वीडियो-अंतरिक्ष में कैसे खाते और सोते हैं एस्ट्रोनॉट, पीते हैं खुद का रिसाइकल किया मूत्र

वीडियो-अंतरिक्ष में कैसे खाते और सोते हैं एस्ट्रोनॉट, पीते हैं खुद का रिसाइकल किया मूत्र
स्पेेस सेंटर पर मौजूद एस्ट्रोनॉट्स लंबा समय वहां बिताते हैं. धरती से कई महिनों का खाना एक साथ उनके पास पहुंच जाता है

पिछले रविवार को स्पेस एक्स रॉकेट से जुड़ा एक शटल दो अंतरिक्ष यात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक पहुंचाने में कामयाब रहा. ये वहां महीनों बिताएंगे. क्या आपको मालूम है कि वहां अंतरिक्ष यात्री कैसे खाते-पीते और सोते हैं. पानी यहां बहुत कीमती होता है लिहाजा उन्हें अपना रिसाइकल किया हुआ मूत्र पीना होता है

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हाल ही में स्पेस एक्स के ताकतवर रॉकेट से जुड़े कैप्सुल के जरिए अमेरिका के दो अंतरिक्ष यात्री सफलता से इंटरनेशनल स्पेश स्टेशन तक पहुंच गए. अब वो यहां कई महीनों तक रह कर अपने प्रयोग करेंगे कभी सोचा कि किस तरह अंतरिक्ष यात्री वहां महीनों रहते हैं. इस दौरान वो सोते और खाते-पीते हैं. आप जिस तरह धरती पर आराम से सोते हैं और खाना गरम करके तरह-तरह के व्यंजनों का स्वाद लेते हैं, वैसा कुछ भी स्पेस स्टेशन में नहीं होता. सबसे हैरान करने वाली बात ये भी है कि स्पेस में पानी इतना कीमती होता है कि उन्हें खुद का रिसाइकल किया हुआ मूत्र पीना होता है.

मोटे तौर पर अंतरिक्ष में एक प्लेटफॉर्म बनाया गया है, उसे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के नाम से जानता है. ये स्पेश स्टेशन लगातार पृथ्वी की परिक्रमा भी करता है. इसे कई देशों ने मिलकर बनाया है. स्पेस स्टेशन के मुख्य तौर पर दो हिस्से हैं.

एक हिस्से में रूस के साइंटिस्ट या एस्ट्रोनॉट्स रहते और अपने प्रयोग करते हैं. दूसरा हिस्सा संयुक्त रूप से अमेरिका, जापान और कनाडा का है. इस प्लेटफॉर्म में उनके सोने से लेकर प्रयोग करने की अलग जगहें होती हैं.



एक रूसी रॉकेट ने इसे 1998 में लांच किया. अगले दो सालों में इस स्टेशन को तैयार कर लिया गया. 02 नवंबर 2000 पहला दल यहां पहुंचा. इस तरह ये अंतरिक्ष में रहने और प्रयोग की जगह बन गया. इसमें कुछ 06 लोग रह सकते हैं. तीन रूसी हिस्से में और तीन अमेरिकी हिस्से में. इसी अनुसार इस पर सोने और खाने की जगह तय की गई है.



कैसे सोते हैं
आप अगर वीडियो में देखें तो पाएंगे कि इसमें हर अंतरिक्षयात्री के सोने के लिए एक छोटा सा कमरा तय रहता है. चूंकि अंतरिक्ष स्टेशन में भारहीनता की स्थिति रहती है यानि गुरुत्वाकर्षण काम नहीं करता. लिहाजा यहां अंतरिक्षयात्री ज्यादातर काम एक जगह से दूसरी जगह तक हवा में तैर कर करते हैं.सोने के लिए भी वो अपने वर्क प्लेस से अपने इस कक्ष में पहुंचते हैं. अपने व्यक्तिगत सामान वगैरह अंतरिक्ष यात्री इस कमरे में रखते हैं.



सोने से पहले की तैयारी
हर अंतरिक्ष यात्री के छोटे से कमरे में ट्रेन की एक बर्थ सी होती है. इससे पहले उसको खासतरह के स्लिपिंग बैग में खुद को बंद करके इस बर्थ पर अटैच करना होता है. अटैच करने का मतलब बर्थ के तय प्वाइंट्स से खुद को बांधना होता है ताकि सोते समय वो एक जगह से दूसरी जगह नहीं तैरे बल्कि फिक्स होकर लेटा रहे.

कितने घंटे सोते हैं.
इस वीडियो में सोने के संबंध में जानकारी देने वाले अंतरिक्षयात्री का नाम क्रिस हैडफील्ड है. वो अपने बारे में बताते हैं कि वहां उनके लिए तीन से चार घंटे की नींद पर्याप्त होती है. इसके बाद वो उठते हैं और नित्यकर्म करते हैं. उस सबकी इस स्पेस स्टेशन में खास व्यवस्था हैं.

मूत्र रिसाइकल होता है
यूनिवर्सल टूडे के अनुसार, बेशक आपको विचित्र लगे कि यहां मूत्र करने से लेकर हर तरह के इस्तेमाल किये पानी को रिसाइकल करके फिर पीने लायक बनाया जाता है. एक बार इस्तेमाल हो चुका पानी खास नलियों के जरिए रिसाइकिलिंग मशीनों के पास पहुंचता है. रिसाकल किए हुए पानी का दोबारा इस्तेमाल होता है. इसे पिया भी जाता है.

प्युरीफाई मूत्र पीना होता है
थरती से स्पेस स्टेशन तक पानी ले जाना बहुत महंगा और मुश्किल है. ऐसा नहीं है कि धरती से वहां तक पानी ले जाया नही जाता लेकिन वो एक सीमित मात्रा में ही होता है. चूंकि अंतरिक्षयात्रियों को कहीं बाहर से और कोई पानी नहीं मिलता है. इसलिए उन्हें रिसाकल वाटर को ही बार बार इस्तेमाल में लाना होता है, वो इसको पीते भी हैं.
वर्ष 2009 में नासा ने स्पेस सेंटर में वाटर रिकवरी सिस्टम लगाया. तब से एस्ट्रोनॉट्स अपने ही मूत्र रिसाइकल किए जाने के बाद पीते रहे हैं. उन्हें इसमें कोई दिक्कत भी नहीं होती है क्योंकि ये रिसाइकल करने के बाद एकदम शुरू और बेहतर हो जाता है.

पॉटी और टॉयलेट के लिए भी होती है जगह
पॉटी और टॉयलेट जाने के लिए एक कक्ष होता है. पॉटी करने के लिए फ्लस सीट के साथ खुद अटैच करना होता है, उसी मूत्र करने के लिए व्यवस्था होती है. इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि पानी का कोई भी कतरा हवा में नहीं आए, अन्यथा ये हवा में तैरने लगेगा.


ब्रेकफास्‍ट और खाना
सुबह फ्रेश होने के बाद बारी आती है ब्रेकफास्‍ट की तो यहां खास तरह की स्टैंड्स में रखा होता है. जिसे खोलकर उसे निकालना होता है. खाने में अंडे, मीट सब्‍जियां, ब्रेड, स्‍नैक्‍स जैसी सभी वैराइटी मिलेगी. आमतौर पर ये खाना नासा खुद तैयार कराती है. रूस और जापान के एस्ट्रोनॉट्स का खाना उनके देशों से पैक होकर आता है.
इसे गर्म करने के लिए माइक्रोवेव ओवन होते हैं. जिसमें खाना गर्म कर लिया जाता है. यहां सबकुछ डिहाइड्रेटेड और पैक्ड होता है. स्पेस स्टेशन में खाना इतना पर्याप्त होता है कि महीनों काम चलता रहता है. यहां खाना खराब नहीं होता है.

नासा कुछ महीनों बाद खासतौर पर खाने के बहुत कुछ एक खास तरीके से तैयार करके स्पेस स्टेशन पर भेजता है.

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