जानिए कैसे चलती है हवा और कौन सी प्रक्रियाएं होती हैं इसके पीछे

हवा (Wind) हर बार अलग तरह और कारण से बहती है इसके पीछे तापमान (Temperature) और दबाव (Pressure) काम करते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
हवा (Wind) हर बार अलग तरह और कारण से बहती है इसके पीछे तापमान (Temperature) और दबाव (Pressure) काम करते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

हवा (Wind) के चलने में (Blowing) तापमान (Temperature) और दबाव (Pressure) दोनों का ही योगदान होता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया थोड़ी जटिल होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 8:53 PM IST
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हवा (Wind) कभी हमें अच्छी लगती है तो कई बार यह हमें बीमार तक कर सकती है. मौसम कोई भी हो, हवा हमेशा नहीं बहती (Blow) और एक ही गति (Speed) से नहीं बहती. वहीं कई बार हम इस बात से परेशान हो जाते हैं कि हवा बह क्यों नहीं रही है तो कई बार वह इतनी तेज बहती है कि आंधी (Thunder) का रूप लेकर पेड़ों तक को उखाड़ देती है. आखिर ऐसा क्यों होता है. हवा के बहने का कारण क्या होता है. आज हम यही जानने की कोशिश करेंगे कि हवा क्यों और कैसे बहती है.

अणु और तापमान
हवा के बहने के कारण समझने के लिए हमें हवा में मौजूद अणुओं की गतिविधियों को समझना होगा. हमारे वायुमंडल में या सामान्य भाषा में कहें कि हवा में कई तरह के कण या अणु मौजूद होते हैं लेकिन इन सभी में एक बात साझा होती है. वह यह कि इन्हें गतिमान होने के लिए ऊर्जा की  जरूरत होती है. यह उर्जा इन्हें तापमान से मिलती है. यानि यह उर्जा आसपास के वातावरण या फिर सूर्य की रोशनी से मिलती है. इसका मतलब यह हुआ कि ज्यादा तापमान तो ज्यादा ऊर्जा. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ज्यादा तापमान और ज्यादा ऊर्जा के कारण हवा बहती है.

क्या होता है अणुओं को ऊर्जा मिलने पर
सरल शब्दों में कहें तो अगर दो इलाकों की हवा के तापमान में अंतर हो हवा बहने लगती है. लेकिन यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल होती है. आइए इसे समझते हैं. जब कहीं हवा का तापमान बढ़ता है तो वहां की हवा ऊपर उठने की कोशिश करती है. क्योंकि इससे हवा के अणुओं को ऊर्जा मिलती है और उनमें गुरुत्व के प्रभाव से मुक्त होकर ऊपर उठने की ताकत आ जाती है. इसी तरह हवा में अणु जब ठंडे होते हैं तो वे एक दूसरे के पास आते हैं और नीचे आने लगते हैं.



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हवा (Wind) के बहने का प्रमुख कारण दबाव (pressure) में अंतर होना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


अलग अलग तापमान
आमतौर पर अणुओं को ऊर्जा सूर्य से मिलती है, लेकिन सूर्य से पूरी पृथ्वी पर एक सी ऊर्जा नहीं आ पाती है. कहीं सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं तो कहीं  तिरछी, कभी बादल बीच में आते हैं तो कहीं पहाड़ों के कारण सूर्य की किरणें नहीं पहुंच पाती हैं. इसी वजह से धरती की सतह पर कहीं गर्म हवा तो कहीं ठंडी हवा के अलग अलग इलाके बन जाते हैं.

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दबाव का कारक
तापमान के साथ एक और कारक काम करता है दबाव का, जैसे अलग अलग तापमान के इलाके बनते हैं वैसे ही अलग अलग दबाव के भी इलाके बनते हैं. जब तापमान अधिक होता है तो हवा ऊपर उठती है और ऐसे में कम दबाव का क्षेत्र बन जाता है. यहां हवा ज्यादा फैली होती है. यहां पर ही हवा की भूमिका आती है.

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आंधी तूफान (Storm) हवा (Wind) के बहने का विकृतम (Worst) रूप है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कभी तेज तो कभी धीमी
जब दबाव के अलग क्षेत्र बन जाते हैं को गैस या हवा अधिक दबाव क्षेत्र से कम दबाव के क्षेत्र की ओर जाती है जिसे हवा का बहना कहा जाता है. जितना ज्यादा दबाव का अंतर होगा उतनी ही ज्यादा तेजी से हवा बहेगी. इसी वजह से हवा कभी तेज तो कभी धीरे बहती है.

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मौसम भी बहाता है हवा
कभी कभी हवा बहुत ज्यादा गर्म हो जाती है और गर्मी के मौसम के कारण ऊपर भी नहीं उठ पाती है ऐसे में वह लू की तरह बहती है. तो वहीं कई बार हवा बहुत ठंडी होने पर दूर दूर तक  जाने लगती है जो शीत लहर का रूप ले लेती है.
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