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दुनियाभर के मुसलमानों के लिए रमजान को कैसे बदल देगा कोरोना

कोरोना की वजह से दुनियाभर में रमजान के पवित्र महीने में धार्मिक जुटान पर प्रतिबंध रहेंगे.

कोरोना की वजह से दुनियाभर में रमजान के पवित्र महीने में धार्मिक जुटान पर प्रतिबंध रहेंगे.

इस्लाम धर्म में रमजान का महीने सबसे पवित्र माना जाता है. समुदाय के लोग नमाज से लेकर शाम को इफ्तार के लिए जुटते हैं. लेकिन इस बार सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से यह संभव नहीं हो पाएगा.

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    दुनिया के अनेक देशों में कोरोना महामारी (Corona Pnademic) की वजह से चल रहे लॉकडाउन के कारण मुस्लिम समुदाय को रमजान महीना घरों के भीतर रहकर ही बिताना होगा. इस्लाम धर्म में रमजान का महीना सबसे पवित्र माना जाता है. समुदाय के लोग नमाज से लेकर शाम को इफ्तार के लिए जुटते हैं. लेकिन इस बार सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से यह संभव नहीं हो पाएगा.

    अल जजीरा पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में मलेशिया के रिसर्च स्कॉलन ने कहा-मुझे याद नहीं कि ऐसा पहले कभी हुआ है. द्वितीय विश्व युद्ध हो या फिर कोई प्राकृतिक आपदा धार्मिक और ऐतिहासिक साक्ष्यों के मुताबिक मुसलमान रमजान में हमेशा इकट्ठे होते रहे हैं. हालांकि इस बार जिस दुश्मन (कोरोना) से हमारा सामना है वो बेहद क्रूर और अदृश्य है.



    रमजान के महीने में दिन की शुरुआत प्रात: से पहले सुहूर के साथ होती है. इसमें परिवार के लोग मिलकर साथ खाना खाते हैं. और शाम को इफ्तारी के साथ फिर रोजा खोलते हैं. सामान्य तौर पर इफ्तार के दौरान के कई लोग इकट्ठा होते हैं. ये मोटे तौर पर सामुदायिक भोजन जैसा होता है. गरीबों को खाना खिलाने का भी रिवाज है. लेकिन 185 देशों में फैल चुकी कोरोना महामारी की वजह से कई देशों की सरकार ने इस बार नागरिकों को घर में ही रहने की सलाह दी है. मिस्र में रमजान से जुड़ी सभी एक्टिविटी सरकार ने बैन कर दी है.

    रमजान के दौरान बाजारों में भी बेहद रौनक रहती हैं. लेकिन इस बार सब पर प्रतिबंध लगा दिया है. क्योंकि बाजारों में भीड़ की वजह से कोरोना के तेजी के साथ फैल जाने का खतरा बना हुआ है. मलेशिया की धार्मिक संस्था से ताल्लुक रखने वाली रोज़ाना ईशा कहना है कि इस बार रमजान के महीने में छोटे व्यापारियों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.



    वो कहती है कि सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से रमजान के दौरान गले मिलने का तरीका भी बदल जाएगा. रमजान के दौरान खाने पीने की चीजों की मांग बढ़ जाती है ऐसे में पैनिक बाइंग का खतरा बढ़ा हुआ है. कोरोना वायरस के दौरान घरों में खाना स्टोर करने की समस्या हम कई यूरोपीय देशों में देख चुके हैं. जहां घबराए लोगों ने महीनों का सामान खरीद कर मेगा स्टोर खाली कर दिए थे.

    कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित ईरान के सुप्रीम लीडर आयुल्लाह खामनेई ने भी देश में किसी भी तरह के धार्मिक जुटान पर रोक लगा दी है. उन्होंने सख्त हिदायत दी है कि घर से इमरजेंसी हालात में ही निकलें. जॉर्डन ने भी अपने नागरिकों के कहा है कि इस रमजान में इफ्तार में इकट्ठा होने की सोचे भी नहीं. वायरस का फैलाव कई जिंदगियां दांव पर लगा सकता है.

    इस्लाम के धार्मिक केंद्र मक्का और मदीना की मस्जिदों में भी रमजान के दौरान नमाज पर पाबंदी रहेगी. हालांकि पाकिस्तान ने रमजान के दौरान नमाज पर रोक नहीं लगाई है. लेकिन सरकार ने हिदायत दी है कि नमाज अता करने के दौरान एक दूसरे से पर्याप्त दूरी बनाए रखें.

    वहीं यूनाइटेड किंगडम सहित यूरोप के अन्य देशों में कुरान की आयतों के पाठ की ऑऩलाइन स्ट्रीमिंग कराई जाएगी. फेसबुक, जूम ऐप और यूट्यूब के जरिए मुस्लिम धार्मिक भाषण सुन सकेंगे.



    इस्लाम की पांच महत्वपूर्ण चीजों में शामिल जकात को इस रमजान ज्यादा प्रोत्साहित करने की बात कही जा रही है. यूनाइटेड अरब अमीरात में गरीबों को इफ्तार के लिए खाना बांटा जाएगा. इसमें लोगों से सहयोग की अपील भी की गई है. लेकिन सऊदी अरब की मदीना मस्जिद इस बार किसी को भी इफ्तार नहीं मुहैया कराएगी. ये सख्त फैसला कोरोना के मद्देनजर ही लिया गया है. ज़कात के लिए एक्पर्ट्स की सलाह है कि लोगों तक खुद पहुंचने की बचाए ऑनलाइन चंदा देकर उन संस्थाओं की मदद करें जो लोगों तक खाना पहुंचा रही हैं.

    क्या कोविड-19 के लक्षणों वाला व्यक्ति रख सकता है रोजे
    इसके लिए आपको डॉक्टरी सलाह की जरूरत पड़ेगी. कुरान के मुताबिक बीमार लोगों को रोजे की जिम्मेदारी से मुक्त रखा गया है. उम्रदराज लोग, गर्भवती महिलाओं और मेडिकल के पेशे से जुड़े लोगों (जो बीमारों की सेवा में लगे हैं) को भी इससे छूट है.

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