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अंतरिक्ष में हार्ट अटैक जैसी स्थिति में एक दूसरे को कैसे बचाएंगे एस्ट्रोनॉट्स

अंतरिक्ष (Space) में हार्ट अटैक (Heart Attack) की आपात स्थिति की संभावना हो सकती है इसकी लिए शोधकर्ताओ ने तकनीक सुझाई है.
अंतरिक्ष (Space) में हार्ट अटैक (Heart Attack) की आपात स्थिति की संभावना हो सकती है इसकी लिए शोधकर्ताओ ने तकनीक सुझाई है.

अंतरिक्ष में हार्ट अटैक (Heart) की स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों (Astronauts) को खास तरह की CPR तकनीक का उपयोग करना होगा जो पृथ्वी (Earth) पर उपयोग में लाई जाने वाली CPR तकनीक से काफी अलग है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 5:30 PM IST
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अगर आपको यह लगता है कि अंतरिक्ष यात्राएं (Space travel) केवल विशेषतौर पर ट्रेनिंग दिए गए एस्ट्रोनॉट्स (Astronauts) के लिए ही है तो यह सही नही है. अंतरिक्ष का क्षेत्र एक उद्योग पर विकसित हो रहा है और आने वाले समय में अंतरिक्ष पर्यटन (Space Tourism) एक बड़ा उद्योग होगा जिसमें हर तरह के लोग यात्रा करेंगे. इसका मतलब यह भी है कि एक समय आएगा जब लोग अंतरिक्ष हमारे अस्पतालों से लाखों किलोमीटर दूर दिल की बीमारी (Heart Trouble) संबंधी समस्या से जूझ सकते हैं. ऐसे में पृथ्वी (Earth)पर लोगों की जान बचाने वाली  सीपीआर तकनीक (CPR Technique) भी बदल जाएगी.

क्या है ये सीपीआई
सीपीआई यानि कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (Cardiopulmonary resuscitation) उस आपात स्थिति में उपयोग लाई जाने वाली तकनीक है जब किसी व्यक्ति को अचानक ही दिल का दौरा पड़ता है. ऐसे में दूसरा व्यक्ति उस व्यक्ति को दिल पर दबाव देने के साथ उसे अपने मुंह सांस देता है जिससे उसका दिल फिर से धड़कने लगता है. लेकिन इसी तरह का उपचार अंतरिक्ष में देना संभव नहीं है.

अभी तक नहीं पैदा हुए थे ऐसे हालात के मौके
स्पेस मेडिसिन के विशेषज्ञ प्रोफेसर योफेन हिंकेलबेन का कहना है कि अभी तक किसी को अंतरिक्ष में हार्ट अटैक तो नहीं आया है, लकिन अभी तक केवल फिट एस्ट्रोनॉट ही अंतरिक्ष में गए हैं और वह भी कुछ ही समय के लिए.



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अब अंतरिक्ष उद्योग (Space Industry) को पर्यटन (Tourism) के स्तर पर लाने के प्रयास होने लगे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)






अब बदलने वाला है सब
लेकिन अब अंतरिक्ष अभियान लंबे होने वाले हैं, मंगल और सुदूर अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी तो हो ही रही है, लेकिन चंद्रमा पर भी लंबे समय के लिए ठहरने की तैयारी हो रही है. चंद्रमा और मंगल पर तो बस्तियां भी बसाने की तैयारी शुरू हो चुकी है और अंतरिक्ष पर्यटन अब साइंस फिक्शन के शब्दकोश से गायब होने वाला है.

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बढ़ रहे हैं अंतरिक्ष में आपातकाल चिकित्सा पर शोध
इन हालातों में अगर अंतरिक्ष में आपातकालीन चिकित्सा पद्धतियों पर शोध बढ़ते जा रहे हैं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए. हाल ही में  जर्मन सोसाइटी ऑफ एविएशन एंड स्पेस मेडिसन के उपाध्यक्ष प्रोफेसर योफेन हिंकेलबेन और उसनके साथ स्टीफन केर्कहॉफ ने अंतरिक्ष में सीपीआर संबंधी नया शोध किया है.

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लंबी अंतरिक्ष यात्राओं (long space travels) केशुरू होने से हार्ट अटैक (Heart Attack) जैसी आपात स्थितियों की संभावना अब बढ़ सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


अंतरिक्ष में भी पड़ सकती है CPR जैसी तकनीक की जरूरत
इस अध्ययन में योफेन ने यह बताया है कि यदि किसी को अंतरिक्ष में कार्डियाक अरेस्ट का सामना करना पड़े तो उसे कैसे सीपीआर देना चाहिए. प्रोफेसर योफेन हिंकेलबेन का कहना है कि मंगल जैसी यात्रा के दौरान अगर किसी आपात स्थिति में किसी यात्री को इलेक्ट्रिकल स्ट्रोक, ट्रूमा या फिर इटॉक्सिकेशन जैसे हालात का सामना करना पड़े तो  उन हालात में हृदयाघात की पूरी संभावना होती है.

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पांच तकनीक
यह पद्धति पृथ्वी से काफी अलग हो जाती है. अंतरिक्ष में पांच तकनीकें हैं जिनका उपयोग हो सकता है. इनमें से दो में स्ट्रैप का उपयोग होता है जो मरीज और उसे सीपीआर देने वाले को जोड़े रखता है. इन्हें क्रू मेडिकल रिस्ट्रेंट सिस्टम कहते हैं. इसके अलावा तो एविट्स रूसोमोनो तकनीक है और एक रिवर्स बियरहग तकनीक है.  ये तीनों माइक्रोग्रेविटी में बहते हुए किया जा सकता है.
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