चांद और चंद्रग्रहण का हमारे मूड पर क्या पड़ता है असर

चांद और चंद्रग्रहण का हमारे मूड पर क्या पड़ता है असर
जंद्रमा और चंद्रग्रहण का मन पर असर होने के कई बार संकेत मिले हैं.

चंद्रमा (Moon) और चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) का हमारे मन पर असर पड़ता है, कई शोधों ने ऐसी धारणाओं को मजबूत ही किया है.

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नई दिल्ली:  शुक्रवार को चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) होने जा रहा है. चंद्रग्रहण को हमारे देश में गंभीरता से लिया जाता है. कई लोग जहां इसके असर को अंधविश्वास मानते हैं तो कई लोग इसके प्रभाव को गंभीरता से लेते हैं. ज्योतिष के अनुसार भी चंद्रग्रहण का प्रभाव अच्छा नहीं माना जाता है. लेकिन हम बात कर रहे हैं चांद (Moon) और चंद्रग्रहण की क्या वाकई चांद और चंद्रग्रहण का हमारे मन पर कोई प्रभाव पड़ता है.

शुरू से चंद्रमा का मन पर प्रभाव माना जाता है
सभ्यताओं की शुरुआत से ही चंद्रमा और उससे संबंधित घटनाओं (ग्रहण) का इंसान के मन पर प्रभाव माना जाता है. ज्योतिष में तो चंद्रमा को मन का स्वामी या मन का कारक ही माना जाता है. ज्योतिष में वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले भी मानते हैं कि चूंकि चंद्रमा ही पृथ्वी के सबसे पास का ग्रह (ज्योतिष में चंद्रमा उपग्रह नहीं ग्रह माना जाता है) है, इसी लिए उसका मानव पर सबसे अधिक प्रभाव होता है.

हो रहे हैं इस विषय पर वैज्ञानिक अध्ययन



लेकिन कई वैज्ञानिक यहां तक मनोवैज्ञानिक भी इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि क्या चंद्रमा का इंसान के मन पर कोई प्रभाव पड़ता है?  वे इसका भी अध्ययन कर रहे हैं कि चंद्रमा के चक्र और मनोचिकित्सा के मरीजों की संख्या में कोई संबंध है? कुछ शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों का कहना है कि चंद्रमा और चंद्रग्रहण का हमारे मन और मूड पर असर हो सकता है.



हमारे मन पर असर तो करता है चंद्रमा
कई विशेषज्ञों का मानना है कि चंद्रमा हमारे मन और खास तौर पर हमारे मूड पर गहरा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव डालता है. उनका कहना है कि लोग खुद अपने आसपास के लोगों का पूर्णिमा और अमावस्या के समय के बर्ताव के अंतर को देख कर यह समझ सकते हैं. पूर्णिमा पर चंद्रमा का अधिक प्रभाव देखा जाता है, जबकि अमावस्या के दौरान सबसे कम. यह देखा गया है कि पूर्णिमा के दिन लोग ज्यादा सामाजिक होते दिखने लगते हैं जबकि अमावस्या पर कम.

चंद्रग्रहण 5 जून की रात को दिखाई देगा.


ऊर्जा खींच लेता है चंद्रग्रहण
वहीं चंद्रग्रहमण के दौरान कहा जाता है कि वह हमारी बहुत से भावनात्मक ऊर्जा खींच लेता है. इसीलिए माना जाता है कि इस समय लोग ज्यादा संवेदनशील और अपने विचारों और भावना के प्रति जागरुक हो जाते हैं. लेकिन इसके साथ ही ऊर्जा जाने से यह हमारी नींद और हार्मोन्स पर भी असर डालते हैं जो हमारे बर्ताव को चिड़चिडा, थका हुआ, सवेदनशील और  असमान्य सा दिखाई देना वाला बना सकता है.

पूर्णिका पर होता है ज्यादा असर
चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन होता है. पूर्णिमा के दिन भी चांद का हम पर अगल असर होता है. इस दौरान यह हमारी भावनाओं में तीव्रता का असर दिखा सकता है. कई शोधों से पता चला है कि पूर्णिमा के दिन भाव आवेश वाले अपराध ज्यादा होते देखे गए हैं. यह इंसान शरीर में कई परिवर्तन करता है जिसका उसके बर्ताव में असर आ जाता है. जैसे नींद में खलल होने से चिड़चिड़ापन एक सबसे आम बात है जो पूर्णिमा को ज्यादा दिखाई देती है. पूर्णिमा के दिन ही आत्महत्या, हिंसात्मक अपराध  में बढ़ोत्तरी देखी गई है.

अमावस पर होता है यह असर
इतना ही नहीं यह भी पाया गया है कि अमावस के दौरान चंद्रमा का असर सबसे कम होता है.आध्यात्मिक व्यक्ति के लिए यह समय आत्मनिरीक्षण के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. इस दौरान इंसान के मन सबसे ज्यादा शांत होने की संभावना होती है. अमावस के दौरान लोग ज्यादा अंतरमुखी होते देखे गए हैं. वही दो विपरीत धुरों, पूर्णिमा और अमावस के बीच का समय  ऊर्जा और उत्साह बढ़ाने वाला होता है. जबकि पूर्णिमा आते आते बेचैनी बढ़ने लगती है.

तो फिर चंद्रग्रहण पर...
ऐसे में पूर्णिमा जब इंसान के मन पर सबसे अधिक असर डाल रहा हो, उस समय अचानक उसके समाने पृथ्वी की छाया का आ जाना बेशक उसके असर को कम कर देगा. वैज्ञानिकों और कई ज्योतिषियों का भी यही मानना है कि यह अचानक हुआ परिवर्तन संवेदनशील  लोगों के लिए अच्छा नहीं होता है. इसी लिए कहा जाता है कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इस दौरान बच कर रहना चाहिए.

Moon
चंद्रग्रहण पूर्मिणा के प्रभाव को बहुत परिवर्तनकारी बना देता है.


एक नजरिया यह भी
यह दावा करना कि चंद्रमा  और चंद्रग्रहण का हमारे मन पर पूरी तरह से असर होगा सही नहीं हो सकता , लेकिन इतना जरूर है कि अब वैज्ञानिक भी चंद्रमा के इंसान पर होने वाले असर को शोध का विषय मानते हैं. अगर आप भी एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते हैं तो आपके लिए एक रुचिकर तथ्य बता दूं कि समुद्र में जो नमक और पानी का औसत अनुपात पाया गया है, वहीं हमारे शरीर में भी है. चांद का धरती पर प्रत्यक्ष और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित असर समुद्र में आने वाला ज्वार भाटा  है. और हमारे शरीर पर असर... जैसा मैने कहा, वैज्ञानिक इस शोध का विषय मानते हैं.

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First published: June 5, 2020, 10:43 AM IST
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