादा ठंडा है. इससे पता चलता है कि यह वह अपने ऊपर पड़ने वाले अपने तारे की काफी रोशनी को प्रतिबिंबित कर देता है. इसकी वजह उसके दिन के समय के बाद होंगे.

यह है वजह
शोधकर्ताओं ने बताया कि इसके अलावा यह ग्रह अपनी  ज्यादा ऊष्मा रात को नहीं पहुंचा पाता होगा. हमें लगता है कि हम यह समझ पाए हैं कि तारों से आने वाली ऊष्मा ऊंचे वायुमंडल में ही अवशोषित हो जाती होगी. जहां से ऊर्जा तेजी से वापस अंतरिक्ष में चली जाती होगी.

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शोधकर्ताओं ने पाया कि तारे (Star) के पास होने के बाद भी इस बाह्यग्रह (Exoplanet) में गर्मी बहुत ज्यादा नहीं रहती होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)


इन गैसों की मौजूदगी
क्रासफील्ड का कहना है कि ये नतीजे बाह्यग्रहों के अन्वेषण के नये दौर का पहला कदम मान जा सकते हैं. यहां से बाह्यग्रहों के वायुमंडलों का अध्ययन धीरे धीरे छोटे और छोटे ग्रहों तक जाएगा. शोधकर्ताओं के अध्ययन में पाया गया कि इस ग्रह के वायुमडंल पर कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड की मौजूदगी है.

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एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल लैटर्स में प्राकशित इस अध्ययन के शोधकर्ताओं का विश्वास है कि उन्होंने इस अध्ययन से भविष्यके अध्ययनों के लिए एक नींव रखने का काम किया है. आने वाले सालों  में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के आने से इस दिशा में खासी उन्नति हो सकती है.
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