मैरी टॉड से शादी नहीं की होती तो राष्ट्रपति नहीं बन पाते अब्राहम लिंकन!

1 जनवरी 1841 के दिन दोनों की शादी तय हुई, लेकिन शादी से दो महीने पहले ही लिंकन समझ गए कि यह महिला उनके लिए बिल्कुल सही नहीं है.

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Updated: February 12, 2019, 7:50 AM IST
मैरी टॉड से शादी नहीं की होती तो राष्ट्रपति नहीं बन पाते अब्राहम लिंकन!
मैरी टॉड और अब्राहम लिंकन
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Updated: February 12, 2019, 7:50 AM IST
अमेरिका के 12वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की आज बर्थ एनिवर्सरी है. दुनिया लिंकन को उनकी दयालुता, ईमानदारी, गरीबी से संघर्ष और अमेरिका को दास प्रथा से मुक्ति दिलाने वाले नायक के तौर पर जानती है. लिंकन का बचपन बेहद गरीबी में बीता था, इसलिए अधिकांश लोग मानते हैं कि गरीबी लिंकन के जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी थी, हालांकि जिन लोग की लिंकन के जीवन में विशेष दिलचस्पी है उनका मानना है कि गरीबी नहीं दांपत्य जीवन, लिंकन के जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी थी. अगर ये त्रासदी न होती तो शायद लिंकन राष्ट्रपति भी न बन पाते.

लिंकन की शादी 1842 में मैरी टॉड से हुई थी. वकालत में लिंकन के सहयोगी रहे विलयम एच हैंड्रन ने लिंकन की जीवन में लिखा है कि शादी का दिन लिंक की खुशी का आखिरी दिन था. वे मैरी टॉड के बारे में बताते हैं कि वह ऊंची राय रखने वाली, घमंडी और नकचढ़ी महिला थी, जिसे अपना आपा खोने के लिए पूरा शहर जानता था. हैड्रन बताते हैं कि मैरी की महत्वकांक्षा को इसी बात से जाना जा सकता है कि उसने कई सालों पहले ही कह दिया था कि वह उसी व्यक्ति से शादी करेंगी जो आगे जाकर अमेरिका का राष्‍ट्रपति बनेगा.

लिंकन और मैरी टॉड की शादी कैसे हुई इसके पीछे की कहानी भी बड़ी घुमावदार है. 1839 में स्प्रिंगफील्ड में पहली बार मैरी और लिंकन की मुलाकात हुई थी. उस वक्त मैरी स्टीफेन ए डगलस के साथ थी, जो राष्ट्रपति चुनाव में लिंकन के प्रतिद्वंद्वी थे. तब डगलस उगते सितारे की तरह थे और मैरी ने उनके सामने शादी का प्रस्ताव रखा था, डिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया. डगलस को ईर्ष्या से जलाने के लिए मैरी ने लिंकन से नजदीकी बढ़ाई और जब उन्होंने लिंकन का राजनीतिक हुनर देखा तो उनसे शादी करने का फैसला कर लिया.



1 जनवरी 1841 के दिन दोनों की शादी तय हुई, लेकिन शादी से दो महीने पहले ही लिंकन समझ गए कि यह महिला उनके लिए बिल्कुल सही नहीं है. हालांकि लिंकन इस बात को मैरी से नहीं बता पा रहे थे. हैंड्रन बताते हैं कि दोस्तों के बहुत समझाने के बाद उन्होंने जब यह बात मैरी को बताई तो वह रोने लगी और लिंकन का दिल पिघल गया. लेकिन इसके बाद लिंकन इतना परेशान हो गए कि उन्होंने खाना तक छोड़ दिया. 1 जनवरी 1841 का दिन आया लेकिन लिंकन शादी में नहीं पहुंचे.

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इस घटना के डेढ़ साल बाद तक लिंकन, मैरी से दूर रहे. इस दौरान वह इतना अवसादग्रस्त हो गए कि वह आत्महत्या तक की बात करने लगे, जिस कारण उनके दोस्तों को उनकी जेब में रहने वाले चाकू तक को निकालना पड़ा. हैंड्रन बताते हैं कि दूसरी ओर मैरी प्रतिशोध की ज्वाला से धधक रही थी. करीब डेढ़ साल बाद उसने किसी बहाने से लिंकन को एक मित्र के घर बुलाया और जमकर आंसू बहाए. एक बार फिर लिंकन का दिल पिघल गया और दोनों की मुलाकातों के सिलसिले शुरू हो गए. कुछ ही महीने बाद लिंकन ने मैरी से शादी करने के लिए हामी भर दी. हैंड्रन बताते हैं कि मैरी ने इसके बाद पूरी जिंदगी लिंकन से अपने अपमान का बदला लिया.

वहीं कई अमेरिकी जानकार मानते हैं कि भले ही मैरी ने पूरी उम्र लिंकन से अपने अपमान का बदला लिया हो. लेकिन ये भी सच है कि अगर लिंकन की मैरी से शादी न हुई होती तो वे अमेरिका के राष्ट्रपति भी नहीं बनते. वे बताते हैं कि लिंकन अपने राजनीतिक करियर को लेकर बहुत अधिक सचेत नहीं थे. लेकिन मैरी बहुत अधिक महत्वकांक्षी थी इसलिए वह लिंकन को राजनीतिक सफलता पाने के लिए उत्साहित करती थी. मैरी ही थीं जिन्होंने प्रतिनिधि सभा की सदस्यता के लिए लिंकन का नामांकन करवाया था और दो बार सीनेट के चुनाव हारने के बाद भी उन्हें पीछे नहीं हटने दिया.
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