इन ताकतवर मुस्लिम विद्रोहियों ने अमेरिका को भी दिया बड़ा चैलेंज, ड्रोन से डराया

इन ताकतवर मुस्लिम विद्रोहियों ने अमेरिका को भी दिया बड़ा चैलेंज, ड्रोन से डराया
सऊदी अरब के तेल फील्ड और रिफायनरी पर बड़ा हमला करके हुति विद्रोही बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं

सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर जिस तरह हमले हुए हैं, वो ये दिखाने के लिए काफी हैं कि जिन्होंने ये हमला किया, वो ना केवल तकनीक तौर पर आगे हैं बल्कि अमेरिका की मोटी सुरक्षा में सेंध लगाने में उस्ताद हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 16, 2019, 9:05 PM IST
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सऊदी अरब के दो बड़े ऑयल फील्ड्स और एक बड़ी रिफायनरी पर जिस तरह दस ड्रोन ने हमला किया, उससे पूरी दुनिया सन्न है. खासकर अमेरिका को तो ये बड़ी पटखनी है, जो सऊदी अरब की सुरक्षा करता है. दुनिया के नक्शे पर आईएस के बाद ये एक नई मुस्लिम विद्रोहियों की ताकत का उदय है, जिन्होंने ना केवल इस हमले को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया बल्कि खुलेआम अमेरिका को ललकारा भी है. ये यमन के हुति विद्रोही हैं, जिनका नारा ही अमेरिका का विनाश.

हुति विद्रोही पिछले साढ़े चार सालों में अपनी ताकत लगातार बढाते रहे हैं. पिछले कुछ समय से वो सऊदी अरब पर ना जाने कितने ही छोटे-छोटे हमले करते रहे थे. पहली बार उन्होंने ऐसा बड़ा हमला किया है, जिससे सऊदी अरब के तेल उत्पादन को खासा बड़ा झटका लगा है. दुनियाभर में तेल के दामों में उछाल मारी है. लेकिन इस हमले के तौरतरीके सीधे सीधे अमेरिका को चुनौती देने वाली ही हैं.





माना जाता है कि इस हमले में दस ड्रोन उत्तरी यमन से भेजे गए. वो करीब 1200 किलोमीटर की दूरी तय कर पूर्वी सऊदी अरब में बहरैन की सीमा पर पहुंचे. वहां इन ड्रोन ने बमों की बौछार से सऊदी के दो ऑयल फील्ड और बड़ी रिफायनरी को खासा नुकसान पहुंचाया. ये नुकसान ऐसा है कि सऊदी अरब के तेल उत्पादन को सामान्य स्थिति में आने में खासा समय लगेगा.
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ड्रोन ने 1200 किलोमीटर का सफर कैसे तय किया
चकित करने वाली ये भी है कि ये ड्रोन इतनी लंबी दूरी तय करके कैसे वहां तक पहुंचे कि अमेरिका के सुरक्षा सिस्टम को तनिक भी भनक तक नहीं लगी. फिर उन्होंने अचूक तरीके से लक्ष्य तक पहुंचकर उन्हें अपना निशाना बनाया. दुनिया में इससे पहले कभी ड्रोन से ऐसा हमला नहीं हुआ है. इसका मतलब ये भी साफ है कि हमलावर हुति विद्रोही तकनीक तौर पर काफी आगे निकल चुके हैं.

हुति विद्रोहियों के ड्रोन हमले के बाद धूं धूं कर जलता सऊदी अरब का ऑयल फील्ड


हमले के बाद यमन की विद्रोही सेना के रूप में जाने जाने वाले हुति सैन्य कमांडर ने कहा कि ये ड्रोन खास तरीके के थे और उन्होंने ऐसी मोटर से लैस किया गया था, जो आमतौर पर इस्तेमाल में नहीं लाईं जातीं. गौरतलब है कि ड्रोन और मिसाइल तकनीक के मामले में ईरान काफी उन्नत है.

हुति विद्रोहियों को काफी हद तक ये मदद ईरान से मिली है. ईरान भी सऊदी अरब और अमेरिका को अपना दुश्मन नंबर एक मानता है. लिहाजा वो सीधे नहीं लेकिन खाड़ी देशों के कई विद्रोही ग्रुप और हुति विद्रोहियों के कंधे पर हाथ रखकर अपना काम बखूबी कर रहा है.

हुति विद्रोहियों ने तुरंत लिया हमले का जिम्मा
हमले के बाद हुति विद्रोहियों ने तुरंत इसका जिम्मा लिया. साथ ही चेतावनी दी कि वो जल्दी ही सऊदी अरब में हमलों की लिस्ट और बड़ी करने वाले हैं. हकीकत ये है कि कुछ दिनों पहले तक अमेरिका लगातार दावा करता रहा था कि उसकी सुरक्षा में सऊदी अरब ना केवल महफूज है बल्कि कोई उसकी ओर आंख उठाकर देख भी नहीं सकता है. अब ये हमला ऐसा और इस तरह हुआ है कि अमेरिका खुद कांप गया है. दरअसल खाड़ी देशों में सऊदी अरब और अमेरिका मिलकर तमाम तरह के दाव-पेंच खेलते रहे हैं.

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इसके लिए अमेरिका ही जिम्मेवार है
अमेरिका और सऊदी अरब की कारस्तानियों ने खाड़ी देश में लगातार असहज हालात बनते रहे हैं. ये भी कहा जा सकता है कि हुति विद्रोहियों के रूप में दुनिया के सामने उभर कर आई ये ताकत उसी की पैदा की हुई है.

अमेरिका और सऊदी अरब की दखंलदाजी के खिलाफ यमन की सड़कों पर गुस्सा


अमेरिका ने कुछ साल पहले सऊदी अरब के साथ मिलकर वहां अपनी मनमर्जी की सरकार बनाई. इसके बाद वहां गृहयुद्ध की जैसी स्थिति पैदा हुई, उसमें हजारों लोग मर चुके हैं. हजारो घायल हो चुके हैं जबकि लाखों लोग बेघरबार हो चुके हैं. यमन में इसी गुस्से की लहर से बीच उत्तरी यमन में जायदी नाम ट्राइब्स ने विद्रोह का बिगुल बजा दिया. उन्हें अंसारुल्लाह आंदोलन की उपज भी कहा जाता है, जिसका मुख्य केंद्र ईरान ज्यादा रहा है.

पिछले सालों में बढ़ी है हुति विद्रोहियों की ताकत
पिछले कुछ सालों में हुति विद्रोहियों की ताकत लगातार बढ़ी है. पहले वो कुछ हजारों में थे लेकिन अब उनकी सुसज्जित सेना दो लाख जवानों से कहीं ज्यादा बड़ी हो चुकी है. जिसके पास पर्याप्त संख्या में सैन्य साजोसामान है. अमेरिका और सऊदी अरब का सैन्य गठजोड़ हुति विद्रोहियों के ठिकानों पर 18000 से अधिक बार हमले कर चुका है लेकिन इसके बाद भी उनका ज्यादा कुछ बिगाड़ नहीं सका है.

हुति विद्रोहियों में ज्यादा जायदी शिया हैं लेकिन हाल के बरसों में सुन्नी भी इसमें शामिल हुए हैं. इसके अलावा यमन और पड़ोसी देशों के अन्य ट्राइब्स भी अब इसमें शामिल हो रहे हैं. ये ऐसा विद्रोही सैन्य संगठन बन रहा है, जिसकी ताकत भविष्य में तालिबान, अल कायदा और आईएस से कहीं ज्यादा हो सकती है.

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कौन है इस संगठन का मुखिया
पहले इस संगठन का मुखिया हुसैन बद्रदीन अल हुति था, जिसके परिवार के नाम पर इस संगठन का नाम हुति पड़ा. हुसैन को दो तीन साल पहले यमन फौजों ने घेरकर मार दिया. उसके बाद इसका जिम्मा उसके छोटे भाई 40 वर्षीय अब्दुल मलिक अल हुति ने संभाला है, जो कहीं ज्यादा चालाक और रणनीतिक तौर पर मजबूत माना जाता है. जिसने अपने संगठन को काफी फैलाया और मजबूत बनाया है.

हुति विद्रोही अब बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. वो तकनीक तौर पर उन्नत हथियार हासिल कर रहे हैं


क्या है उनका नारा
हुति विद्रोहियों का नारा है, "अमेरिका का विनाश, इजराइल का विनाश, कुचल दो यहुदियों को और इस्लाम की जीत". इस नारे से आप समझ सकते हैं कि वो किस कदर अमेरिका और इजराइल को लेकर गुस्से से भरे हैं. चूंकि यमन में बसे यहुदियों से भी उनकी अदावत है, लिहाजा उनका लक्ष्य में लगातार ये सब उनके पक्के दुश्मन हैं.

हालांकि अब तक उनकी महत्वाकांक्षाओं के बारे में बहुत कुछ उजागर नहीं हुआ है लेकिन मूलतौर पर वो अपनी लड़ाई यमन के हितों और स्थिरता तक लड़ना चाहते हैं. ईरान और शायद रूस से गुपचुप मदद और समर्थन मिलने के काऱण उनके हौसले भी बढ़े हैं.

तब क्या होगा
एक बड़ा सवाल जाहिर है कि सऊदी अरब पर अगर हुति विद्रोहियों ने फिर बड़ा हमला किया तो क्या होगा. इसका जवाब यही होगा, जो थोड़ा डराने वाला भी है कि दुनिया ना केवल तेल की कमी के कारण थम सकती है बल्कि तेल का अभूतपूर्व संकट पैदा हो सकता है. जो तेल मिलेगा भी वो जेब से बाहर जा चुका होगा.

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