क्यों हाथों से OK बनाना आपकी नौकरी छीन सकता है?

क्यों हाथों से OK बनाना आपकी नौकरी छीन सकता है?
अमेरिका में उंगलियों से ओके का संकेत बनाने के कारण एक व्यक्ति की नौकरी चली गई (Photo-publicdomainpictures)

अंगूठे और तर्जनी को मिलाकर जो संकेत हम सालों से बना रहे हैं, उसके कारण अमेरिका में एक शख्स की नौकरी चली गई. कुछ लोगों का मानना है कि ओके का इशारा नस्लभेदी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 2, 2020, 12:04 PM IST
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अमेरिका में उंगलियों से ओके का संकेत बनाने के कारण एक व्यक्ति की नौकरी चली गई. उसपर नस्लभेद का आरोप लगा. बता दें कि अश्वेत मूल के जॉर्ड फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से अमेरिका में नस्लवाद के खिलाफ उबाल आया हुआ है. इसकी वजह से कई ऐसे लोगों को मुश्किल हो रही है, जो अनजाने में ऐसे प्रतीक इस्तेमाल कर जाते हैं, जिन्हें नस्लभेद से जोड़ा जाता है. हाथों से ओके का संकेत बनाना भी ऐसा ही एक प्रतीक है.

क्या है पूरा मामला
घटना जून की है. इमैनुएल कैफर्टी सैन डिएगो में बिजली और गैस का काम करने के बाद घर लौट रहे थे. उन्होंने गाड़ी की खिड़की से एक हाथ बाहर निकाला हुआ था और कथित तौर पर उंगलियां चटका रहे थे. इसी दौरान उनका अंगूठा और तर्जनी भी मिल गए, जो दुनिया के बहुत से देशों में ओके या फिर बढ़िया के लिए दिखाया जाता है. सड़क पर गुजरते एक शख्स ने इस साइन का वीडियो बनाकर ट्विटर पर पोस्ट कर लिया. ट्विटर में कैफर्टी के हाथों को दिखाते हुए उनपर रेसिस्ट होने का आरोप लगा था. इस घटना के घंटेभर बाद कैफर्टी की नौकरी चली गई. मैक्सिकन मूल के कैफर्टी का कहना है कि उन्हें पता ही नहीं था कि हाथों को इस तरह से करना भी रेसिज्म है.

इमैनुएल कैफर्टी की वो फोटो, जिसपर विवाद हुआ. टिविटर से ये अकाउंट डिलीट हो चुका है (Photo-twitter)

वैसे बहुत से लोग शायद ही ये जानते हों कि हाथों के ये संकेत वाइट सुप्रीमेसी का इशारा है. अंगूठे और तर्जनी को मिलाकर बहुत से देशों के लोग किसी चीज की तारीफ भी करते हैं. इसे ओके भी माना जाता है. यहां तक कि योग में भी हाथों का ये संकेत इस्तेमाल होता है. तब कैसे ये संकेत नस्लवाद का प्रतीक बना?



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कब हुई शुरुआत
इसकी शुरुआत होती है साल 2017 से. तब 4chan नाम के एक ऑनलाइन मैसेज बोर्ड के कुछ लोगों ने बदमाशी के तौर पर इस तरह के अफवाह की शुरुआत की. चूंकि इसके सदस्य अनाम रहते हुए लिख सकते हैं इसलिए उन्होंने धड़ल्ले से ये फैलाना शुरू कर दिया कि ओके का साइन और कुछ नहीं, बल्कि रंगभेद का संकेत है. इंडिपेंडेंट की खबर के मुताबिक इस ग्रुप के एक सदस्य ने पोस्ट किया कि हमें ट्विटर और दूसरे सोशल मीडिया पर हल्ला मचा देना है कि ये साइन गलत है.

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ग्रुप के बहुतेरे सदस्यों ने फेक अकाउंट बनाकर ऐसा ही बोलना शुरू किया. नतीजा ये हुआ कि बहुत से लोग, जो वाकई में रेसिस्ट थे, उन्होंने अश्वेतों को जलील करने के लिए पब्लिक प्लेस पर ऐसा संकेत बनाना शुरू कर दिया.

डोनाल्ड ट्रंप से लेकर बराक ओबामा ओर हिलेरी क्लिंटन तक हाथों से ये संकेत बनाते आए हैं (Photo-cnn)


इंटरनेट पर फैलाया गया भ्रम
इंटरनेट पर शुरू हुए इस फेक अभियान से अमेरिका के बहुत से ख्यात लोग भी जुड़ने लगे. वे इस संकेत को नस्लभेद बताते हुए इससे बचने की बात कहने लगे. वहीं बहुत से रंगभेदी भी आने लगे, जो जान-बूझकर ओके का ये संकेत बनाकर खुद को ऊंचा और अश्वेतों को नीचा बताने लगे.

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इसके बाद से इस संकेत के मायने बदल गए. कई लोगों ने अनजाने में ये संकेत बनाया या इसके दूसरे मतलब से ऐसा किया, और तब भी उन्हें सजा मिली. जैसे साल 2018 में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने एक ऐसे अफसर को नौकरी से निलंबित कर दिया, जिसने एमएसएन से बात करते हुए किसी प्रसंग में ओके का ये संकेत बना दिया था. बाद में अफसर ने काफी सफाई कि उसका नस्लभेद का कोई इरादा नहीं था लेकिन कोस्ट गार्ड ने सजा वापस नहीं ली. इसी तरह से साल 2019 में अल्बामा में 4 पुलिस अफसरों ने ये संकेत बनाकर फोटो खिंचवाई. इसके बाद उन्हें भी सस्पेंड कर दिया गया. इन अफसरों का भी तर्क था कि वे बचपन से इसे ओके या बढ़िया के तौर पर जानते थे और उन्हें अंदाजा नहीं था कि इसका इतना खराब मतलब है.

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वैसे अंगूठे और तर्जनी को मिलाकर बनाने वाले जिस ओके पर इतना हंगामा मचा हुआ है, वो अंग्रेजी में हैलो के साथ सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला शब्द कहा जाता है. ओके का मतलब है ऑल करेक्ट (oll korrect) यानी सब ठीक है. ओके के पीछे कई दूसरी थ्योरीज भी हैं, जो अलग-अलग बातें कहती हैं लेकिन सारी दुनिया में और लगभग हर भाषा में इसे मान्यता मिल चुकी है.
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