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क्या होता है वक्फ बोर्ड, राममंदिर से कैसे जुड़ा है इसका मसला

News18Hindi
Updated: October 17, 2019, 1:05 PM IST
क्या होता है वक्फ बोर्ड, राममंदिर से कैसे जुड़ा है इसका मसला
सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या राम मंदिर मामले की एक पार्टी है

अयोध्या (Ayodhya) राम मंदिर (Ram Mandir) मामले में एक पार्टी उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni waqf Board) भी है. जानिए वक्फ बोर्ड क्या होता है और ये राममंदिर मामले से कैसे जुड़ा है...

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  • Last Updated: October 17, 2019, 1:05 PM IST
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अयोध्या रामजन्मभूमि (Ayodhya Ramjanmabhoomi) मामले में सुप्रीम कोर्ट (Suprme Court) में बहस पूरी हो चुकी है. इस मामले में मध्यस्थता करने वाले पैनल ने सुप्रीम कोर्ट को नई रिपोर्ट सौंपी है. सुप्रीम कोर्ट का फैसला चाहे जो हो, इस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni Waqf Board) की भूमिका अहम रहने वाली है.

पिछले दिनों खबर आई थी कि सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या राम मंदिर मामले में अपना दावा वापस ले सकता है. इस मामले की मध्यस्थता करने वाले पैनल ने रिपोर्ट दी थी कि अगर सरकार राममंदिर-बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) विवादित परिसर का अधिग्रहण कर जमीन को राममंदिर निर्माण के लिए देती है तो इस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड को आपत्ति नहीं होगी.

इस बीच ये जानना दिलचस्प होगा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या राम मंदिर मामले से किस तरह से जुड़ा है? वक्फ बोर्ड किसे कहा जाता है और इसका क्या काम होता है? वक्फ बोर्ड कैसे चलाया जाता है? अयोध्या मामले से जुड़े विवाद को समझने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड और इसके तौर तरीकों को जानना जरूरी है.

क्या होता है वक्फ?

वक्फ उस संपत्ति को कहा जाता है जो अल्लाह के नाम पर धार्मिक और चैरिटेबल कार्यों के लिए दान में दी जाती है. कानूनी नजरिए से अगर कोई शख्स अपनी चल या अचल संपत्ति को अपनी मर्जी से इस्लाम के पवित्र कार्यों में लगाने के लिए दान करता है, तो उसे वक्फ कहते हैं.

वक्फ का निर्माण डीड के जरिए किया जा सकता है. किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित किया जा सकता है अगर उसका इस्तेमाल लंबे समय के लिए इस्लाम से जुड़ी धार्मिक गतिविधियों या चैरिटेबल वजहों से किया जा रहा हो. वक्फ की संपत्ति का इस्तेमाल आमतौर पर धार्मिक स्कूल चलाने, कब्रिस्तान बनाने, मस्जिद बनाने या फिर शेल्टर होम बनाने के लिए किया जाता है.

how a waqf board is created and work know up sunni waqf connection with ayodhya ram mandir babari masjid dispute
कोर्ट ने बाबरी मस्जिद को सुन्नी वक्फ बोर्ड के दायरे में बताया था

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अगर कोई व्यक्ति वक्फ का निर्माण करता है तो फिर वो उससे अपनी संपत्ति वापस नहीं ले सकता. कोई गैरमुस्लिम भी वक्फ का निर्माण कर सकता है. लेकिन उसकी इस्लाम में आस्था होनी चाहिए और वक्फ का निर्माण इस्लाम के उदेश्यों की पूर्ति के लिए होनी चाहिए.

कैसे काम करता है वक्फ?

वक्फ के काम करने के लिए वक्फ एक्ट 1995 बनाया गया है. इस एक्ट के मुताबिक ही वक्फ काम करता है. इस एक्ट के अनुसार एक सर्वे कमिश्नर वक्फ की संपत्ति का मुआयना करता है. इसके लिए वो जांच करता है, गवाहों से मिलता है, संपत्ति के दस्तावेजों को खंगालता है. वक्फ को मैनेज करने वाले को मुतावली कहते हैं. उसी के सुपरविजन में वक्फ काम करता है.

वक्फ भी कमोबेश ट्रस्ट की तरह काम करता है. ट्रस्ट इंडियन ट्रस्ट एक्ट 1882 के तहत काम करता है. हालांकि ट्रस्ट का दायरा ज्यादा बड़ा है. वो सिर्फ धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं है. जबकि वक्फ का दायरा सिर्फ धार्मिक कार्यों तक सिमटा है. ट्रस्ट को उसका बोर्ड चाहे तो भंग कर सकता है लेकिन वक्फ के साथ ऐसा नहीं है.

वक्फ बोर्ड क्या है?

वक्फ से संबंधित वक्फ बोर्ड कानूनन एक ऐसा बोर्ड है, जिसके पास संपत्ति के अधिग्रहण, उसे अपने पास रखने या उसके हस्तांतरण का अधिकार होता है. ये न्यायिक व्यवस्था के दायरे में बना बोर्ड है, इसलिए ये किसी व्यक्ति पर मुकदमा चला सकता है या कोर्ट में मुकदमे का सामना कर सकता है.

हर राज्य के पास अपना वक्फ बोर्ड है. इसके चेयरमैन होते हैं. इसमें एक या दो राज्य सरकार के नॉमिनी होते हैं, जो मुस्लिम विधायक या सांसद हो सकते हैं या फिर कोई मुस्लिम स्कॉलर, स्टेट बार काउंसिल के सदस्य हो सकते हैं.

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अयोध्या


वक्फ बोर्ड के पास ये अधिकार है कि वो अपनी संपत्ति का अपने हिसाब से इस्तेमाल करे. वक्फ की हड़पी या खो चुकी संपत्ति को फिर से हासिल करे. वक्फ अपनी संपत्ति को बेच सकता है, उसे लीज पर दे सकता है, किसी को गिफ्ट कर सकता है लेकिन इसके लिए बोर्ड के दो तिहाई सदस्यों की मंजूरी जरूरी है.

अयोध्या के विवादित परिसर से यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड का क्या संबंध है

वक्फ एक्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड को विवादित परिसर के प्रशासन का अधिकार है. 1945 में फैजाबाद की कोर्ट में सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड के बीच मामला चला. कोर्ट ने फैसला दिया कि बाबरी मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड के दायरे में आता है. अयोध्या रामजन्मभूमि मामले में 1989 से यूपी का सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड प्रतिवादी है.

क्या सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या राममंदिर से अपना दावा छोड़ सकता है

अयोध्या राममंदिर-बाबरी मस्जिद विवादित परिसर से सुन्नी वक्फ बोर्ड एकतरफा तरीके से अलग नहीं हो सकता है. किसी भी तरह के एकतरफा फैसले की कोई कानूनी अहमियत नहीं है. इस बारे में सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सिर्फ अपनी सहमति देकर वक्फ बोर्ड को इससे अलग नहीं करवा सकते. दावे से हटने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड के दो तिहाई सदस्यों की मंजूरी जरूरी है. इन सदस्यों में मुस्लिम समुदाय के दूसरे प्रतिनिधि शामिल हैं, जो दावे से हटने पर अपनी आपत्ति जाहिर कर सकते हैं.

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First published: October 17, 2019, 1:01 PM IST
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