इस बाबा के निधन पर फूट-फूट कर रोए थे सचिन तेंदुलकर

सत्य साईं (फाइल फोटो)

सत्य साईं (फाइल फोटो)

सत्य साईं बाबा का असर पूरी दुनिया में फैला है. भारत के अलावा विदेश में उनके करोड़ों भक्त हैं. आज साईं बाबा का जन्मदिन है.

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  • Last Updated: November 23, 2018, 9:41 AM IST
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क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर से लेकर राष्ट्रपति और भारतीय राजनीति के बड़े-बड़े नेता इस बाबा के भक्त थे. कभी वो हवा में चीजें प्रकट कर देते थे. कभी अपनी मृत्यु का दिन तय कर देते थे. तरह तरह के विवाद भी उनके नाम के साथ जुड़े रहे. भारत में आध्यात्मिक बाबा बहुत हुए लेकिन ऐसी शोहरत शायद किसी को मिली हो. ये थे सत्य साईं बाबा, जिनका आज जन्मदिन है.

सत्य साईं बाबा का असर पूरी दुनिया में फैला है. भारत के अलावा विदेश में उनके करोड़ों भक्त हैं. ये सब रातों-रात नहीं हो गया था. आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में पुट्टपर्थी गांव में एक सामान्य परिवार में 23 नवंबर 1926 को एक बच्चे का जन्म हुआ था. उसका नाम रखा गया सत्यनारायण राजू. राजू ने बड़े होते होते शिरडी के साईं बाबा के पुनर्जन्म की धारणा के साथ ही सत्य साईं बाबा के रूप में ख्याति अर्जित की.

राजू की वजह से आंध्र प्रदेश का छोटा-सा गांव पुट्टपर्थी अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर छा गया. प्रसिद्धी का आलम ये कि कस्बे में एक विशेष हवाई अड्डा है, जहां दुनियाभर के अनेक हिस्सों से बाबा के भक्त चार्टर्ड विमानों से आते रहे हैं.



राजू कैसे बना सत्य साईं बाबा
राजू ने 20 अक्टूबर 1940 को 14 साल की उम्र में खुद को शिरडी वाले साईं बाबा का अवतार कहा. जब भी वो शिरडी साईं बाबा की बात करते थे तो उन्हें 'अपना पूर्व शरीर' कहते थे. वह अपने चमत्कारों के लिए भी प्रसिद्ध रहे. वह हवा में हाथ घुमाते थे और कई चीजें प्रकट कर देते थे. इसके चलते आलोचक उनके खिलाफ प्रचार करते रहे. लेकिन ज्यादातर भक्तों को उन पर अगाध विश्वास था.

जब वो साईं बाबा नहीं बने और राजू ही थे, तब लोगों को उनके कारनामे देखकर आंखों पर यकीन नहीं होता था. जब राजू साईं बाबा बन गया तो हजारों लोगों की मौजूदगी में एक से बढ़कर एक चमत्कार दिखाए. उन्होंने मद्रास और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों की यात्रा की. उनके भक्तों की तादाद बढ़ गई. हर गुरुवार को उनके घर पर भजन होने लगा, जो बाद में रोजाना हो गया.



साईं समय के चमत्कार 
साईं ने समय के साथ-साथ चमत्कार और नि:स्वार्थ सेवा के चलते पूरी दुनिया में पहचान बना ली. वक्त बीतता गया.सत्य साईं पूजे जाने लगे. सत्य साईं बाबा को चमत्कारों का बाबा भी कहा जाता है. सत्य साईं का सबसे प्रचलित चमत्कार था भक्तों के ऊपर भभूत गिराना. बाबा का दावा था कि उनके खाली हाथ में भभूत चमत्कार से आती थी. भक्तों से भरे हॉल में बाबा सिर्फ अपना हाथ उठाते थे औऱ उनके हाथ से भभूत निकलने लगती थी.

सत्य साईं बाबा एक और चमत्कार किया करते थे. ये था भक्तों के गले में चेन डालने का कारनामा. अचानक हाथ में चेन में आ जाने का कारनामा. ये कारनामा वो अक्सर तब जब शिरडी के साईं बाबा की मूर्ति की सफाई करते थे. अचानक मूर्ति पर सोने की चेन दिखने लगती थी. साईं का ये चमत्कार उनके भक्तों की श्रद्धा को और बढ़ाता चला गया.

सत्य साईं का मंदिर
साल 1944 में सत्य साईं के एक भक्त ने उनके गांव के नजदीक उनके लिए एक मंदिर बनाया जो आज पुराने मंदिर के नाम से जाना जाता है. उनके मौजूदा आश्रम प्रशांति निलयम का निर्माण कार्य 1948 में शुरू हुआ था. 1950 में ये बनकर तैयार हुआ था. 1957 में साईं बाबा उत्तर भारत के दौरे पर गए.



कितना सच, कितना झूठ
साईं चमत्कारों से प्रसिद्ध तो हो रहे थे लेकिन लगातार सवाल भी उठते रहे. यूट्यूब पर बाबा के भक्तों के गले में चेन डालने का कारनामे का पर्दाफाश करने वाले सैकड़ों वीडियो मौजूद हैं लेकिन मानने वाले अभी भी बाबा को मानते हैं.

प्रचलित कहानियां
बात साईं की बचपन से जुड़ी है. जब वह स्कूल में पढ़ते थे. एक दिन उनके टीचर ने उन्हें बिना किसी वजह बेंच पर खड़ा करा दिया. सत्य साईं चुपचाप घंटों बेंच पर खड़े रहे. जब क्लास खत्म होने के बाद टीचर कुर्सी से उठने लगे तो वो उठ नहीं पाए. वो कुर्सी से चिपक गए थे. साईं के चमत्कार से टीचर को गलती का एहसास हुआ.

लोग सत्य साईं की कुटिया में पहुंचे और कहा कि साबित करके दिखाओ कि तुम साईं के सबसे बड़े भक्त हो. तब सत्य साईं ने सिर्फ फूल मंगाए और यूं ही जमीन पर बिखेर दिए, जब लोगों ने जमीन पर बिखरे फूलों को देखा तो वहीं तेलुगु में लिखा था ‘साईं’.

सचिन और साईं
21 अप्रैल 2011 को सचिन पुट्टापर्थी के कुलवंत हॉल बाबा के अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचे थे. सचिन की पत्नी अंजलि भी उनके साथ थीं. अंतिम दर्शन के दौरान सचिन की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे. हैदराबाद में सचिन ने बाबा के निधन की खबर के बाद खुद को होटल के कमरे में बंद कर लिया था. सचिन की माताजी भी बाबा की भक्त हैं. इसी कारण साईं के लिए उनके दिल में गहरा लगाव है. सचिन को जब भी कोई परेशानी होती थी तो वो बाबा से मिलने पुट्टापर्थी पहुंच जाते थे. क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने सचिन की मुलाकात सत्य साईं बाबा से कराई थी.



स्कैंडल और हत्या की कोशिशें
सत्य साईं बाबा के आश्रम में कथित स्कैंडलों की भी खबरें सामने आईं. उनके खिलाफ यौन व्यवहार संबंधी सवाल भी खड़े होते रहे, लेकिन उन्होंने व उनके भक्तों ने इसे विरोधियों की साजिश कहकर खारिज किया. उनके करीबी सहयोगियों ने ही 6 जून 1993 को कथित तौर पर उन्हें जान से मारने की भी कोशिश की. प्रशांति निलयम में बाबा के कक्ष में उनके छह शिष्यों की मौत हो गयी. ये सभी बाबा के करीबी लोगों में थे, जिनमें उनके निजी सहयोगी राधा कृष्ण मेनन भी शामिल थे. इस पूरे मामले की सच्चाई रहस्य में ही रही.

अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी
साईं बाबा ने भविष्यवाणी की थी कि वह 96 वर्ष की उम्र में मर जाएंगे और तब तक स्वस्थ रहेंगे लेकिन प्रशांतग्राम के श्री सत्य साई सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल 24 अप्रैल, 2011 को 84 वर्ष की आयु में सत्य साईं बाबा का निधन हो गया. भविष्यवाणी गलत होने का खंडन करते हुए उनके भक्तों ने कहा कि बाबा सूर्य वर्षों के बजाय तेलुगू भाषी हिंदुओं द्वारा गिनने वाले कई चंद्र वर्षों का जिक्र कर रहे थे.

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