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जानिए किस तरह केला खाना डायबिटीज में है उपयोगी

केला एक प्रकार के स्टार्च और फाइबर से भरपूर होता है, जिसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स की मात्रा बेहद कम होती है, जिससे यह पचने में काफी ज्‍यादा समय लेता है
केला एक प्रकार के स्टार्च और फाइबर से भरपूर होता है, जिसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स की मात्रा बेहद कम होती है, जिससे यह पचने में काफी ज्‍यादा समय लेता है

केले में फाइबर और स्टार्च होता है, जो पाचन को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शूगर का स्तर नियंत्रित रहता है

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 23, 2018, 1:35 PM IST
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अगर आपको डायबिटीज है तो ये जरूरी है कि ब्लड शूगर का लेवल नियंत्रित रखा जाए. डायबिटीज में आमतौर पर फलों और सब्जियों के साथ संतुलित और कम खाना खाने की सलाह दी जाती है. आमतौर पर माना जाता है कि केला नहीं खाना चाहिए लेकिन हालिया शोध कहती हैं केला खाएं लेकिन ये देखकर कि वो कितना पका है और किस आकार का है.

केले में दो ऐसे तत्व होते हैं, जो इसे खाने पर ब्लड शूगर को कंट्रोल में रख सकते हैं, बशर्ते ये देखें कि केला कितना पका है और इसका आकार कितना बड़ा है. केला अच्छा फल होने के बावजूद कार्बोहाइड्रेट और शूगर दोनों ही ज्यादा मात्रा में होते हैं, ये दोनों ऐसी चीजें हैं, जो ब्लड शूगर का स्तर बढ़ाती हैं. लेकिन इसमें फाइबर और स्टार्च भी होता है जो पाचन को धीमा करता है.

कब शरीर इंसुलिन पैदा करता है
जब ब्लड शूगर गैर डायबिटिक लोगों में बढ़ता है तो शरीर इंसुलिन पैदा करता है. ये तब आपके शरीर के खून से शूगर को निकालने में मदद करता है और उन कोशिकाओं में ले जाया जाता है, जहां ये स्टोर हो या फिर इसका उपयोग किया जा सके.
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हालांकि ये प्रक्रिया तब काम नहीं करती, जबकि आपको डायबिटीज हो. तब आपकी बॉडी इंसुलिन प्रोड्यूस नहीं करतीं या फिर ऐसी इंसुलिन प्रतिरोधी कोशिकाएं नहीं बनातीं.
अगर इसे तरीके से मैनेज नहीं किया जाए तो ये उच्च कार्बोहाइड्रेट खाने में बदलकर ब्लड शूगर का लेवल बढा देगी या फिर ब्लड शूगर के स्तर को ज्यादा रखेगी और दोनों ही बातें आपके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं.

डायबिटीज की प्रतीकात्मक फोटो


केले में कितना शूगर और कितना फाइबर
केले की 93 फीसदी कैलोरी कार्बोहाइड्रेट से आती हैं. ये कार्बोहाइड्रेट शूगर, स्टार्च और फाइबर की फार्म में होते हैं.
एक मध्यम आकार के केले में 14 ग्राम शूगर और छह ग्राम स्टार्च होता है. वहीं तीन ग्राम फाइबर होता है.
केलों में फाइबर भी होता है, जो ब्लड शूगर के बनने में कमी लाते हैं.

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फाइबर क्यों लें
हर किसी को भले ही वो डायबिटिक ही क्यों ना हो, पर्याप्त मात्रा में खाने योग्य फाइबर जरूर खाना चाहिए क्योंकि इससे शरीर को लाभ पहुंचता है.
डायबिटिक लोगों के लिए भी फाइबर जरूरी है, क्योंकि ये पाचन और कार्बोहाइड्रेट को जज्ब करने की गति को धीमा कर देता है. इससे ब्लड शूगर स्पाइक्स को कम करता है और ब्लड शूगर पर कुल नियंत्रण को बेहतर बनाता है.

डायबिटीज में हरा केला लेना फायदेमंद हो सकता है


हरा केला ज्यादा उपयोगी
केले में फाइबर होने के कारण उसका शूगर भी धीरे धीरे ही पचता है और एब्जार्ब होता है, जो ब्लड शूगर स्पाइक्स को रोक सकता है. हरे केले में प्रतिरोधी स्टार्च होता है. हरे या गैर पके केले में कम शूगर और ज्यादा प्रतिरोधी स्टार्च होता है. प्रतिरोधी स्टार्च दरअसल ग्लूकोज की लंबी चैन होते हैं और जो हमारे पाचन तंत्र के ऊपरी हिस्से में पाचन में प्रतिरोधी होते हैं. इसका मतलब ये हुआ कि जो फंक्शन फाइबर करते हैं लगभग वैसा ही वो भी करते हैं और ब्लड शूगर का स्तर नहीं बढने देते.

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आंतों के लिए भी लाभदायक
इसके साथ वो आपकी आंतों में फ्रेंडली बैक्टीरिया पैदा करने में मददगार होते हैं, जो स्वास्थ्य को बेहतर रखता है और ब्लड शूगर कंट्रोल भी बेहतर रहता है.
मतलब ये है कि हरे केले डायबिटिक लोगों के लिए फायदेमंद हैं, क्योंकि उनमें प्रतिरोधी स्टार्च होते है, जो ब्लड शूगर को बढने नहीं देते और लंबे समय तक ब्लड शूगर पर नियंत्रण रखते हैं. केले का ब्लड शूगर पर प्रभाव इस पर निर्भर है कि ये कितना पका है.
पीले ये पके हुए केले में हरे के मुकाबले बहुत कम प्रतिरोधी स्टार्च होता है और शूगर ज्यादा, जो जल्दी पच जाता है और उसकी शूगर खून में एब्जार्ब हो जाती है.

डायबिटीज में जरूरी है कि आप फल और सब्जियों को मिलाकर कितनी संतुलित खुराक ले रहे हैं


केला खाते समय उसका आकार भी देखें
जब भी केला खाएं तो बड़ा केला नहीं खाएं, क्योंकि उसमें ज्यादा कार्बोहाइड्रेट होता है. आइए जानते हैं कि किस आकार के केले में कितना हाइड्रोकार्बन होता है.

ज्यादा छोटा केला (छह इंच या छोटा)           - 18.5 ग्राम
छोटा केला (6-7 इंच)                                    - 23 ग्राम
मध्यम केला ( 7- 7.9 इंच)                              - 27 ग्राम
बड़ा (8-8.9 इंच)                                            - 31 ग्राम
ज्यादा बड़ा ( 09 इंच या ज्यादा)                      - 35 ग्राम
अगर आपको ब्लड शूगर नहीं बढने देना है तो केले के आकार को लेकर ध्यान जरूर रखें. बड़ा केला, जिसमें ज्यादा हाइड्रोकार्बन होता है, उसको खाने से ब्लड शूगर ज्यादा बढेगा.

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कैसी खुराक डायबिटिक मरीजों को लेनी चाहिए
डायबिटीज में ज्यादातर खाने की गाइडलाइंस संतुलित खुराक के बारे में कहती हैं, जिसमें फल भी हों. फल और सब्जियां खाने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है और बीमारियों का खतरा कम रहता है, खास हृदय से जुड़ी बीमारियों और कुछ तरह के कैंसर.

डायबिटीज होने के बाद इस तरह की बीमारियों का खतरा भी ज्यादा रहता है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में फल और सब्जियां खाना जरूरी है. शूगर के कोई रिफाइंड प्रोडक्ट मसलन केक या कैंडीज खाने से बेहतर है कि केला खाएं, जो आपको फाइबर, एंटीआक्सीडेंट्स, विटामिन और मिनरल्स देगा. केला खासतौर पर फाइबर, पोटैशियम, विटामिन बी6 और विटामिन सी देता है. उनमें एंटीऑक्सीडेंट और लाभदायक कंपाउंड भी होते हैं.
डायबिटीज के ज्यादातर लोगों के लिए फल (केला सहित) हेल्दी च्वाइस हैं. हां, ये ध्यान रखें कि जब आप केला खा रहे हों तो उसका पकापन और आकार जरूर देखें.

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