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ये उपाय कर दे सरकार तो दूर हो जाएगा दिल्ली का प्रदूषण, कम हो जाएगा जानलेवा खतरा

News18Hindi
Updated: November 1, 2019, 5:26 PM IST
ये उपाय कर दे सरकार तो दूर हो जाएगा दिल्ली का प्रदूषण, कम हो जाएगा जानलेवा खतरा
दिल्ली में कृत्रिम बारिश के ऑप्शन को टटोला जा सकता है

दिल्ली (Delhi) में प्रदूषण (air pollution) का स्तर खतरनाक हो चुका है. पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा हो चुकी है. ऐसे हालात में कृत्रिम बारिश (artificial rain) के ऑप्शन को टटोला जा सकता है...

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  • Last Updated: November 1, 2019, 5:26 PM IST
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दिल्ली (Delhi) में वायु प्रदूषण (Air Pollution) ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है. प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने हेल्थ इमरजेंसी वाले हालात पैदा कर दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट के एक पैनल ने दिल्ली एनसीआर में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी भी घोषित कर दी है. यहां पॉल्यूशन का लेवल सीवियर प्लस कैटेगरी में रखा गया है. अब राज्य सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए कई उपायों पर विचार कर रही है.

इस हालात में कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. अगर बढ़ते प्रदूषण की वजह से एयर क्वालिटी इंडेक्स 500 के पार चला जाता है तो कृत्रिम बारिश के जरिए इसे नीचे लाया जा सकता है.

कैसे होती है कृत्रिम बारिश
कृत्रिम बारिश करना एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है. इसके लिए पहले कृत्रिम बादल बनाए जाते हैं. इसके बाद सिल्वर आयोडाइड को रॉकेट या प्लेन के जरिए बादलों में मिला दिया जाता है. सिल्वर आयोडाइड प्राकृतिक बर्फ की तरह ही होती है. इसकी वजह से बादलों का पानी भारी हो जाता है और बरसात हो जाती है.

कुछ जानकार कहते हैं कि कृत्रिम बारिश के लिए बादल का होना जरूरी है. बिना बादल के क्लाउड सीडिंग नहीं की जा सकती. बादल बनने पर सिल्वर आयोडाइड का छिड़काव किया जाता है. इसकी वजह से भाप पानी की बूंदों में बदल जाती है. इनमें भारीपन आ जाता है और ग्रैविटी की वजह से ये धरती पर गिरती है.

कृत्रिम बारिश की ये प्रक्रिया बीते 50 वर्षों से उपयोग में लाई जा रही है. इसे क्लाउड सीडिंग कहा जाता है. क्लाउड सीडिंग का सबसे पहला प्रदर्शन फरवरी 1947 में ऑस्ट्रेलिया के बाथुर्स्ट में हुआ था. इसे जनरल इलेक्ट्रिक लैब ने अंजाम दिया था.

60 और 70 के दशक में अमेरिका में कई बार कृत्रिम बारिश करवाई गई. लेकिन बाद में ये कम होता गया. कृत्रिम बारिश का मूल रूप से प्रयोग सूखे की समस्या से बचने के लिए किया जाता था.
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how artificial rain can reduce pollution in delhi know full detail of cloud seeding
ऐसे होती है क्लाउड सीडिंग


चीन कर चुका है कृत्रिम बारिश का प्रयोग
चीन कृत्रिम बारिश का प्रयोग करता रहा है. 2008 में बीजिंग ओलंपिक के दौरान चीन ने इस विधि का प्रयोग 21 मिसाइलों के जरिए किया था. जिससे बारिश के खतरे को टाल सके. हालांकि हाल ही में चीन की ओर से ऐसी कोई खबर नहीं आई जिससे जाहिर हो कि वह अब भी इस विधि का प्रयोग प्रदूषण से निपटने के लिए करता है. जानकारों का कहना है कि चीन ने अब प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए क्लाउड सीडिंग बंद कर दी है.

एक जानकारी के मुताबिक क्लाउड सीडिंग का सबसे पहला प्रयोग 1946 में हुआ था. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कुछ रिसर्चर ने जुलाई 1946 में क्लाउड सीडिंग की खोज की थी. वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर के 56 देश क्लाउड सीडिंग का प्रयोग कर रहे हैं.

पिछले साल भी हुई थी कृत्रिम बारिश की तैयारी
पिछले साल भी दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने पर कृत्रिम बारिश करवाने की तैयारी की गई थी. आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए आर्टिफिशियल रेन की तैयारी कर ली थी. बस मौसम अनुकूल होने का इंतजार किया जा रहा था. आईआईटी के प्रोफेसर ने कृत्रिम बारिश करवाने के लिए इसरो से विमान भी हासिल कर लिया था. लेकिन मौसम अनुकूल नहीं होने की वजह से कृत्रिम बारिश नहीं करवाई जा सकी.

देश के कुछ हिस्सों में हो चुका है प्रयोग
कृत्रिम बारिश की तकनीक महाराष्ट्र और लखनऊ के कुछ हिस्सों में पहले ही परखी जा चुकी है. लेकिन प्रदूषण से निपटने के लिए किसी बड़े भूभाग में इसका प्रयोग नहीं हुआ है.

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कृत्रिम बारिश का प्रयोग देश के कुछ हिस्सों में हो चुका है


भारत में क्लाउड सीडिंग का पहला प्रयोग 1952 में हुआ था. ये अब तक जारी है. लेकिन भारत में क्लाउड सीडिंग का प्रयोग सूखे से निपटने और डैम का वाटर लेवल बढ़ाने में किया जाता रहा है. कुछ जानकारों का मानना है कि प्रदूषण की समस्या से निपटने में ये विधि कारगर नहीं है. जानकार बताते हैं कि क्लाउड सीडिंग के जरिए आर्टिफिशियल रेन के जरिए प्रदूषण का स्तर ज्यादा कम नहीं किया जा सकता. अगर प्रदूषण के कारक काम करते रहेंगे तो सिर्फ कृत्रिम बारिश से इसे कम करना मुश्किल है.

पिछले साल आईआईटी के प्रोफेसरों ने बताया था कि मॉनसून से पहले और इसके दौरान कृत्रिम बारिश कराना आसान होता है. लेकिन सर्दियों के मौसम में ये आसान नहीं होती. क्योंकि इस दौरान बादलों में नमी की मात्रा ज्यादा नहीं होती.

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First published: November 1, 2019, 4:34 PM IST
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