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कोरोना संक्रमण के एक महीने बाद अगर दांत हिलने लगें तो क्यों ना लें हल्के में

ब्लैक फंगस पर प्रतीकात्मक तस्वीर.

ब्लैक फंगस पर प्रतीकात्मक तस्वीर.

Black Fangus In Upper Jaw : भारत में कोरोना संक्रमण (Covid Infection) के बाद जो खतरनाक बीमारी सामने आई वो ब्लैक फंगस की ...अधिक पढ़ें

    अगर आप एक महीने से पहले कोरोना से गंभीर रूप से संक्रमित हुए हों. आपका डायबिटीज भी अनियंत्रित हो तो ऐसे में अगर आपको कोई दांत हिलता हुआ महसूस हो और फिर दूसरे दांत भी हिलें तो इसे हल्के में कतई नहीं लें. ये ब्लैक फंगस अटैक भी हो सकता है. भारत में जिन तीन तरह का ब्लैक फंगस बीमारी के तौर पर फैल रहा है, उसमें जबड़े वाला ब्लैक फंगस भी है. जो कम खतरनाक नहीं है.

    दरअसल ये बात गाजियाबाद और देश के कई हिस्सों में ब्लैक फंगस के ताजा मामलों में इससे जबड़ों के संक्रमित होने के बाद सामने आ रही है. आमतौर पर ब्लैक फंगस ऊपरी जबड़े में अटैक करता है और इस तरह फैलने लगता है कि उसके दांत और हड्डियों को गला देता है. इसके चलते ऊपरी जबड़ा निकालना पड़ जाता है.

    डॉक्टरों का कहना है कि अगर आप कुछ समय पहले कोरोना से ज्यादा संक्रमित हुए हों तो आपके ऊपर इसका खतरा ज्यादा होता है. पहले ये माना गया था कि ब्लैक फंगस बीमारी के तौर पर भारत में ही जगह बना रहा है लेकिन अब ब्रिटेन में कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के फैलने के बाद वहां भी ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे हैं.

    जबड़े में ब्लैक फंगस होने के बाद बचने की संभावना कितनी
    डॉक्टरों के अनुसार अगर जबड़े में ब्लैक फंगस हमला हुआ है तो इसका इलाज लंबा और करीब 45 दिनों तक चलने वाला है. लेकिन इसमें बचने की संभावना 70 फीसदी से ज्यादा होती है. सबसे ज्यादा खतरनाक तब होता है जबकि ये फंगस दिमाग में पहुंच जाए. तब बचने की संभावना 05 फीसदी ही रह जाती है. भारत में आंखों में ब्लैक फंगस होने के मामले ज्यादा सामने आए हैं. इसमें बचने की गुंजाइश 50 फीसदी होती है.

    news18
    कोरोना के डेल्टा वेरिएंट का रिश्ता ब्लैक फंगस से लग रहा है. इस वेरिएंट के संक्रमण के बाद आमतौर पर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत कमजोर हो जाती है और तब ब्लैक फंगस को शरीर में हमला करने में मदद मिलती है. वैसे इसका खतरा अनियंत्रित शुगर के मरीजों को ज्यादा है. (फोटो सौ. न्यूज18 इंग्लिश)


    कैसे पता लगता है
    अगर आप कोरोना से संक्रमित हुए हैं तो इसका पता इसके एक महीने बाद लगता है. जबड़े के जो नए मामले सामने आए हैं, उसमें पहले दांत हिलना शुरू हुआ. फिर दूसरे दांत भी हिलने लगे. इसके बाकी लक्षण इस तरह हैं

    - अगर आपको नाक में दिक्कत महसूस हो
    - सिरदर्द रहने लगे
    - चेहरे के एक हिस्से में दर्द महसूस हो या सूजन आ जाए
    - चेहरा सुन्न भी पड़ सकता है
    - चेहरे का रंग बदल सकता है
    - पलकें सूजने लगें
    - सांस लेने में दिक्कत होगी
    - खांसने में खून आएगा
    - धुंधला नजर आएगा

    क्या ये आमतौर पर डायबिटीज वालों को ही निशाना बनाता है
    -अगर आप कोरोना से पीड़ित हो चुके हैं और अनियंत्रित शुगर के शिकार हैं यानि आपके शरीर में ब्लड शुगर 700 या इससे ऊपर पहुंचे तो ये ब्लैक फंगस के लिए न्योता दे देगा. अगर ब्लड शुगर 300-400 के आसपास हो तो भी ब्लैक फंगस का खतरा रहेगा लेकिन ये धीरे धीरे फैलेगा. ये दरअसल कैंसर की तरह है. अगर शरीर में इसका एक कण भी हो तो ये फैलने लगता है. जिन हिस्सों में फैलता है, उसे गला देता है. संक्रमित हिस्से को निकालना पड़ता है.

    ब्लैक फंगस क्या है?
    ब्लैक फंगस संक्रमण कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों को ही होता है. अब चूंकि कोरोना के हमले के कारण बहुत से लोग कमजोर हो चुके हैं तो ऐसे में ये फंगल इंफेक्शन भी बढ़ा. जबकि पहले ये बीमारी कीमोथेरेपी, अनियंत्रित शुगर, किसी भी तरह के ट्रांसप्लांट से गुजरने वाले लोगों और बुजुर्गों को ज्यादा प्रभावित करती थी.

    black fungus
    ब्लैक फंगस बीमारी म्यूकॉरमाइसाइट्स नामक फफूंद से होती है- सांकेतिक फोटो


    क्या ये हमारे आसपास हमेशा रहता है
    डॉक्टरों ने बताया कि ब्लैक फंगस वातावरण में मौजूद है. खासकर मिट्टी में इसकी मौजूदगी ज्यादा होती है. यह स्वस्थ और मजबूत इम्यूनिटी वाले लोगों पर अटैक नहीं कर पाता है और जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है उन्हें यह अपना शिकार बनाता है.

    ब्रिटेन में भी अब कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के संक्रमण के बाद ब्लैक फंगस के काफी मामले सामने आ रहे हैं. वहां भी डॉक्टर इसी निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि जिसके शरीर का प्रतिरोधक तंत्र कमजोर होता है, वहां से इफेक्टिव हो जाते हैं और खतरा बनते हैं.

    इस तरह होता है संक्रमण
    बीमारी म्यूकॉरमाइसाइट्स नामक फफूंद से होती है. ये फफूंद नाक से होते हुए शरीर के बाकी अंगों तक पहुंचता है. आमतौर पर ये फंगस हवा में होता है और सांस के जरिए नाक में जाता है. कई बार शरीर के कटे या जले हुए स्थानों के इस फंगस के संपर्क में आने पर भी इंफेक्शन हो जाता है. यानी नाक इसके प्रवेश की मुख्य जगह है लेकिन ये शरीर के किसी भी अंग पर आक्रमण कर सकता है.

    क्या इसका इलाज है
    दवाइयों से इसका इलाज हो जाता है. कुछ मौकों पर सर्जरी भी करनी पड़ती है.वैेसे आमतौर पर इसके इलाज के लिए एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन दिया जाता है. 04-06 हफ्ते तक दवाइयां लेनी पड़ती हैं. गंभीर मामलों में 03 महीने तक भी इलाज चल सकता है

    स्टेरॉयड किस तरह से है खतरा
    इसके अलावा ब्लैक फंगस फैलने की एक वजह स्टेरॉयड का गैरजरूरी या जरूरत से ज्यादा सेवन भी कहा जा रहा है. बता दें कि कोरोना के इलाज के दौरान स्टेरॉइड का सेवन केवल और केवल डॉक्टरों की सलाह पर ही होना चाहिए. वही तय करेंगे कि कब और कैसे और कितनी मात्रा में ये खाना चाहिए. बीमारी की शुरुआती अवस्था में स्टेरॉइड लेने पर इसका उल्टा असर होता है और कोरोना का प्रकोप तो कम नहीं होता, बल्कि स्टेरॉइड के कारण मरीज की इम्युनिटी कम जरूर हो जाती है. यही वो समय है, जब ब्लैक फंगस का संक्रमण होता है. इसके अलावा उन लोगों में इसका खतरा रहता है जो डायबिटीज या कैंसर के मरीज हों.

    Tags: Black Fungal, Black Fungus, Black Fungus Infection, Delta Variant

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