जानें कैसे होता है CWC का गठन, कैसे काम करती है ये

कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) की बैठक में कांग्रेस (All India Congress) का नया अध्यक्ष चुनने पर मंथन चल रहा है. राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के कांग्रेस अध्यक्ष से इस्तीफा देने के बाद अब तक ये पद खाली पड़ा है.

News18Hindi
Updated: August 10, 2019, 1:10 PM IST
जानें कैसे होता है CWC का गठन, कैसे काम करती है ये
नए अध्यक्ष के चयन को लेकर CWC की बैठक चल रही है
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Updated: August 10, 2019, 1:10 PM IST
कांग्रेस (All India Congress) का नया अध्यक्ष चुनने के लिए कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) की बैठक चल रही है. राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के कांग्रेस अध्यक्ष से इस्तीफा देने के बाद अब तक ये पद खाली पड़ा है. कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गाँधी, गुलाम नबी आजाद और कमिटी के दूसरे नेता मिलकर नए अध्यक्ष को लेकर मंथन कर रहे हैं.

कैसे काम करती है कांग्रेस वर्किंग कमिटी

कांग्रेस के भीतर कांग्रेस वर्किंग कमिटी पार्टी की सर्वोच्च कार्यकारी संस्था है. ये कमिटी कांग्रेस के अपने संविधान के मुताबिक काम करती है. कांग्रेस के संविधान के मुताबिक कांग्रेस वर्किंग कमिटी में पार्टी के अध्यक्ष, संसद में पार्टी के नेता के साथ 23 दूसरे सदस्य होते हैं.

इन 23 सदस्यों में से 12 को ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी चुनती है, बाकियों को कांग्रेस अध्यक्ष चुनते हैं. कांग्रेस वर्किंग कमिटी के पास नए अध्यक्ष की नियुक्ति या मौजूदा अध्यक्ष को उसके पद से हटाने का अधिकार होता है.

कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव होने के बाद कांग्रेस वर्किंग कमिटी का फिर से गठन होता है. सीडब्ल्यूसी का पुनर्गठन चुनाव या चुनाव के बाद ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के प्लेनरी सेशन के बाद किया जा सकता है.

कब-कब हुए सीडब्ल्यूसी के चुनाव

कांग्रेस अध्यक्ष बदलने पर सीडब्ल्यूसी के चुनाव होते रहते हैं. लेकिन कहा जाता है कि पिछले 50 वर्षों में सिर्फ दो बार ही सही तरीके से चुनाव हुए हैं. दोनों वक्त में कांग्रेस में चुनाव का संचालन नेहरू-गांधी फैमिली के बाहर का शख्स कर रहा था.
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CWC की बैठक में अध्यक्ष की नियुक्ति या मौजूदा अध्यक्ष को हटाने का फैसला होता है


1992 में एक ऐसा ही चुनाव हुआ था. उस वक्त कांग्रेस की कमान पीवी नरसिम्हाराव के हाथ में थी. तिरुपति के कांग्रेस प्लेनरी सेशन के दौरान नरसिम्हाराव ने सीडब्ल्यूसी का चुनाव करवाया. उन्हें उम्मीद थी कि उनके लोग जीतकर आएंगे. लेकिन सीडब्ल्यूसी में अर्जुन सिंह, शरद पवार और राजेश पायलट जैसे उनके विरोधी भी चुनकर आ गए.

बाद में नरसिम्हा राव ने सीडब्ल्यूसी के सारे सदस्यों को इस तौर पर बर्खास्त कर दिया कि इस कमिटी में कोई एससी, एसटी या महिला नहीं है. सीडब्ल्यूसी का पुनर्गठन हुआ. इसमें अर्जुन सिंह और शरद पवार नॉमिनेटेड कैटेगरी में कमिटी में शामिल किए गए.

कांग्रेस अध्यक्ष अपने विश्वासपात्रों को देते हैं जगह

1969 में कांग्रेस में टूट के बाद बॉम्बे में प्लेनरी सेशन हुआ था. उस वक्त सर्वसम्मति से इसके सदस्य चुने गए थे. 1997 में सीताराम केसरी की अगुआई में कांग्रेस वर्किंग कमिटी का गठन हुआ था. कोलकाता के प्लेनरी सेशन में कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीच जबरदस्त होड़ मची थी. इसमें अहमद पटेल, जितेन्द्र प्रसाद, माधवराव सिंधिया, तारिक अनवर, प्रणब मुखर्जी, आरके धवन और अर्जुन सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के नाम शामिल थे.

अप्रैल 1998 में सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं. इसके बाद कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्यों के चयन को लेकर उन्होंने ही फैसला किया. पिछली बार सीडब्ल्यूसी का पुनर्गठन 2018 में हुआ था, जब राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे.

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राहुल गांधी ने अध्यक्ष बनने के बाद कई सीनियर नेताओंको CWC से बाहर कर दिया था.


दिसंबर 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी को सीडब्ल्यूसी के पुनर्गठन का अधिकार दिया गया था. नए सीडब्ल्यूसी में राहुल गांधी ने दिग्विजय सिंह, जर्नादन द्विवेदी, कमलनाथ, सुशील कुमार सिंदे और सीपी जोशी जैसे दिग्गज कांग्रेसियों को बाहर कर दिया था.

राहुल गांधी ने सीडब्लूसी में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मोतीलाल वोरा, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, एके एंटनी, अहमद पटेल और अंबिका सोनी को बनाए रखा था. जबकि अशोक गहलोत, ओमान चांडी, तरुण गोगोई, सिद्धारमैया और हरीश रावत को नए सदस्यों के तौर पर शामिल किया गया था.

आमतौर पर कांग्रेस अध्यक्ष अपने विश्वासपात्रों को सीडबल्यूसी में जगह देते हैं. इसमें क्षेत्र, जाति और जेंडर बैलेंस की अक्सर अनदेखी होती है.

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First published: August 10, 2019, 1:10 PM IST
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