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बुश और ओबामा से कितना अलग रहा ट्रंप का भारत में दिया भाषण

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Updated: February 25, 2020, 12:07 PM IST
बुश और ओबामा से कितना अलग रहा ट्रंप का भारत में दिया भाषण
पिछले 15 वर्षों में भारत दौरे पर आने वाले ट्रंप तीसरे अमेरिकी राष्ट्रपति हैं

पिछले 15 वर्षों में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति हैं, जो भारत दौरे पर आए हैं. बराक ओबामा (Barack Obama) अमेरिका के राष्ट्रपति रहते हुए दो बार भारत दौरे पर आ चुके हैं. जॉर्ज डब्ल्यू बुश (George W Bush) 2006 में भारत दौरे पर आए थे.

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डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के अहमदाबाद (Ahmedabad) के मोटेरा स्टेडियम में दिए भाषण (Speech) की खूब चर्चा चल रही है. दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति के भारत में दिए भाषण का विश्लेषण किया जा रहा है. ऐसे में ये जानना दिलचस्प होगा कि इसके पहले जो राष्ट्रपति भारत आए थे, उन्होंने यहां आकर कैसा भाषण दिया था और वो ट्रंप के दिए भाषण से कितना अलग था?

पिछले 15 वर्षों में डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति हैं, जो भारत दौरे पर आए हैं. बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति रहते हुए दो बार भारत दौरे पर आ चुके हैं. जॉर्ज डब्ल्यू बुश 2006 में भारत दौरे पर आए थे. करीब हर अमेरिका राष्ट्रपति ने अपने भारत दौरे में भारत अमेरिका के मजबूत संबंधों की बात कही है. इसी तरह तकरीबन हर राष्ट्रपति ने अपने भारत दौरे में स्वामी विवेकानंद को याद किया है.

जब 2006 में भारत आए थे जॉर्ज बुश
जॉर्ज बुश 2006 में भारत दौरे पर आए थे. उनके भारत दौरे के करीब एक साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत-अमेरिका न्यूक्लियर डील का ऐलान किया था. जॉर्ज बुश ने अपने भारत दौरे में मनमोहन सरकार के आर्थिक सुधार की तारीफ की थी. उन्होंने भारत के विकास की तारीफ की थी लेकिन उसके संरक्षणवाद की आलोचना की थी. उस दौर में अमेरिका में आउटसोर्सिंग की वजह से वहां के लोगों की नौकरियां जा रही थीं और अमेरिका के लिए चिंता का बड़ा विषय था.



जॉर्ज बुश ने भारत से विदेशी निवेश पर लगाए कैप को हटाने की सलाह दी थी और भारत के बाजार में अमेरिकी प्रवेश के लिए पारदर्शी कानून और टैरिफ रेट कम करने पर जोर दिया था. आतंकवाद पर भी जॉर्ज बुश खुलकर बोले थे. उन्होंने 11 सितंबर 2001 के यूएस अटैक और उसी साल हुए भारत के संसद हमले का जिक्र करते हुए कहा था कि 'आतंकवादियों को हमारे देश को लेकर गलतफहमी हो गई है. अमेरिका और भारत आजादी से प्यार करते हैं और इसके लिए लड़ाई जारी रखे हुए हैं.'

जॉर्ज बुश का भारत दौरा अफगानिस्तान और इराक में अमेरिकी सैनिक हस्तक्षेप के बाद हुआ था. उस वक्त मनमोहन सिंह की अगुआई में यूपीए-1 की सरकार को लेफ्ट पार्टियां समर्थन कर रही थी. इसलिए जॉर्ज बुश के भारत दौरे का सरकार में शामिल कुछ नेताओं ने विरोध भी किया था.

उस माहौल में बुश ने कहा था कि नाराजगी को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है शांतिपूर्ण तरीके से बोलने देना. बुश ने मानवाधिकारों और लोकतंत्र के महत्व पर भी बात की थी और कहा था कि पूरी दुनिया को इस दिशा में भारत के नेतृत्व की आवश्यकता है. बुश अपने भारत दौरे के तुरंत बाद पाकिस्तान जाने वाले थे, इसलिए उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान के करीबी संबंधों का भी जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि एक लोकतांत्रिक पाकिस्तान भारत के पड़ोसी के लिहाज से अच्छा है. उन्होंने मुस्लिम वर्ल्ड की आजादी और उनके मार्डनाइजेशन की वकालत की थी.

जब भारत दौरे पर आए थे बराक ओबामा
बराक ओबामा 2015 और 2010 में भारत दौरे पर आए थे. वो पहले ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति हैं, जो गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि बने हैं. 2015 में ओबामा के दौरे के वक्त प्रधानमंत्री मोदी नए-नए भारत के प्रधानमंत्री बने थे. ओबामा ने कई मसलों पर भारत के साथ मिलकर काम करने को लेकर भाषण दिया था. ओबामा ने अपने भाषण में कहा था कि 'उन्हें पक्का भरोसा है कि यहां के लोगों की जिंदगी सुधर सकती है और भारत अपनी भयावह गरीबी की नाइंसाफी से उबर सकता है.'

उन्होंने कहा था कि वो भारत के विकास में अमेरिका को साझीदार की तरह देखते हैं और दोनों देशों की आंतरिक सुरक्षा में भी करीबी सहयोग की अपेक्षा रखते हैं. पर्यावरण में बदलाव को लेकर चिंतित ओबामा ने भारत में क्लीन फ्यूल के इस्तेमाल की वकालत की थी. उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर भी कहा था.

ओबामा ने अपने भाषण में कहा था कि 'अगर आज के ग्लोबल इकोनॉमी में कोई देश सफल होना चाहता है तो वो अपनी आधी आबादी की प्रतिभा को कैसे नजरअंदाज कर सकता है? हमें एक पति, पिता और भाई के बतौर खड़ा होना पड़ेगा, क्योंकि हर लड़की जिंदगी महत्वपूर्ण है. हर बेटी को उतना ही अधिकार मिलना चाहिए, जितना बेटों को मिलता है.'

ओबामा ने उठाया था धार्मिक आजादी का मुद्दा
ओबामा के भाषण ने सुर्खियां बटोरी थीं क्योंकि उन्होंने धार्मिक आजादी की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि भारत ने विकास का इतना लंबा रास्ता तय किया है, क्योंकि धार्मिक विश्वास के आधार पर वो बंटे नहीं. एक राष्ट्र के तौर पर सभी धर्मों के लोग एकदूसरे से जुड़े रहे.

ट्रंप की तरह ओबामा ने भी 30 लाख के करीब भारतीय मूल के अमेरिकी लोगों के अमेरिका के विकास में योगदान का जिक्र किया था.

2010 के अपने पहले भारत दौरे पर ओबामा ने पाकिस्तान को लेकर ज्यादा सख्ती दिखाई थी, क्योंकि मुंबई टेरर अटैक के बाद उनका भारत दौरा हुआ था. उन्होंने कहा था कि 'हम पाकिस्तानी नेताओं पर लगातार दबाव बनाए रखेंगे कि उनकी सीमा के भीतर आतंकवादियों के लिए पनाहगाह होना, हमें किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है. मुंबई हमलों के गुनहगारों को इंसाफ के मुताबिक सजा दी जाएगी.'

मनमोहन सिंह के साथ बराक ओबामा के ज्यादा बौद्धिक रिश्ते थे. उस दौरान अपनी भारत यात्रा में बराक ओबामा ने कहा था कि वो इस दिशा में काम करेंगे कि यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार हो और भारत को इसका स्थायी सदस्य बनाया जाए.

वहीं ट्रंप ने अपने भारत दौरे में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने नजदीकी रिश्ते, भारत और अमेरिकी की बढ़ती साझीदारी का जिक्र किया. उन्होंने रैडिकल इस्लामिक टेररिज्म की बात जरूर की लेकिन ये भी कहा कि अमेरिका के साथ पाकिस्तान के अच्छे रिश्ते हैं और वो आतंकवादियों को खत्म करने में मिलकर काम करेंगे.

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First published: February 25, 2020, 12:07 PM IST
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