ब्लैकहोल का शिकार होने से बच निकला एक तारा, जानिए कैसे हुआ यह चमत्कार

ब्लैकहोल प्रकाश तक को अपने अंदर खींच लेता है. प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर
ब्लैकहोल प्रकाश तक को अपने अंदर खींच लेता है. प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

वैज्ञानिकों ने ऐसे तारे (Star) का पता लगाया है जिसे एक ब्लैकहोल (Black Hole) अपने पास खींचने के बाद भी पूरी तरह से निगल नहीं सका.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 27, 2020, 8:51 PM IST
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नई दिल्ली: ब्लैकहोल (Black Hole) के बारे में हमें बहुत ही मुश्किल से जानकारी मिलती है. इसके बारे में हम यह जानते हैं कि इसमें गुरुत्वाकर्षण शक्ति (Gravitational Power) इतनी ज्यादा होती है कि यह प्रकाश (Light) तक को अपने अंदर खींच लेता है और निरंतर अपने आस पास की खगोलीय वस्तुओं को खुद में समेटता रहता है. हाल ही में एक अध्ययन से पता चला है कि एक तारा ब्लैकहोल का पूरा शिकार होने से बच गया.

कैसे पता चलता है कि ब्लैकहोल कुछ निगल रहा है
जब ब्लैकहोल अपने आसपास की कोई बड़ी वस्तु निगलता है तो यह घटना छिपी नहीं रह पाती. इस प्रक्रिया के दौरान ब्लैकहोल में जाने वाले पदार्थ का तापमान बढ़ने के कारण बहुत सी मात्रा में एक्स रेज निकलती हैं. यह इतनी चमकदार होती हैं कि पृथ्वी से देखी जा सकती है.

कुछ असामान्य हुआ इस बार
यह ब्लैकहोल का सामान्य बर्ताव है. लेकिन पिछले साल हमारी गैलेक्सी के केंद्र में 250 प्रकाशवर्ष दूर एक अतिविशालकाय ब्लैकहोल का बर्ताव असामान्य रहा जब यह एक्स रे की ज्वाला आगे की नियमित रूप से हर नौ घंटे में निकलती रही.



तो तारे का क्या हुआ वास्तव में
ब्लैकहोल के इस बर्ताव का यूके स्थित लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के खगोलविद एंड्रयू किंग ने अध्ययन किया.  उन्हें लगता है कि इसका कारण यह था कि एक मृत तारा ब्लैकहोल के पास से गुजरा और उसकी कक्षा में 9 घंटे तक फंसा रहा फिर वहां से निकल गया. लेकिन इसी दौरान इस तारे का बहुत सारा पदार्थ ब्लैकहोल ने लील लिया.

Black holeव
ब्लैकहोल की सतह से कई बार प्रकाश बाहर आ जाता है.


शुरुआत तो सामान्य ही हुई थी
किंग ने बताते हैं कि यह सफेद छोटा तारा एक अंडार कक्षा में आ गया जब वह ब्लैक होल के नजदीक आया और हर 9 घंटे में एक चक्कर पूरा करता रहा. जब यह ब्लैकहोल के नजदीक पहुंचा तब इस तारे से गैस ब्लैकहोल की ओर खिंचने लगी और उससे एक्स रे निकली. इन्हीं एक्स रे को दो अंतरिक्ष यानों ने पकड़ा.

तारे में क्या हुआ बदलाव
किंग के अनुसार जब ब्लैकहोल इस तारे को अपनी ओर खींच रहा था. तब उसने तारे के बाहरी हिस्से को तो खींच लिया, लेकिन तब तक यह तारा एक सफेद बौने तारे (White Dwarf)  बदल गया था. ऐसे तारे अपनी बची हुई ऊष्मा के कारण चमकते हैं क्योंकि उनकी नाभकीय विलियन खत्म हो चुका होता है. इसके बाद यह तारे ब्लैकहोल की कक्षा में चला गया.

क्या होता हैं व्हाइट ड्वार्फ
इस सफेद बौने तारे में, जिसे हीलियम की मात्रा ज्यादा होती है और हाइड्रोजन खत्म हो चुका होता है. यह तारा धीरे धीरे डोलने लगता है. बिलकुल उसी तरह जब लट्टू के घूर्णन की गति कम होने लगती है. इस तरह से डोलना हर दो दिन में होना चाहिए और इसका आसानी से अवलोकन भी किया जा सकता है.

Black Hole
तारे का ब्लैक बोल से बच निकलना पहली बार देखा गया है.


तारे की स्थिति बहुत अहम होती है ऐसे में
इस तरह से ब्लैकहोल का द्रव्यमान या भार बढ़ता ही जाता है. GSN 069 गैलोक्सी के इस ब्लैकहोल का द्रव्यमान कम है. इसका मतलब हुआ कि तारा नजदीक की कक्षा में जा सकता है. लेकिन ब्लैकहोल से बचने के लिए तारे का बड़ी कक्षा में होना जरूरी है. इससे वह आसानी से उस समय से बच सकता है जब उसका पदार्थ ब्लैकहोल में जा रहा हो. और यदि तारा ब्लैकहोल के नजदीक आया तो ब्लैकहोल उसे खा जाएगा.

फिर भी बच ही निकला यह तारा
ऐसे तारे का बच निकलना दर्शाता है कि इस तरह के और भी खगोलीय घटनाएं हो रही होंगी. इस तरह की घटनाएं हमारे टेलीस्कोप बहुत की कम देख पाते हैं. यह तारा अब अपनी कक्षा में चला गया. यह अपने आप में बहुत दुर्लभ घटना है.

अब तारे का क्या होगा
यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है. अगर कुछ नहीं बदला तो तारा वहीं रहेगा जहां है. ब्लैकहोल का चक्कर लगाता रहेगा इससे उसका आकार तो बढ़ेगा, लेकिन घनत्व कम होता जाएगा और अरबों साल तक धीरे धीरे खत्म होता रहेगा. यानि ब्लैकहोल उसे धीरे धीरे खाता रहेगा.

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