कोई भी भारतीय अमेरिका में लड़ सकता है चुनाव, बशर्ते ये काम करे

जानिए अमेरिका में चुनाव लड़ने के लिए भारतीयों को कौन सी शर्तें पूरी करनी होती हैं

News18Hindi
Updated: November 8, 2018, 3:23 PM IST
कोई भी भारतीय अमेरिका में लड़ सकता है चुनाव, बशर्ते ये काम करे
अमेरिकी संसद
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Updated: November 8, 2018, 3:23 PM IST
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव चर्चाओं में हैं, चार भारतीय मूल के लोग भी वहां इन चुनावों में जीते हैं. ऐसे में ये सवाल लाजिमी है कि क्या अमेरिका में जाकर रह रहा कोई भी भारतीय वहां चुनाव लड़ सकता है या नहीं. इसका जवाब यही है बेशक कोई भी भारतीय वहां चुनाव लड़ सकता है लेकिन उसे दो शर्तें पूरी करनी होती हैं.

लगे हाथ आपको ये बता देते हैं कि अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में 12 भारतीय मूल के लोगों ने किस्मत आजमाई थी. इन भारतीयों में ज्यादातर ऐसे थे, जो या तो बचपन में वहां आए थे या फिर वो वहां पैदा ही हुए लेकिन ऐसा नहीं है कि किसी भारतीय को अमेरिका में चुनाव लड़ने के लिए वहां बहुत लंबा रहने की जरूरत है.
अमेरिका कानून अपने किसी भी नागरिक को चुनाव में वोट देने का अधिकार तो देते हैं लेकिन हर किसी को चुनाव में लड़ने का अधिकार नहीं देते.

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अमेरिकी कांग्रेस के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए अगर किसी भारतीय को चुनाव लड़ना है तो उसको अमेरिका का नागरिक होने के साथ ये भी बताना होगा कि वो सात सालों से अमेरिका में रह रहा है. अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 सीटें हैं.

पहले आप ये जानिए कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स क्या होता है. इसके बाद हम आपको बताएंगे क्या अमेरिका कांग्रेस के दूसरे अहम सदन सीनेट का चुनाव भी भारतीय लड़ सकते हैं या नहीं.

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कैसे होता है हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 सदस्य होते हैं. इसमें छह सदस्य बगैर वोटिंग के चुने जाते हैं, जो प्यूर्तो रिको, अमेरिकन समोआ, गुआम और उत्तरी मेरियन द्वीप, वर्जिन आइलैंड और कोलंबिया के होते हैं. बाकि सदस्यों का चुनाव अमेरिका के 50 राज्य करते हैं. ये जिलों से चुने जाते हैं लेकिन जिलों का निर्धारण अमेरिकी जनगणना के आधार आबादी से होता है.
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 218 सीटें पाने वाली पार्टी बहुमत में आ जाती है. अब तक इसमें रिपब्लिकंस का बहुमत था लेकिन अब डेमोक्रेट्स बहुमत में आ गए हैं. हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स का नेता स्पीकर होता है, जो अब तक रिपब्लिकन पार्टी के पाल रेयान थे लेकिन अब उम्मीद है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की नेनसी पलोसी अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में स्पीकर का पद संभाल सकती हैं. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में प्रतिनिधि का कार्यकाल दो साल के लिए होता है, लिहाजा हर राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान मध्यावधि चुनाव जरूर होता है.

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राजा कृष्णामूर्ति हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुने गए हैं


कौन से चार भारतीय चुने गए हैं इस बार
जो चार भारतीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुने गए हैं, वो सभी डेमोक्रिटिक पार्टी के सदस्य हैं. उन्हें संसद के सदस्य के तौर पर दोबारा चुना गया है.इलिनोइस के आठवें कांग्रेस जिले में राजा कृष्णमौर्थी को दोबारा 30 फीसदी से भी ज्यादा मार्जिन के साथ चुना गया. कैलिफोर्निया से लगातार चौथी बार डॉ. एमी बेरा ने जीत हासिल की है.

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बेरा ने रिपब्लिन पार्टी के एंड्रयू ग्रांट को पांच फीसदी मार्जिन से हराया. सिलिकॉन वैली में भारतीय अमेरिकी रोहित खन्ना ने जीत पाई. जीतने वाली चौथी भारतीय महिला सांसद प्रमिला जयपाल हैं.

प्रमिला जयपाल पहली महिला हैं, जो हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स तक पहुंची हैं


कैसे कोई भारतीय बन सकता है सीनेट का सदस्य
अमेरिकी सीनेट का चुनाव लड़ने की पात्रता थोड़ी सी अलग है. इसे भी कोई भी भारतीय लड़ सकता है. बशर्ते वो 30 साल का हो और अमेरिकी नागिरक होने के साथ वहां नौ सालों से रह रहा हो.
अमेरिकी सीनेट में 100 सदस्य होते हैं. इन सभी का अमेरिका के 50 राज्य सीधा चुनाव करते हैं. हर राज्य से सीनेट के लिए दो सीटें होती हैं. हालांकि अब तक इसमें एक ही भारतीय मूल की सदस्य जगह पा सकी हैं और वो कमला हैरिस हैं, जो कैलिफोर्निया से चुनकर वहां पहुंची थीं.
सीनेट के सदस्य का कार्यकाल छह सालों का होता है. अमेरिकी सीनेट में किसी भी पार्टी को बहुमत के लिए 51 सीटों की जरूरत होती है. फिलहाल अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है .

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