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कोरोना ने कैसे दिया इंडिया पोस्ट को जीवनदान, बना संकटमोचक और पेश की मिसाल

इंडिया पोस्ट ने अपनी 1500 रेड पार्सल वैन के जरिए कोरोना महामारी के दौरान पूरे देश में एक नेशनल ट्रासपोर्ट नेटवर्क खड़ा किया

इंडिया पोस्ट ने अपनी 1500 रेड पार्सल वैन के जरिए कोरोना महामारी के दौरान पूरे देश में एक नेशनल ट्रासपोर्ट नेटवर्क खड़ा किया

ऐसा समय आ गया था जब लोग अपनी पोस्ट प्राइवेट कूरियर्स से भेजने लगे थे. मनीआर्डर कम से कम होने लगे थे. भारतीय पोस्ट डिपार्टमेंट अप्रासंगिक महसूस होने लगा था. ऐसे में कोरोना ने उसे नया जीवनदान दिया लेकिन उसने भी दिखा दिया कि सही योजना और रणनीति बनाकर किस तरह चुनौतीपूर्ण हालात में खरा उतरा जाता है

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    कोरोना वायरस से पहले माना जा रहा था भारतीय डाक विभाग अप्रासंगिक हो चुका है. अगर यही हाल रहा तो कुछ सालों में उस पर ताले लटक जाएंगे. अगर इकोनामी की बात करें तो भारतीय डाकघर का बजट घाटे में जा चुका था. कोरोना वायरस ने इसे नई जिंदगी दे दी है. कोरोना के दौरान देशभर में डाक विभाग ने देश भऱ में 1000 करोड़ से ज्यादा नकद की होम डिलिवरी की है.

    यह रकम लॉकडाउन के दौरान डाकघर बचत खातों में हुए 66 हजार करोड़ के लेन-देन के अतिरिक्त है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत हर कोई लॉकडाउन के दौरान नकदी, आवश्यक वस्तुओं और चिकित्सा उपकरणों की सप्लाई बहाल रखने में डाक विभाग के काम की तारीफ की है.

    कोरोना की वजह से जारी देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान बैंक तो खुले रहे, लेकिन कूरियर सेवाओं और परिवहन के तमाम साधन हो गए.ऐसे में दूर-दराज के इलाके के लोगों के लिए पैसे निकालना या परिचितों के पास पैसा या जरूरी सामान भेजना मुश्किल हो गया.

    नेशनल रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क विकसित किया
    ऐसे में डाक विभाग ने अपने वाहनों के जरिए एक सड़क नेटवर्क विकसित करने का फैसला किया. इसमें एक नेशनल रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क विकसित किया गया. 500 किलोमीटर के दायरे में 22 लंबे रूट तय किए गए जो देश के 75 शहरों तक पहुंचते हैं.
    स्टेट्समैन से बात करते हुए भारतीय पोस्ट डिपार्टमेंट की डायरेक्टर जनरल अरुंधति घोष ने बताया कि कोरोना के दौरान डाक विभाग की लाल रंग के 1500 पार्सल वाहनों ने 1100 टन मेडिसिन और मेडिकल उपकरण डिलिवर किए. करीब 12 लाख लोगों को दवाएं पहुंचाईं.

    दवाइयों से लेकर चिकित्सा उपकरणों की होम डिलिवरी
    इस नए नेटवर्क के जरिए डाक विभाग ने गांवों-गांवों तक जरूरी सामानों और नकदी के अलावा चिकित्सा उपकरणों की होम डिलीवरी करना शुरू कर दिया. खासकर नकदी की होम डिलीवरी ने कई पेंशनभोगी लोगों की बहुत राहत दी. सबसे बड़ी बात ये भी है कि भारतीय डाक विभाग को गुजरे जमाने का विभाग समझने वाले भी अब उसके काम के मुरीद हो गए हैं.

    इंडिया पोस्ट को कमोवेश लोगों ने गुजरे जमाने की बात समझ लिया था लेकिन कोरोना में उसने गजब का काम किया है


    वैकल्पिक बैंकिंग प्रणाली के तौर पर भी उभरा
    इंडिया पोस्ट की सबसे बड़ी कामयाबी वैकल्पिक बैंकिंग प्रणाली के तौर पर उभरना भी है. जो घर-घर नकदी पहुंचा रहा है. डैश वैले में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, ये अब तक 11 हजार करोड़ से ज्यादा नकदी पहुंचा चुका है. इस विभाग के इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक में फिलहाल 30 करोड़ खाते हैं. कोरोना के दौरान ज्यादातर पेंशनभोगियों को डाकघरों के जरिए ही पेंशन मिली और वो भी घर बैठे.

    नई तकनीक का सहारा
    दरअसल, पैसों की यह होम डिलीवरी आधार-इनेबल्ड पेमेंट सर्विसेज यानी एईपीएस की वजह से संभव हुई. वाई-फाई की सुविधा वाले खास उपकरण के जरिए एईपीएस के इस्तेमाल से अब किसी भी बैंक खाते से ग्राहकों को उनके पैसे घर बैठे मिल सकते हैं. इस ऐप को बीते साल सितंबर में लांच किया गया था. इससे खासकर दुर्गम और ग्रामीण इलाकों में रहने वालों को काफी सहूलियत मिली है.

    23 लाख नए खाते खोले
    लॉकडाउन के दौरान जब ज्यादातर बाकी वित्तीय संस्थाएं अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए जूझ रही हैं, तब इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक में प्रवासी मजदूरों ने 23 लाख नए खाते खोले हैं. विभागीय कर्मचारी उक्त एप के जरिए किसी भी बैंक में जमा रकम उसके ग्राहकों तक घर बैठे पहुंचा रहे हैं.

    दूरदराज तक सर्विस
    इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक ने पोस्टइंफो नामक एक ऐप विकसित किया है. इसके जरिए नकदी की होम डिलिवरी का अनुरोध किया जा सकता है. ग्राहक इसके जरिए स्पीड पोस्ट की होम सर्विस औऱ डाकघर बचत खाते की किस्त की रकम ले जाने का भी अनुरोध कर सकते हैं. फिलहाल रोजाना औसतन एईपीएस के जरिए एक लाख लेन-देन हो रहे हैं. इसके साथ ही 17 लाख मनीआर्डर और 32 लाख डाक पहुंचाई जा रही है.

    इंडिया पोस्ट दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है. देशभर में उसके 1.5 लाख से ज्यादा पोस्ट ऑफिस हैं


    दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क
    इंडिया पोस्ट दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है. देशभर में 1.5 लाख से ज्यादा पोस्ट ऑफिस और 04.0 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं. कोरोना के दौरान ही इंडिया पोस्ट ने कई विदेशी सेवाएं भी शुरू की हैं. भारतीय डाक विभाग की स्थापना 1854 में हुई थी. इस लिहाज से 165  साल पुराना हो चुका है.

    मालवाहक जहाजों की भी सेवाएं ली गईं
    सबसे बड़ी बात ये भी है कि कोरोना के दौरान भारतीय डाक विभाग ने जिन जरूरी सामानों को जल्दी से जल्दी एक शहर से दूर बसे दूसरे शहर में डिलिवर किया, उसमें कोरोना टेस्ट किट्स और वेंटीलेटर्स समेत कई आवश्यक मेडिकल उपकरण भी रहे हैं. रात के समय और छुट्टी के दिनों के दौरान भी डिलिवरी की गई. अब तो खैर 15 मई से रेलवे का डाक पार्सल यान भी सक्रिय हो गया है लेकिन इंडिया पोस्ट ने सड़क मार्ग के साथ साथ मालवाहक जहाजों की भी सेवाएं ली हैं.

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