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ओबामा केयर से कितनी अलग है मोदी केयर, आइए जानें

बराक ओबामा के साथ पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
बराक ओबामा के साथ पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

मोदी अपनी नीतियों और फैसलों को लेकर ओबामा से काफी प्रभावित रहे हैं. इस बार बजट में जिस तरह से 50 करोड़ लोगों के लिए 5 लाख तक कैशलेस सुविधा का ऐलान किया. वो भी कहीं न कहीं ओबामा केयर की तर्ज पर देशवासियों को लाभ पहुंचाने का फैसला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 15, 2018, 10:02 AM IST
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अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वर्ष 2010 में करीब ढाई करोड़ अमेरिकी परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की थी लेकिन मोदी सरकार ने जिस आयुष्मान योजना का ऐलान किया है उसका फायदा 10 करोड़ परिवारों यानी देश की करीब 40 फीसदी आबादी को मिलने वाला है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी नीतियों और फैसलों को लेकर ओबामा से काफी प्रभावित रहे हैं. इस बार बजट में जिस तरह से 50 करोड़ लोगों के लिए 5 लाख तक कैशलेस सुविधा का ऐलान किया. वो भी कहीं न कहीं उसी ओबामा केयर की तर्ज पर देशवासियों को लाभ पहुंचाने का फैसला है. इसलिए आयुष्मान भारत योजना को मोदी केयर भी कहा रहा है.

बराक ओबामा की पहल पर अमेरिका की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव किए गए थे जिसे अमेरिका के हेल्थकेयर सिस्टम में अब तक का सबसे अहम बदलाव माना गया था. इसका अहम पहलू ये था कि स्वास्थ्य सेवाओं पर किए जाने वाले खर्च में कमी आए, कानूनी अधिकार के तहत स्वास्थय बीमा का दायरा बढ़े और कम कीमत पर बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध हो सके. राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मार्च 2013 में पेशेंट प्रोटेक्शन एंड अर्फोडेबल केयर एक्ट यानि पीपीएसीए पर हस्ताक्षर किए थे. ये एक्ट अर्फोडेबल केयर एक्ट के नाम से भी जाना जाता है.

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राष्ट्रपति ओबामा और उनके समर्थकों को कहना है कि इस कदम से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती होंगी बल्कि लंबी अवधि में इस सेक्टर पर हो रहे सरकारी खर्च में भी कमी आएगी.


 

 

 

 

 

 

 

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आयुष्मान भारत योजना यानि मोदी केयर और ओबामा केयर में कुछ बड़े अंतर...
लागत-10 करोड़ परिवारों को कवर करने के लिए 'मोदीकेयर' के तहत कुल लागत का अनुमान 4,000 करोड़ रुपये रहा है. इस योजना के लिए केंद्र ने 2,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की पुष्टि की थी. केंद्र शेष 2,000 करोड़ रुपये जोड़ने के लिए राज्यों की मदद लेगा. हालांकि, इस योजना पर खर्च में जबरदस्त वृद्धि देखी जा सकती है अगर सरकार इस कार्यक्रम को सार्वभौमिक स्वास्थ्य योजना में बदल देती है जिसमें देश के सभी नागरिकों को लाभ होगा.

माना जा रहा है कि सरकार इस स्वास्थ्य सेवा को भारत में सभी 24.49 करोड़ परिवारों को 3 साल के भीतर कवर करने की योजना बना रही है. इसमें अतिरिक्त 1070 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

इस बीच, 2010 में, पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि अगले 10 वर्षों में ओबामाकेयर की लागत 940 अरब डॉलर होगी. हालांकि, दो साल बाद कांग्रेस के बजट कार्यालय की अनुमानित लागत 1.76 ट्रिलियन डॉलर थी.



इनको मिलेगा फायदा-'मोदीकेयर' विशेष रूप से भारत के गरीबों के लिए है जबकि ओबामाकेयर मध्यम वर्ग के अमेरीकियों लाभ देने के लिए है.  ओबामाकेयर ने प्रत्येक नागरिक के लिए बीमा कवर खरीदने को अनिवार्य बना दिया और प्रीमियम पर सरकारी सब्सिडी की पेशकश की. हालांकि, प्रीमियम में हालिया वृद्धि और निरंतर बहस पर आलोचना हो रही है कि क्या इसे रद्द किया जाना चाहिए, जिसमें अधिनियम को रद्द करने के राष्ट्रपति ट्रम्प प्रयार कर रहे हैं. दो योजनाओं को कवर करने वाले लोगों की संख्या के संबंध में, ओबामाकेयर की तुलना में मोदीकेयर बड़ी आबादी को कवर करेगा. मोदीकेयर के लिए 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना के अनुसार, बीपीएल और एपीएल परिवारों के आधार पर 10 करोड़ परिवारों की पहचान की गई है. अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा कि 50 करोड़ लोगों को योजना का फायदा होगा. 2016 तक ओबामाकेयर ने बीमा सुरक्षा योजना के तहत लगभग 2 करोड़ 40 लाख लोगों को फायदा पहुंचाया.

प्रीमियम-मोदीकेयर के तहत सरकार 10 करोड़ परिवारों को कवर करने के लिए बीमा कंपनियों से बोलियां आमंत्रित करेगी. ये बीमा कंपनियां स्वास्थ्य देखभाल कंपनियों के साथ जुड़ जाएंगी जहां बीमित व्यक्ति का इलाज किया जाएगा. गरीबों को प्रीमियम का भुगतान नहीं करना होगा क्योंकि मोदीकेयर अस्पताल में देखभाल के लिए प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का कवर प्रदान करने का वादा करती है. ओबामाकेयर अधिनियम के तहत, संयुक्त राज्य सरकार उन लोगों को प्रीमियम में सब्सिडी देती है जिनकी आय संघीय गरीबी रेखा के 100-400 प्रतिशत के बीच होती है. मॉडिकेयर की 5 लाख रुपये की सीमा की तुलना में, ओबामाकेयर में आवश्यक स्वास्थ्य लाभों के लिए ऐसी कोई सीमा नहीं है.  ओबामाकेयर यह भी सुनिश्चित करता है कि पुरानी बीमारी के  मामले में, पॉलिसीधारकों को स्वास्थ्य कवर मिल जाए, भले ही वे कवरेज से बाहर हो चुके हों.

भारत का कुल स्वास्थ्य खर्च-फिलहाल भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 1.15 प्रतिशत है और यह 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाने की उम्मीद है. हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका स्वास्थ्य देखभाल पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 18 प्रतिशत खर्च करता है.
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