पृथ्वी पर कहां से आया सबसे पहले पानी, वैज्ञानिकों को यहां से मिला जवाब

पृथ्वी पर कहां से आया सबसे पहले पानी, वैज्ञानिकों को यहां से मिला जवाब
पृथ्वी (Earth) पर पानी (Water) कैसे आया इस सवाल का रहस्य लंबे समय वैज्ञानिकों परेशान किए था (तस्वीर: Pixabay)

पृथ्वी (Earth) पर पानी (Water) कहां से आया इस बारे में बहुत से मत हैं लेकिन इनकी स्पष्ट पुष्टि (confirmation) पहले कभी नहीं हुई थी. अब स्पष्ट धारणा के लिए मजबूत प्रमाण (Evidences) मिले हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 16, 2020, 2:29 PM IST
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पृथ्वी  (Earth) पर पानी (Water) कैसे आया यह हमारे वैज्ञानिकों (Scientists) के लिए बहुत अहम सवाल है. इसकी वजह यह है कि इस सवाल के जुड़ा सबसे जरूरी सवाल है कि पृथ्वी पर जीवन (life) कैसे आया और पनपा. यूं तो दशकों से कई मत इस बारे में सामने आ चुके हैं कि पृथ्वी पर पानी कैसे आया, लेकिन किसी भी सिद्धांत को लेकर ठोस प्रमाणिकता नहीं मिल पाई है. लेकिन हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों इस बात कि पुष्टि के और ज्यादा संकेत मिले हैं कि पृथ्वी पानी बाहर से आया था.

हैरानी की बात
वैज्ञानिकों के लिए यह बात शुरू से हैरानी भरी रही है कि जहां सौरमंडल के किसी और ग्रह पर पानी नहीं हैं वहीं आज पृथ्वी की सतह 71 प्रतिशत पानी से ढकी है. एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट और ग्रह विज्ञानी दशकों से इसी सवाल के ठोस जवाब की तलाश कर रहे हैं. इसके लिए शोधकर्ताओं का खास तौर पर ध्यान पृथ्वी के बाहर के स्रोतों पर गया.

उल्कापिंडों से मिली मदद
पृथ्वी के इतिहास के बारे में जानना आसान नहीं है क्योंकि इसमें इसके निर्माण के बाद बहुत कुछ बदला है, लेकिन पृथ्वी के बाहर मौजूद बहुत से ऐसे पिंड हैं जिनमें उनके पैदा होने के बाद कोई बदलाव नहीं आया है. ऐसे ही पिंड हैं उल्कापिंड (Meteorites). ऐसा ही एक उल्कापिंड एनस्टेटाइट कोन्ड्राइट (Enstatite Chondrite) का है जिसका नाम सहारा 97096 है. ईसी परिवार के उल्कापिंड बहुत ही कम मात्रा में पाए जाते हैं जिनकी संरचना पृथ्वी से मिलती जुलती है.



पानी शुरू से ही
हाल ही में सहारा 97096 फ्रांस के नैसे में यूनिवर्सिटे डि लॉरिएन/CERN के  सेंटर डि रिसर्चसेस पेट्रोग्राफीक्स एट जियोकैमीक्स किए गए शोध से खुलासा हुआ है कि हो सकता है कि पृथ्वी पर पानी शुरु से ही रहा होगा.

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पृथ्वी ((Earth) पर आज जितना पानी (Water) है पहले उससे कहीं ज्यादा पानी मौजूद था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


बहुत सारा पानी था पहले
साइंस जर्नल में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि पृथ्वी की पुरातन काले की चट्टानों में इतना पानी था कि उससे आज के आकार के तीन गुना महासागर भरे जा सकते थे. यह उल्कापिंड साल 1997 में मिला था, लेकिन निर्णायक जांच आज की आधुनिक तकनीक से हो सकी जिससे अंततः हमें विश्वसनीय प्रमाण मिल सके.

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पहले क्या था मान्यता
इस उल्कापिंडों की संरचना से पता चलता है कि पृथ्वी की पुरातन चट्टानें इतनी सूखी नहीं थी जितना कि समझा गया था. पहले यह स्थापित मान्यता हो गई थी कि पृथ्वी पर पानी बहुत बाद में आया होगा. माना जाता रहा था कि पृथ्वी पर पानी लाने में पृथ्वी पर आने वाले पानी से समृद्ध क्षुद्रग्रहों की भूमिका थी जो पृथ्वी से आकर टकराए थे.

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अब तक माना जाता था कि पृथ्वी (Earth) पर पानी की धूमकेतु (Comets) या क्षुद्रग्रह (Asteroids) से आया था.(प्रतीकात्मक तस्वीर)


तो कितना प्रतिशत पानी रहा होगा
इस शोध के आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि पृथ्वी का केवल 5 प्रतिशत पानी ही क्षुद्रग्रहों से आया होगा, जबकि बाकी 95 प्रतिशत पानी पृथ्वी की खुद की संरचना का हिस्सा रहा होना चाहिए.

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पानी को पहले स्रोत की इस बहस ने वैज्ञानिकों को लंबे समय से हैरान किया हुआ है. तार्किक तौर पर पृथ्वी की हमारे सौरमंडल में जैसी जगह है वह पानी के विकास के लिए आदर्श नहीं हैं. ग्रहों के निर्माण के शुरुआती समय में जब लगातार टकराव और प्रस्फोट हो रहे थे सूर्य के पास होने के कारण पृथ्वी का सारा पानी वाष्पीकृत हो गया होगा. माना जाता है कि उस समय की पृथ्वी बहुत ही ज्यादा गर्म रही होगी.
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