जानिए चीन किस तरह बहुत कड़ाई के साथ अपराधियों से निपटता है

जानिए चीन किस तरह बहुत कड़ाई के साथ अपराधियों से निपटता है
चीन में समय समय पर अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाए जाते हैं ऐसेही एक अभियान की शी जिनपिंग सरकार कर रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

चीन (China) ने संगठित अपराध के खिलाफ अभियान चलाने का फैसला किया है. इस तरह के अभियान पहले भी चलाए जाते रहे हैं जिसमें बहुत अत्याचार और जुल्म होने की घटनाएं हुई हैं

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चीन (China) के बारे में कहा जाता है की वहां के कम्युनिस्ट शासन (Communist Rule) की लोगों पर कई तरह की पाबंदियां हैं. कई मामलों में वहां ऐसे प्रतिबंध हैं जिन्हें एक लोकतांत्रिक देश में स्वतः अधिकार माना जाता है. लेकिन वहां अपराधियों (Criminals) से निपटने में भी काफी सख्ती बरती जाती है. चीन में कई बार अपराधों से निपटने के लिए सख्त अभियान चलाए हैं. चीन फिर अपने देश में संगठित अपराध और अपराधियों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ एक अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है.

पहले भी चलाए जाते थे ऐसे अभियान
 इस तरह के अभियान दशकों पहले कम्युनिस्ट पार्टी चलाया करती थी. इस अभियान के दौरान बहुत सख्त कार्रवाईयां होती हैं हजारों लोगों को गिरफ्तार किया जाता है उन्हें जेल में डाल कर प्रताड़ित किया जाता है और कई लोगों को बिना कानूनी प्रक्रिया से गुजारे ही मौत के घाट उतार दिया जाता है. कई लोगों का कहना है कि इस अभियान के दौरान स्थानीय पुलिस लोगों को केवल शक की बुनियाद पर भी ‘गिरफ्तार’ कर सकती है.

इस अभियान में क्या खास
वर्तमान अभियान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के छह साल पहले शुरू किए गए उस अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है कि जो उन्होंने देश  में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए चलाया था. चीन में इस तरह के अभियान कोई नई बात नहीं हैं. कई लोगों का मानना है कि इन अभियानों के जरिए चीन का कम्युनिस्ट शासन अपने विरोधियों को खत्म करने के लिए चलाता है.



पहले कब चलाए गए ऐसे अभियान
चीन में संगठित अपराधों से निपटने या उन्हें कुचलने के लिए राजनीति से प्ररित इस तरह के अभियान 1980 के दशक से चल रहे हैं. इसमें लोगों से कानून का पालन कराने और पार्टी के एकाधिकार वर्चस्व को कायम करने के प्रयास भी शामिल होते हैं. ये अभियान साल 1983, 1996, 2001 और 2010 में चलाए जा चुके हैं. एक छोटे स्तर पर अपराध रोधी अभियान थे जो कई सालों तक चलते रहे.

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इस तरह का अभियान सबसे पहले साल 1983 में हुआ था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


सबसे पहले 1983 में
साल 1983 में चीन का अपराधियों के खिलाफ पहला अभियान था. डेंग जियाओपिंग ने इस अभियान की शुरुआत की थी जब उन्होंने एक दशक पहले हुए सांस्कृति क्रांति के बाद पैदा हुई अराजकता के चलते बड़े आर्थिक सुधार लागू किए थे. डेंग ने भी कानून को सख्ती से लागू किया  और इस अभियान में कम्युनिस्ट पार्टी के सीनियर जनरल डे के 25 साल के पोते जु गोउहुआ को गुंडागर्दी के आरोप में मौत की सजा दे दी गई.. इसी दिन 80 अन्य लोगों को भी मौत के घाट उतार दिया गया था.

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1996 और 2001 माफिया अपराधों के खिलाफ कार्रवाई
इसके बाद साल 1996 में भी एक सख्त अभियान चलाया गया जब चीन की अर्थव्यवस्था के साथ ही हथियारों, ड्रग्स और माफिया संबंधी अपराधों में तेजी से इजाफा होने लगा था. साल 2001 में भी इस तरह का अभियान चलाया गया जब देश में अपराधों की दर तेजी से बढ़ गई थी.

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पिछली बार साल 2010 में ऐसा बर्बर अभियान चलाया गया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


साल 2010 का अभियान
2010 में अचानक चीन में उच्च पदों पर आसीन लोगों की हत्याएं बढ़ने लगी इसकी वजह से एक बार फिर अपराध रोधी अभियान चला गया. इन हत्याओं में किंडरगार्डन और प्राइमरी स्कूलों में चाकू के जरिए हत्याएं हुईं. अपराधियों की कई गैंग ने शरीर को बेचने के व्यापार के लिए गुआंगडोंग प्रांत के बुजुर्गों और अक्षम लोगों को मारना शुरू कर दिया. इन लाशों को वे लोग खरीदते थे जो अपने मरे हुए परिवार जनों को दफनाना चाहते थे जिस पर उस समय पाबंदी लगी हुई थी. ये लोग अपने उस मरे हुए परिवार के सदस्य को चुपके से दफना देते थे और अधिकारियों को जलाने के लिए खरीदी हुई लाश दे दिया करते थे.

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इसके अलावा क्षेत्रीय स्तर पर कुछ और अभियान भी चलाए गए.  जिसमें चोंगकिंग में हुआ अभियान भी शामिल है जो पूर्व  सिटी पार्टी प्रमुख बो जिलाई ने चलाया था. बो फिलहाल भ्रष्टाचार के आरोप में आजीवन कारावास झेल रहा है. बो ने साल 2009 में अपने अभियान में पांच हजार लोगों को गिरफ्तार कर करीब 47 लाख डॉलर की मुद्रा जब्त की थी. इस अभियान की बहुत आलोचना हुई थी और कहा जाता है कि इस अभियान के जरिए बो ने अपने राजनैतिक विरोधियों को निशाना बनाया था.

चीन में आमतौर पर गंभीर आपराधिक मामलों में अपराधियों की कोई सुनवाई नहीं होती. उन्हें पकड़कर सीधे सजा दी जाती है. अदालतें इन मामलों पर तुरत-फुरत फैसला करती हैं. भारत की तरह ये मामले लंबे नहीं चलते.  हालांकि इसकी आड़ में कई बार ज्यादतियां भी होती हैं.
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