साथी हों या विरोधी, कैसे जेटली को मिलता रहा सबका प्यार-सबका साथ?

अरुण जेटली जयंती विशेष.

Arun Jaitley Birth Anniversary : चाहे अटल बिहारी सरकार (Vajpayee Govt) रही हो या मोदी सरकार (Modi Govt), जेटली का सम्मान और कद हमेशा खास रहा. भाजपा हो या विरोधी पार्टियां, आड़े वक्त सबने जेटली (Arun Jaitley) को समर्थन देने में कसर नहीं छोड़ी. जानें जेटली का ये कैसा करिश्मा था.

  • Share this:
    छह साल पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) में इस बात को लेकर बहस जारी थी कि चुनावों में प्रधानमंत्री (Prime Minister) के चेहरे के रूप में किसका चेहरा चुना जाए, लालकृष्ण आडवाणी (LK Advani) या नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)? तब आडवाणी और मोदी दोनों जिस व्यक्ति की राय का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे, कहा जाता है वो अरुण जेटली (Arun Jaitley) थे. जेटली ने मोदी के पक्ष में राय ज़ाहिर की और आडवाणी के साथ भी उनके संबंध हमेशा अच्छे बने रहे. कभी अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) के खासों में गिने गए जेटली, पहली मोदी सरकार में बेहद ताकतवर रहे.

    अगर आपसे पूछा जाए कि पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री व भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता माधवराव सिंधिया और जदयू नेता शरद यादव के बीच में कौन सा नाम है, जो कॉमन है. आप याददाश्त पर ज़ोर डालेंगे तो याद आएगा कि अरुण जेटली जब वकालत करते थे, तो इन तीनों के लिए वकील रह चुके थे. इसी तरह, ये भी याद आएगा कि पेप्सी और कोक की गलाकाट प्रतिस्पर्धा के बीच जेटली ही पुल बने थे. आखिर जेटली सबसे अच्छे संबंध बनाए रखने में कैसे कामयाब रहे.

    ये भी पढ़ें :- क्या आपको याद है आतंकी उमद सईद शेख और पर्ल हत्याकांड?

    'मोदी सरकार' नहीं 'जेटली सरकार'!
    राजनीतिक गलियारों में 2014 के बाद ये चर्चा आम रही थी कि मोदी पीएम ज़रूर हैं, लेकिन असल में, सरकार जेटली चला रहे थे. वाजपेयी सरकार में जूनियर होने के बावजूद एक साल के भीतर कैबिनेट में जगह बनाने में सफल रहे जेटली पहली मोदी सरकार में रक्षा और वित्त दोनों मंत्रालय संभाल रहे थे. उस समय एक सर्वे में ये दावा भी किया गया था कि मोदी के बाद जेटली ही देश के दूसरे सबसे ताकतवर व्यक्ति थे. इन तमाम कारणों से उस वक्त 'जेटली सरकार' जुमला सियासी हलकों में बड़ा चर्चित था.

    Arun jaitley facts, Arun jaitley death, Arun jaitley and modi, Arun jaitley and advani, Arun jaitley biography, अरुण जेटली फैक्ट्स, अरुण जेटली निधन, अरुण जेटली और मोदी, अरुण जेटली और आडवाणी, अरुण जेटली जीवनी
    नरेंद्र मोदी के साथ अरुण जेटली.


    दो नावों में साथ-साथ
    जेटली के बारे में ऐसा इसलिए कहा जाता रहा क्योंकि उन्होंने दो विरोधी विचारधाराओं के साथ गज़ब का सामंजस्य बना रखा था. इमरजेंसी के दौर के बाद वो भाजपा से जुड़े थे और उनकी सियासी शुरूआत अखिल ​भारतीय विद्यार्थी परिषद के दायित्व के साथ हुई थी. लेकिन, दूसरी पार्टियों और उनके नेताओं के साथ भी जेटली के संबंध मधुर रहे. इसी का नतीजा था कि जनता दल सरकार में वीपी सिंह ने जेटली को एएसजी यानी एडिशनल सॉलिसिटर जनरल का दायित्व सौंपा था.

    ये भी पढ़ें :- केरल में कैसे स्टूडेंट्स को हाथ आ रही है सिस्टम की चाबी?

    विकिलीक्स बवाल के बाद भी रहे महफूज़
    जेटली का नाम विकिलीक्स विवादों में तब आया था जब एक राजनयिक के बयान के आधार पर कहा गया था कि जेटली ने भाजपा के 'हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद' को अवसरवादी करार दिया था. इस बयान ने ज़रा देर में ही विवाद का रूप ले लिया था और कई लोगों ने तात्कालिक टिप्पणी कर जेटली को कठघरे में खड़ा किया था.

    यहां तक कि संघ ने भी जेटली पर आंखें तरेरी थीं. इसके बावजूद जेटली का भाजपा से कोई बाल बांका नहीं कर सका. कुछ ही समय में जेटली के साथ ही भाजपा खड़ी दिखाई दी और कहा गया कि जेटली के नाम से जारी किया गया यह बयान मनगढ़ंत था.

    Arun jaitley facts, Arun jaitley death, Arun jaitley and modi, Arun jaitley and advani, Arun jaitley biography, अरुण जेटली फैक्ट्स, अरुण जेटली निधन, अरुण जेटली और मोदी, अरुण जेटली और आडवाणी, अरुण जेटली जीवनी
    28 दिसंबर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की जयंती है.


    जब दिग्विजय ने किया बचाव
    ये बात बहुत पुरानी नहीं ​है, जब अरविंद केजरीवाल ने अपना सियासी सफर शुरू करने के दौरान जेटली पर हमला बोला था. आम आदमी पार्टी नेता ने दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन में रहते हुए जेटली पर अनियमितताओं के आरोप लगाए थे. लेकिन, उस वक्त केजरीवाल को भी जेटली के कद का अंदाज़ा नहीं था, जो जल्द ही हुआ.

    ये भी पढ़ें :- ताकि याद रहे 2020... अपनी रोशनी छोड़ गए शब्दों के ये चिराग

    पहले तो कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने जेटली पर उंगली उठाई लेकिन बाद में, उन्होंने कहा कि केजरीवाल अगर सबूत दे सकते हैं तो दें, वरना आरोप लगाने से बचें. इसके साथ ही, इस मामले में वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर और विराट कोहली जैसे दिग्गज क्रिकेटर भी जेटली के बचाव में आए थे और आखिरकार मोदी ने भी जेटली का पूरा साथ दिया था.

    तो क्या था सबके साथ का राज़
    जेटली उन गिने-चुने नेताओं में शुमार रहे हैं, जिन्हें समर्थकों और विरोधियों का बराबर साथ या समर्थन मिलता रहा. जिन समाचार चैनलों को भाजपा का विरोधी भी माना जाता रहा, उनमें से भी कई ने मौके पर जेटली के समर्थन में कवरेज दिया. सियासी हलकों में कहा जाता था कि सोनिया गांधी का मीडिया मैनेजमेंट बेहद ज़बरदस्त था. मीडिया ने शायद ही कभी सोनिया गांधी के खिलाफ कोई मुहिम छेड़ी हो. लेकिन, अगर आप गौर करें तो यही बात जेटली के लिए भी सटीक रही.

    Arun jaitley facts, Arun jaitley death, Arun jaitley and modi, Arun jaitley and advani, Arun jaitley biography, अरुण जेटली फैक्ट्स, अरुण जेटली निधन, अरुण जेटली और मोदी, अरुण जेटली और आडवाणी, अरुण जेटली जीवनी
    नेटवर्क 18 क्रिएटिव.


    एक बार अरुण शौरी ने मज़ाक में कहा था 'जेटली सिर्फ 6 लोगों के जननेता हैं'. यह कटाक्ष चुनिंदा मीडिया समूह मालिकों के साथ जेटली के संबंधों को लेकर था. लेकिन जेटली ने हर वर्ग में इतने मज़बूत संबंध बनाए थे कि कठिन समय पर हमेशा काम आए. केजरीवाल के आरोपों के बाद ट्विटर पर जब उनके खिलाफ हैशटैग भी चले तो किसी अंजाम तक नहीं पहुंच सके और उनके समर्थन में छिड़ी सोशल मीडिया मुहिम भारी पड़ी.

    ये भी पढ़ें :- अब तक कितने देशों में फैल चुके हैं कोरोना के नए स्ट्रेन?

    अब अच्छा मीडिया रिलेशन कहा जाए या मैनेजमेंट, जेटली का करिश्मा यही था कि वह सबके चहेते बने रहे.

    (यह लेख 24 अगस्त 2019 को प्रकाशित किया गया था, जिसे प्रासंगिक होने के चलते कुछ संशोधनों के साथ पुनर्प्रकाशित किया गया है.)