सबको फ्री मिलने वाला व्हाट्सऐप आखिर कैसे करता है कमाई

कहीं व्हाट्सएप भी आपका डेटा तो नहीं बेच रहा?

कहीं व्हाट्सएप भी आपका डेटा तो नहीं बेच रहा?

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    दुनियाभर के करोड़ों लोग जिस व्हाट्सएप पर अपना पूरा दिन बिताते हैं. मैसेज में निजी तस्वीरों और संदेशों से लेकर देश दुनिया की खबरों तक न जाने क्या-क्या शेयर करते हैं. व्हाट्सएप मुफ्त में फोन कॉल से वीडियो कॉल तक की सुविधा उपलब्ध कराता है. व्हाट्सएप इतना लोकप्रिय है कि कोई भी मैसेज सर्विस वाला कोई भी एप उसके आस पास भी नहीं फटकता. ये सवाल लाजिमी है कि व्हाट्सएप इतनी सारी सुविधाएं मुफ्त में कैसे देता है. वो अपनी कमाई कैसे करता है? वो अपने कामकाज के लिए कैसे पैसे जुटाता है?

    व्हाट्सएप की शुरुआत 2009 में ब्रायन एक्टन और जान कौम ने की थी. उन्होंने महंगी एसएमएस सर्विसेज को टक्कर देने के लिए ये एप बनाया था. धीरे धीरे वो इसे और सुविधायुक्त करते गए, जिससे समय के साथ लोगों को इसमें टेक्स्ट मैसेज के अलावा तस्वीरें, वीडियो भेजने की सुविधा मिलने लगी. फिर इससे एक कदम आगे बढ़कर जब व्हाट्सएप ने फोन और वीडियो कॉल की सुविधा दी तो इसने हम सबकी जिंदगी काफी आसान कर दी. व्हाट्सएप आईफोन, एंड्रॉइड, ब्लैकबेरी, विंडोज फोन, नोकिया के अलावा डेस्कटॉप पर भी उपलब्ध है.

    शायद फेसबुक के मालिक मार्क ज़ुकरबर्ग ने व्हाट्सएप की ताकत पहचान ली थी. इसलिए उन्होंने इसे फरवरी 2014 में 19 बिलियन डॉलर में कहीं ज्यादा कीमत देकर खरीदा. फेसबुक फॉर्म 10-क्यू के अनुसार, 30 सितंबर, 2014 से पहले के नौ महीनों में व्हाट्सएप ने 12 लाख 89 हजार डॉलर कमाए थे. जब जुकरबर्ग ने इसे खरीदा तब इसका स्टाफ और मैनेजमेंट वही बरकरार रहा. लेकिन धीरे धीरे उन्होंने इसमें जिस तरह बदलाव और दबाव की रणनीति लागू की, उसके चलते इसके पुराने टॉपब्रास ने इसे छोड़ दिया.

    चार साल बाद 30 अप्रैल 2018 को व्हाट्सएप सह-संस्थापक और फेसबुक इंक के को-फाउंडर जान कोम ने फेसबुक छोड़ने की घोषणा की. तब ये सवाल भी खड़े हुए कि कोम ने व्हाट्सएप इसलिए छोड़ा, क्योंकि उन्हें लगने लगा था कि फेसबुक इसके एप के जरिए डेटालीक करने का बिजनेस कर रहा है. वो व्हाट्सएप के बिजनेस मॉडल से भी खुश नहीं थे.

    मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कोम को फेसबुक और व्हाट्सएप पर विज्ञापनों से भी सख्त परहेज था. इन्ही असहमतियों के बाद कोम ने फेसबुक इंक को छोड़ने का फैसला किया. कोम और ब्रायन एक्टन लंबे समय से व्हाट्सएप यूज़र्स की गोपनीयता के लिए संघर्ष कर रहे थे.

    फरवरी 2018 में, व्हाट्सएप के पास 1.5 बिलियन यूजर थे और फेसबुक के बाद  दूसरी सबसे बड़ी डिजिटल संपत्ति थी. इसने  फेसबुक के मैसेंजर और इंस्टाग्राम को भी पछाड़ दिया था.



    व्हाट्सएप अपना पैसा कैसे बना रहा है?

    एक समय में, इस सवाल का सबसे आसान जवाब होता था. कुछ देशों में एप को डाउनलोड करने पर लगभग एक डॉलर खर्च होता था. पहले साल के मुफ़्त इस्तेमाल के बाद हर आने वाले साल में एक डॉलर लिया जाता था. दूसरे शब्दों में समझें तो व्हाट्सएप एक सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम करता था. इस मॉडल के तहत दुनियाभर में लगभग 700 मिलियन यूजर हैं तो इस समय सालाना कमाई को प्रति वर्ष $700 मिलियन अनुमानित किया जा सकता है. लेकिन जनवरी 2016 में फेसबुक ने कहा कि सब्सक्रिप्शन का युग खत्म हो गया और अब कोई भी मैसेजिंग एप का मुफ्त इस्तेमाल कर सकेगा.

    एप में अभी कोई विज्ञापन नहीं है. फेसबुक इसके साथ बैंक, एयरलाइंस जैसी सेवाओं को जोड़ना चाहता है, जिससे वो इनके जरिए कंपनियों से पैसा ले. लेकिन अभी फेसबुक ने इस बिजनेस मॉडल के बारे में कोई भी आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है. फेसबुक भी कभी अपना रेवेन्यू व्हाट्सएप के साथ नहीं जोड़ता है. उसे अलग रखता है. लेकिन ये तय है जिस दिन फेसबुक ने व्हाट्सएप पर एड लेने शुरू कर दिए, उसी दिन से उसका रेवेन्यू जबदस्त उछाल ले लेगा. अकूत धन उसके पास आने लगेगा.

    फोर्ब्स का अनुमान है कि कुल राजस्व $5 बिलियन और 2020 तक प्रति यूजर औसत राजस्व 4 डॉलर होगा. फरवरी 2018 तक, व्हाट्सएप के पास 1.5 बिलियन से अधिक यूजर थे. क्यू 4 की 2017 कॉन्फ़्रेंस कॉल में फेसबुक सीईओ मार्क जुकरबर्ग के मुताबिक अरबों यूजर प्रति दिन व्हाट्सअप पर 60 अरब मैसेज भेजते हैं.

    व्हाट्सएप के आलावा क्या?

    अमेरिका के बाहर, जहां टेक्स्ट मैसेज भेजना अधिक महंगा है, एसएमएस एप लोकप्रिय हैं. सफलतापूर्वक पैसा बना रहे हैं. वी-चैट के लोकप्रिय चीनी एसएमएस एप पर विज्ञापनों के साथ-साथ ऑनलाइन गेम भी हैं. 2016 की तीसरी तिमाही में वीचैट ने $6 बिलियन का रेवेन्यू अर्जित किया. ऐप में 846 मिलियन से अधिक सक्रिय यूजर हैं.

    क्या यह वास्तव में पैसे के बारे में है?

    अनुमान लगाया जाता है कि व्हाट्सएप खरीदने के पीछे फेसबुक का असली मकसद उपयोगकर्ता के व्यवहार के डेटा और व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंचना था, जिसके डेटा से वो अलग तरह से पैसा पैदा कर सके.

    व्हाट्सएप पर 60 अरब संदेश रोज भेजे जाते हैं. यूजर्स की पूरी फोनबुक तक पहुंच कर फेसबुक ये व्यक्तिगत जानकारी अपने सर्वर पर सहेज कर रखता है. बाद में ये जानकारी कंपनियों को बेचने के काम आती है.

    एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन विवाद

    व्हाट्सएप, साथ ही साथ ही एप्पल समेत अन्य मैसेजिंग ऐप दुनियाभर की सरकारों के साथ डेटा शेयर को लेकर लड़ रहे हैं. जब दुनियाभर की सरकारों को लगा कि व्हाट्सएप का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए भी हो रहा है तो सरकारों ने एन्क्रिप्शन कुंजी तक पहुंच की बात की है.