चीन में दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना, कैसे होगी और क्यों है अहम?

चीन में जनगणना 2020 की कवायद शुरू हो गई है.
चीन में जनगणना 2020 की कवायद शुरू हो गई है.

दस साल में एक बार होने वाली जनगणना (China Census 2020) इस बार 'डिजिटल' होने जा रही है. 'एक बच्चे' (One Child Policy) वाले नियम में हुए बदलाव के असर का खुलासा होगा. ये भी जानें कि इस जनगणना में कितना समय, श्रम और धन खर्च होता है.

  • News18India
  • Last Updated: November 3, 2020, 5:13 PM IST
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दुनिया में सबसे बड़ी आबादी (Largest Population) वाले देश में वो जनगणना शुरू हो चुकी है, जो दस साल में एक बार की जाती है. इस बार खास यह है कि इतनी बड़ी आबादी को गिनने के लिए मोबाइल एप्स (Mobile Apps) का इस्तेमाल किया जाने वाला है. पिछली बार 2010 में चीन में जनगणना (Census of China) हुई थी और तब 1 करोड़ कर्मचारी गिनती में लगे थे. पिछले आंकड़ों के मुताबिक चीन की आबादी (China Population) 1,37,05,36,875 यानी 137 करोड़ से ज़्यादा थी. इस आबादी में हांगकांग (Hong Kong) की 7,097,600, मकाउ SAR की 552,300 और ताईवान (Taiwan) की 23,162,123 आबादी भी शामिल थी.

साल 2000 की तुलना में 2010 के सेंसस में 5.8 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गई थी. अब बीते दस सालों में आबादी कहां पहुंची, किन हिस्सों में आबादी का क्या ट्रेंड रहा, यह जानने के लिए शुरू हुई जनगणना प्रक्रिया में इस बार करीब 70 लाख सामुदायिक कर्मचारियों को डोर टू डोर जाकर डेटा जुटाने का काम सौंपा गया है, जो मेनलैंड चीन से लेकर तिब्बत के पहाड़ी गांवों तक जाएंगे.

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जनगणना इसलिए महत्वपूर्ण होती है, ताकि उसके पैटर्न का विश्लेषण करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, ट्रांसपोर्ट, श्रम और अन्य सेवाओं संबंधी नीतियां और भविष्य की योजनाएं बनाई जा सकें.
कितनी महंगी पड़ती है यह जनगणना?
दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना का काम आसान नहीं होता. भारत के अलावा चीन ही एक ऐसा देश है, जहां आबादी 1 अरब से ज़्यादा है. 2010 में हुई जनगणना के लिए चीन की सरकार ने करीब साढ़े दस करोड़ डॉलर की रकम खर्च की थी. दस साल बाद अनुमान है कि इस बजट में करीब डेढ़ गुना बढ़ोत्तरी हो सकती है.

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कैसे होती है चीन में आबादी की गिनती?
चीन में एक दशक में एक बार होने वाली जनगणना में मेनलैंड के नागरिकों समेत टेंप्रेरी वीज़ा पर विदेश गए नागरिकों की भी गिनती होती है. जो विदेशी छह महीने से ज़्यादा समय से मेनलैंड में रह रहे हैं, उनका डेटा भी लिया जाता है. करीब 70 लाख कर्मचारी दो महीनों तक जनगणना का काम करते हैं और एक कर्मचारी के हिस्से में कम से कम 250 लोगों का टारगेट होता है.

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क्या है 'माइक्रो जनगणना'?
इस पूरे डेटा को जुटाने के बाद स्टैटिसटिक्स के नेशनल ब्यूरो द्वारा दो साल के भीतर आबादी संबंधी सूचना जारी की जाती है. आधिकारिक नियमावली के मुताबिक 2020 और 2030 की जनगणना के समय के बीच आबादी में होने वाले बदलावों पर निगरानी रखने के मकसद से चीन माइक्रो सेंसस भी करवाता है, जिसका मतलब सैंपल सर्वे से है यानी कुल आबादी के 1 प्रतिशत हिस्से पर सर्वे कराया जाता है.



क्यों अहम है चीन की जनगणना?
चीन में कम्युनिस्ट शासन की शुरूआत के बाद से सातवीं बार जनगणना होने जा रही है. यह इसलिए महत्वपूर्ण होती है ताकि आबादी में बदलावों और विविधताओं के गहन विश्लेषण के आधार पर नीतियां बनाई जा सकें. मिसाल के तौर पर चीन फिलहाल 14वीं पंचवर्षीय योजना पर काम कर रहा है, जो 2021 से 2025 तक लागू रहेगी. इस तरह की योजनाओं में आबादी के आंकड़ों से काफी मदद मिलती है.

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जनगणना से यह भी पता चलता है कि कौन से शहर किस तरह विकसित हो रहे हैं और कौन से 'घोस्ट टाउन' बनते जा रहे हैं यानी उजड़ रहे हैं. कई तरह की नीतियों के लिए शहरों की स्ट्रेंथ के आंकड़े जनगणना से मिलते हैं. इसके अलावा, वार्षिक जन्मदर, मृत्यु दर, अकादमिक गतिविधियों और माइग्रेशन संबंधी अनुमान भी जनगणना से मिलते हैं.

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चीन में बूढ़ों की आबादी के आंकड़ों पर फोकस किया जाने वाला है.


इस बार कैसे अलग है जनगणना?
चीन की सातवीं जनगणना में पहली बार ऐसा हो रहा है कि लोगों के आईडी नंबर कलेक्ट किए जाने के आदेश दिए गए हैं, जिससे प्राइवेसी को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं. हालांकि सरकारी स्तर से कहा गया है कि इस तरह की सूचनाएं गोपनीय रखी जाएंगी. चीन की बड़ी टेक कंपनी टेंसेंट की मदद से तैयार की गई तकनीक के साथ इस बार जनगणना में स्मार्ट फोन और एप्स का इस्तेमाल होगा.

चीन के विभिन्न क्षेत्रों में कोरोना वायरस महामारी का असर क्या रहा, इस बार जनगणना में यह भी देखने की कोशिश की जाएगी. ये भी खबरों में कहा गया है कि कोविड 19 की हाई रिस्क वाले इलाकों में जनगणना को ध्यान में रखते हुए फोन से या ऑनलाइन डेटा जुटाने की तैयारी भी की गई है.

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इस बार की जनगणना में खास फोकस इस बात पर भी रहने वाला है कि चीन में 'एक बच्चा नीति' में बदलाव का असर आबादी पर क्या और कैसे पड़ा. रिपोर्ट्स के मुताबिक 1970 के दशक के आखिर में यह नीति लागू हुई थी, लेकिन चीन की बूढ़ी आबादी के खतरे के मद्देनज़र इस नियम को चार साल पहले 'दो बच्चे' की नीति लागू की गई थी. इस बदलाव के क्या नतीजे हुए, यह देखना खास तौर पर दिलचस्प होगा.
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