सरकार ने ऐसे कसी आर्टिकल 370 पर लगाम, इन प्रावधानों में किया संशोधन

आइए जानते हैं कि आर्टिकल 370 में केंद्र सरकार ने क्या बदलाव किया है. इस बारे में जो गजेटियर जारी किया गया है, उसमें क्या कहा गया है

News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 1:20 PM IST
सरकार ने ऐसे कसी आर्टिकल 370 पर लगाम, इन प्रावधानों में किया संशोधन
भारतीय संसद में सरकार ने इस तरह किया धारा 370 में बदलाव
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Updated: August 5, 2019, 1:20 PM IST
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में आर्टिकल ( अनुच्छेद)  370 के पहले दो उपबंधों में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया और उस पर राष्ट्रपति ने तुरंत अपनी मुहर लगा दी. इससे कश्मीर का पूरा परिदृश्य ही बदल गया है. अब ये राज्य सीधे-सीधे राष्ट्रपति की शक्तियों के तहत आ गया है. ये भी तय है कि अब इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद केंद्र सरकार को अपने हिसाब से यहां आवश्यक बदलाव की ताकत भी मिलेगी.

यहां ये बताना जरूरी है कि केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 को नहीं उठाया है, लेकिन उसके पहले और दूसरे उपबंधों में जिस तरह बदलाव किये हैं, उसके बाद राज्य से जुड़ी समस्त ताकत अब राष्ट्रपति के पास आ चुकी है. इन दो बदलावों के बाद आर्टिकल 370 का तीसरा अनुबंध फिलहाल बहुत हल्का पड़ गया है. माना जा रहा है कि पहले और दूसरे उपबंधों के प्रभाव में आने के बाद जम्मू-कश्मीर में आने वाले समय में बहुत ढेर सारे ऐसे बदलाव होने वाले हैं, जो इसके विशेष दर्जे को खत्म कर देगा.

कश्मीर के 1948 में भारत में विलय के बाद से आर्टिकल 370 इस राज्य में लागू था, जो इस राज्य को विशेष प्रावधान देता है. इसे हटाने की मांग कई दशकों से उठती रही है. जानते हैं आखिर संविधान इसके लिए क्या कहता है. दरअसल संविधान में आर्टिकल 370 के संशोधन की स्थिति पर साफ साफ कुछ नहीं कहा गया था. लिहाजा केंद्र सरकार ने इसी का लाभ उठाते हुए ये कदम उठाया है.



सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष का कहना है कि सरकार ने आर्टिकल 370 को नहीं छेड़ा है बल्कि उसके अनुबंधों में बदलाव की सिफारिश की है, क्योंकि संविधान ने आर्टिकल 370 के पहले दो उपबंधों में संशोधन को लेकर कोई व्याख्या नहीं की थी.

माना जा रहा है कि सरकार दो महीने से इस पर गहन विचार विमर्श कर रही थी. 05 अगस्त को सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय ने जो गजेटियर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जारी किया, उसमें साफ है कि 370 के खंड एक और दो में समस्त शक्तियां राष्ट्रपति के पास निहित होंगी और वो समय-समय पर जम्मू-कश्मीर में बदलाव के लिए संविधान में नए संशोधित भी कर सकते हैं. नए कानून का नाम जम्मू-कश्मीर आदेश 2019 है.


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आर्टिकल 370 में सरकार ने जो बदलाव किए हैं, उससे तय हैं कि आने वाले समय में इस राज्य को विशेष दर्जा देने वाले प्रावधानों में अभी सुधार होते रहेंगेक्या कहता था आर्टिकल 370 का उपबंध 3
आर्टिकल 370 का उपबंध 3 कहता था कि राष्ट्रपति चाहें तो अधिसूचना जारी कर आर्टिकल 370 को खत्म कर सकते हैं या उसमें बदलाव कर सकते हैं, लेकिन, ऐसा करने से पहले उन्हें राज्य सरकार से मंजूरी लेनी होगी. इस अनुबंध पर फिलहाल सरकार मौन है और अनुबंध को छेड़ा भी नहीं है.
वैसे संविधान में साफ साफ लिखा इस आर्टिकल में जो भी प्रावधान है, अगर राष्ट्रपति चाहें तो आमसूचना के जरिए ये घोषित कर सकते हैं कि वो इस आर्टिकल के निष्पादन पर रोक लगा रहे हैं या इसे सीमित कर सकते हैं या उसमें आवश्यक संशोधन कर सकते हैं. हालांकि संविधान ये कहता है कि इसके लिए उन्हें राज्य की निर्वाचित सरकार से उपबंध (2) के तहत सिफारिश मिलनी चाहिए, तभी राष्ट्रपति ऐसा कदम उठा सकते हैं.

आर्टिकल 370 के तहत कश्मीर कैसे है खास
– आर्टिकल 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है. लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित क़ानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए.
क्या है खास–



आर्टिकल 370 पर जारी अधिसूचना के उपबंध 1 और उपबंध दो में साफ कर दिया गया है कि भविष्य में राष्ट्रपति इसमें बदलाव करते रहेंगे. अब इस राज्य की समस्त ताकत राष्ट्रपति के पास निहित होंगी

कश्मीर को विशेष दर्जे से अड़चनें क्या हैं
– इसी विशेष दर्जें के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान का आर्टिकल 356 लागू नहीं होता. इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है.

आर्टिकल 370 क्या कहता है
– 1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता. सूचना का अधिकार कानून भी यहां लागू नहीं होता.
– इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कही भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है. लेकिन भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते हैं.
– भारतीय संविधान का आर्टिकल 360, जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता.
– राज्य की महिला अगर राज्य के बाहर शादी करती है तो वह यहां की नागरिकता गंवा देती है.

इसकी वजह से वहां का अपना झंडा और प्रतीक चिह्न
- आर्टिकल 370 की वजह से ही जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा और प्रतीक चिह्न भी है. हालांकि 370 में समय के साथ-साथ कई बदलाव भी किए गए हैं. 1965 तक वहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री नहीं होता था लेकिन संविधान में संशोधन के बाद इसका प्रावधान किया गया. इसकी मंजूरी तत्कालीन राज्य सरकार ने भी दे दी थी.
- पहले जम्मू-कश्मीर में भारतीय नागरिक जाता था तो उसे साथ पहचान-पत्र रखना जरूरी था, जिसका बाद में काफी विरोध हुआ. विरोध होने के बाद इस प्रावधान को हटा दिया गया.

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First published: August 5, 2019, 12:23 PM IST
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