140 सालों में सबसे बड़े भूकंप से क्रोएशिया में कैसे बना हिरोशिमा जैसा संकट?

क्रोएशिया में भूकंप से तबाही की तस्वीर.

कहा जा रहा है कि मंगलवार को आए इस भूकंप से झटके (Earthquake in Croatia) पूरे सर्बिया क्षेत्र में महसूस किए गए. जानिए कि कोरोना के संकट से जूझ रहे यूरोपीय यूनियन (European Union) के इस देश सामने एक और भूकंप ने कितना बड़ा संकट खड़ा कर दिया है.

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    क्रोएशिया के आधे से ज़्यादा पेट्रिंजा शहर (Petrinja Town of Croatia) को तबाह कर देने वाले भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.4 मापी गई. इससे पहले इसी साल मार्च के महीने में क्रोएशिया की राजधानी ज़ाग्रेब में इतने ही ज़ोरदार भूकंप (Zagreb Earthquake 2020) से तबाही मची थी. ज़ाग्रेब में भूकंप से 6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था. 140 सालों के इतिहास में क्रोएशिया (Croatia History) में इस साल दो सबसे बड़े भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं, वो भी तब जब यह देश पूरी दुनिया की ही तरह कोरोना वायरस (Corona Virus Crisis) की महामारी से भी जूझ रहा है.

    पेट्रिंजा में भयानक भूकंप से कम से कम 7 लोगों के मारे जाने की खबरें आ चुकी हैं और माना जा रहा है कि यह आंकड़ा बढ़ सकता है क्योंकि कई लोग चपेट में आए हैं. जान के साथ माल के नुकसान का आलम यह बताया गया है कि इतनी बिल्डिंगें क्षतिग्रस्त हुई हैं कि आधे से ज़्यादा शहर तबाह हो गया है. इस भूकंप का असर ज़ाग्रेब तक महसूस किया गया और लोग फिर दहशत में आ गए.

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    हिरोशिमा कैसे बन गया है शहर?
    साल 2020 को एक के बाद एक त्रासदी का साल बताते हुए पेट्रिंजा के मेयर और क्रोएशिया के ओहदेदारों ने कहा कि इस भूकंप के बाद पेट्रिंजा के हालात बिल्कुल वैसे लग रहे हैं, जैसे दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान के शहर हिरोशिमा में परमाणु बम गिरने के बाद हो गए थे. हालांकि जानें उतनी नहीं गई हैं लेकिन शहर के तबाह होने को इस उदाहरण के साथ बताया गया है.



    हिरोशिमा में 1945 में जब परमाणु बम फेंका गया था, तब 30 फीसदी आबादी यानी करीब 80 हज़ार लोग तक मारे गए थे और जापानी आंकड़ों में बताया गया था कि शहर की 69 फीसदी बिल्डिंगें बर्बाद हो गई थीं और अन्य 7 फीसदी क्षतिग्रस्त. क्रोएशिया के हालिया भूकंप से जानों का नुकसान फिलहाल उंगलियों पर ही गिनने लायक है.

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    बताया गया है कि पेट्रिंजा में ज़्यादातर बिल्डिंगें क्षतिग्रस्त हो गई हैं. आंकड़े तो बाद में ही सामने आएंगे लेकिन शहर का मध्य ज़ोन रेड अलर्ट पर है, जहां लगभग सभी भवन रहने लायक नहीं रह गए हैं. यहां आर्मी की मदद से लोगों को बैरकों में शेल्टर दिया जा रहा है और शहर के आसपास के होटलों वगैरह में भी ठंड के मौसम में लोगों को शरण देने के इंतज़ाम किए जा रहे हैं.

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    कैसे बढ़ गई है क्रोएशिया की मुसीबत?
    मार्च में ज़ाग्रेब में आए भूकंप की चपेट में आईं करीब 20,000 बिल्डिंगों की मरम्मत का काम क्रोएशिया कर ​ही रहा था कि एक और भूकंप ने उसकी हिम्मत और अर्थव्यवस्था को झटका देने का काम तो किया ही है. यूरोपीय यूनियन के उन देशों में क्रोएशिया शुमार रहा, जहां कोविड का प्रकोप अच्छा खासा रहा और इस वजह से आर्थिक मंदी भी रिकॉर्ड स्तर पर रही.

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    स्लोवेनिया के न्यूक्लियर प्लांट को शटडाउन कर दिया गया.


    इस संकट के समय क्रोएशिया के उप प्रधानमंत्री ने कोविड के चलते नजदीकी काउंटियों की यात्रा करने पर लगे बैन को तत्काल हटाए जाने की बात कही. दूसरे इस भूकंप के चलते तत्काल प्रभाव से स्लोवेनिया स्थित न्यूक्लियर पावर प्लांट को बंद कर दिया गया. फिलहाल यहां कोई क्षति न होने की बात कही गई है.

    क्रोएशिया की यादों में एक और ज़ख्म
    अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे की मानें तो क्रोएशिया में 1880 के बाद आए भूकंपों में यह सबसे बड़ा और भयानक रहा. वर्तमान उत्तरी मैसेडोनिया की राजधानी और उस वक्त यूगोस्लाव शहर में 1963 में आए भूकंप से करीब 1000 जानें गई थीं और 80 फीसदी शहर तबाह हो गया था. लेकिन इस साल के भूकंपों को उससे भी ज़्यादा शक्तिशाली बताया गया है.

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    यही नहीं, पेट्रिंजा शहर की करीब 30 साल पुरानी यादें भी ताज़ा हो गई हैं जब यूगोस्लाविया से अलग होने के समय 1991 से 1995 के दौरान खूनी संघर्षों में करीब 25 हज़ार लोग तकरीबन खत्म हो गए थे और उनके मकान और अन्य भवन भी बर्बाद हो गए थे. मौजूदा नज़ारे पिछली पीढ़ी की यादों में एक और ज़ख्म की तरह क़ैद हो रहे हैं.

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