इस IRS अधिकारी ने एक पिछड़े गांव को बनाया स्मार्ट विलेज, 100 अन्य गांवों पर निगाहें

डॉ. सत्यपाल सिंह मीणा ने राजस्थान के एक पिछड़े गांव की तस्वीर बदल कर रख दी.
डॉ. सत्यपाल सिंह मीणा ने राजस्थान के एक पिछड़े गांव की तस्वीर बदल कर रख दी.

सत्यपाल सिंह मीणा (Dr. Satyapal Singh Meena) के मुताबिक- 'मुझे गांव को शहर नहीं बनाना था. मैं बस चाहता था कि गांव के लोगों को भी वो सुविधाएं मिलें जो शहरों में मौजूद होती हैं और इसके लिए गांव के स्वरूप को बदलने की जरूरत नहीं थी.'

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राजस्थान के धौलपुर जिले के एक गांव धनौरा की किस्मत एक IRS अधिकारी ने बदल कर रख दी है. ये राज्य का पहला गांव है जिसे 'स्मार्ट' होने का खिताब हासिल हुआ है. सभी शहरी सुविधाओं से लैश इस गांव की खास बात ये है कि इसका स्वरूप नहीं बदला. यानी गांव में सभी जरूरत की सुविधाएं जरूर पहुंच गई हैं लेकिन अब भी इसकी आत्मा गांव की ही है. इस गांव की किस्मत बदलने वाली IRS अधिकारी डॉ. सत्यपाल सिंह मीणा खुद भी कहते हैं कि मुझे गांव को शहर नहीं बनाना था. मैं बस चाहता था कि गांव के लोगों को भी वो सुविधाएं मिलें जो शहरों में मौजूद होती हैं और इसके लिए गांव के स्वरूप को बदलने की जरूरत नहीं थी. तो आइए जानते हैं कि क्या धनोरा और उसकी किस्मत बदलने वाले अधिकारी डॉ. सत्यपाल सिंह मीणा की.

कौन हैं सत्यपाल सिंह मीणा
सत्यपाल सिंह मीणा इस वक्त इंदौर में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अडीशनल डायरेक्टर हैं. सत्यपाल सिंह का जन्म धनौरा गांव में ही हुआ था. उन्होंने अपना बचपन इसी गांव में गुजारा. सत्यपाल सिंह कहते हैं कि सिविल सर्विस ज्वाइन करना कभी मेरा लक्ष्य नहीं था. फिर मैंने बाद में इस सर्विस की ताकत समझी. पढ़ाई के दौरान ही मैंने गांव और शहरों के बीच का फासला समझ लिया था. मैं इस गैप को खत्म करना चाहता था. और शायद यही वजह  है कि मैंने इसके लिए धनोरा को चुना.


कैसे की शुरुआत


2015 के पहले तक धनोरा गांव में न सड़क थी, न ही शौचालय. दिखते थे तो कुछ पुराने पक्के मकान, जो इतने जर्जर कि कभी भी ढह जाएं. एक अति पिछड़े गांव की तस्वीर बयान करता था धनोरा. लेकिन फिर धीरे-धीरे यहां के लोगों को समझाने का काम शुरू किया सत्यपाल सिंह मीणा ने. उन्होंने सिस्टम बदलने के लिए गांव के लोगों के बीच सोच बदलो, गांव बदलो का नारा चलाया. गांव के लोगों को ही इस बदलाव के लिए वॉलंटियर के रूप में तैयार किया. सत्यपाल सिंह कहते हैं कि लक्ष्य ये था कि इस मॉडल को मूवमेंट में बदला जाए जिसमें गांव वाले खुद अपनी जिम्मेदारी समझें. गांव को आत्मनिर्भर बनाया जा सके. हमने गांव में तकरीबन 3 हजार वॉलंटियर लगाए जिससे सभी योजनाओं का कार्यांवयन किया जा सके.

अब कैसी हैं गांव की तस्वीर
बदलाव के बाद अब धनौरा गांव में कम्यूनिटी हॉल, चौड़े रास्ते, सभी घरों में टॉयलेट बने हैं. इन्हें इंस्पेक्शन चेंबर और मेन होल्स के जरिए लगभग दो किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइन से जोड़ा गया है. यहां मानव निर्मित तीन किलोमीटर नहर बनाई गई है, जिसे 8 परकोलेशन टैंक के माध्यम से जोड़ा गया है. गलियों में रोशनी के लिए जगह-जगह पर सोलर लाइटें लगाई गई हैं. स्कूल में बच्चियों के लिए आधुनिक शौचालय बनाए गए हैं. यहां बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा देने की व्यवस्था भी की गई है. गांव की डिजिटल मैपिंग भी करवाई गई है. जिससे यह पता चलता है कि गांव की जमीन का ढलान किस तरफ है. इससे यहां सीवर डालने में आसानी हुई. डिजिटल मैपिंग के आधार पर यहां कंकरीट की सड़कें भी बनाई गई हैं.



आगे भी बदलना चाहते हैं तस्वीर
अब धनोरा गांव की तरह सत्यपाल मीणा दूसरे गांवों की तस्वीर भी बदल रहे हैं. सोच बदलो गांव बदलो अभियान के तहत अब वो अन्य गांवों में बदलाव लाने की कवायद कर रहे हैं. वो कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि हम अपना पूरा मॉडल हर गांव में लागू कर रहे हैं. जिस गांव में जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस बात पर सबसे पहले ध्यान दिया जाता है.

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