क्यों अब अंडमान को लेकर बढ़ सकता है भारत-चीन के बीच तनाव

क्यों अब अंडमान को लेकर बढ़ सकता है भारत-चीन के बीच तनाव
यहां पर मिलिट्री बेस मजबूत करने की तैयारियां तेज हो चुकी हैं

लद्दाख में भारत-चीन तनाव (border tension between India-China) कम नहीं हो सका है. इस बीच कयास लग रहे हैं कि दोनों देशों के बीच अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (Andaman& Nicobar Islands) पर भी विवाद हो सकता है. हिंद महासागर (Indian ocean) में स्थित ये द्वीप भारत का हिस्सा हैं. अब यहां मिलिट्री बेस मजबूत करने की तैयारियां तेज हो चुकी हैं.

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लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत-चीन तनाव जारी है. हालांकि चीनी सेना लगभग एक किलोमीटर पीछे चली गई है लेकिन तब भी रिलोकेशन पूरी तरह से नहीं हुआ है. माना जा रहा है गलवान घाटी में चीन के सैनिक काफी आगे बढ़ चुके थे. इस बीच चीन के आक्रामक रवैये का जवाब भारत की तरफ से भी उसी अंदाज में दिया जाना शुरू हो चुका है. चीनी एप बैन के बाद अब हिंद महासागर में भी इंडियन आर्मी खुद को मजबूती दे रही है. माना जा रहा है कि गलवान तनाव लंबे समय तक कम नहीं हो सकेगा. ऐसे में अगर युद्ध टालना हो तो भी भारत को जलमार्ग पर भी खुद को मजबूत करना होगा ताकि चीन पर दबाव बढ़े.

कैसे बन सकता है दबाव
फिलहाल चीनी व्यापार का काफी बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है. दरअसल दो दशक पहले चीन ने पक्का किया कि उसे जलमार्ग के जरिए अपनी व्यापारिक और सामरिक ताकत बढ़ानी है. जल्दी ही उसने ऐसा कर भी लिया. फिलहाल साउथ चाइना सी के जरिए चीन अपना काफी बड़ा व्यापार करता है. साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री जलमार्ग (SLOC) के जरिए भी चीन काम काफी काम चलता है. इसी के तहत हर साल चीन के ऑइल टैंकर, जहाज आदि हिंद महासागर से होकर भी निकलते हैं.

चीन ने पक्का किया कि उसे जलमार्ग के जरिए अपनी व्यापारिक और सामरिक ताकत बढ़ानी है

अब अगर भारत लद्दाख में चीन की दादागिरी का जवाब देने के लिए अंडमान के रास्ते हिंद महासागर में थोड़ी सी भी रुकावट डाल दे तो चीन परेशान हो जाएगा. इससे उसकी इंडस्ट्री पर काफी बुरा असर होगा. इससे सत्तासीन कम्युनिस्ट पार्टी जो कि साफ तौर पर भारत की दुश्मन दिख रही है, उसपर भी दबाव बनेगा कि व भारत के साथ अपने संबंध बेहतर करे.



भारत क्या तैयारियां कर रहा है?
अंडमान निकोबार में सैन्य बेस तैयार करना फिलहाल देश की प्राथमिकता में है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस बारे में काफी वक्त से प्लान चल रहा था लेकिन गलवान मामले के बाद इसमें तेजी आ गई. समुद्री मार्ग पर खुद को मजबूत करने के लिए अब Andaman Nicobar Command (ANC) को मजबूत बनाने की बात हो रही है. बता दें कि ये कमांड साल 2001 में तैयार हुई थी. यह देश की इकलौती कमांड है, जिसमें थल, वायु और नौसेना तीनों का ऑपरेशन कमांडर एक ही है. इस कमांड की 19 सालों से अनदेखी होती रही लेकिन अब चीन को समुद्र का सुपर पावर बनने से रोकने के लिए भारत सरकार इसे पुर्नगठित करने जा रही है.



कैसे लगाई जा सकेगी रोक
भारत अंडमान में इस कमांड को मजबूत कर ले तो चीन के व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता कठिन हो सकता है. साथ ही यहां से चीन की समुद्र में चल रही गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी. अगर कभी युद्ध के हालात बन गए तो चीन को भारत यहीं पर रोक सकेगा.

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सूत्रों के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया में बताया गया कि सरकार पूर्वी अंडमान के शिबपुर में नेवल एयर स्टेशन के रनवे को बढ़ाने के काम पर भी ध्यान दे रही है. साथ ही अंडमान में जंगी जहाज, फाइटर जेट और थलसेना भी तैनात हो सकती है. इसके लिए लगभग साढ़े 5 करोड़ रुपए का इंफ्रा डेवलपमेंट प्रोग्राम भी शुरू हो चुका है.

अंडमान-निकोबार में सैन्य बेस
मजबूत करना फिलहाल देश की प्राथमिकता में है


चीन को हो सकता है ये नुकसान
चूंकि हिंद महासागर में भारत का काफी बड़ा हिस्सा है इसलिए चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी यहां कोई भी गलत हरकत करने से बचेगी. साथ ही चीन की बदमाशी बढ़ने पर भारत उसके खिलाफ कॉमर्स रेडिंग भी कर सकता है.

ये एक तरह की जंग ही है, जिसमें अपनी सीमा से गुजरने वाली विदेशी जहाजों की नाकेबंदी हो सकती है. उन्हें रोककर सामान पहुंचाने में देर की जा सकती है. या फिर जहाज के माल की चेकिंग की जा सकती है. देर होने के कारण इससे व्यापार पर असर होगा. चीन चूंकि अपने कच्चे तेल का आयात और दूसरी चीजों का व्यापार इसी रूट से ही करता है इसलिए अगर भारत अपनी ताकत बढ़ाता है कि तो कभी भी चीन को इस मोर्चे पर घेरा जा सकेगा.
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