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हरियाणा विधानसभा चुनाव: दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी को इस समीकरण का मिला फायदा

दुष्यंत चौटाला होंगे हरियाणा के डिप्टी सीएम

दुष्यंत चौटाला होंगे हरियाणा के डिप्टी सीएम

दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) की 10 महीने पुरानी जेजेपी (JJP) ने चुनाव नतीजों (election result) में सबसे बड़ा उलटफेर किया...

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    हरियाणा (Haryana) में सबसे बड़ी जीत दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) और उनकी 10 महीने पुरानी पार्टी की हुई है. दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (jannayak Janta Party) ने हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से 10 पर जीत हासिल की है. बीजेपी (BJP) को 40 और कांग्रेस (Congress) को 31 सीटों पर जीत मिली है. दुष्यंत चौटाला हरियाणा की राजनीति में किंगमेकर बनकर उभरे हैं.

    दुष्यंत चौटाला ओमप्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला के बेटे हैं. 2013 में ओमप्रकाश चौटाला और अजय चौटाला को टीचर भर्ती घोटाले में 10 साल की जेल की सजा हुई है. पिछले कुछ वक्त से ओमप्रकाश चौटाला की पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई थी.

    अजय चौटाला और दुष्यंत चौटाला को पार्टी से बाहर कर दिया गया था. जिसके बाद दुष्यंत चौटाला ने अपनी नई पार्टी जननायक जनता पार्टी का गठन किया था. सिर्फ 10 महीने बाद हुए चुनाव में 10 सीटें जीतकर दुष्यंत चौटाला ने साबित कर दिया कि हरियाणा की जाट राजनीति को उन्होंने अपने पक्ष में कर लिया है. लेकिन सवाल है कि सिर्फ 10 महीनों में दुष्यंत चौटाला ने ऐसा कैसे कर दिखाया?

    दुष्यंत चौटाला के पास हरियाणा की सत्ता की चाबी

    जेजेपी का चुनाव चिह्न चाबी है. जब नतीजों के रुझान आने शुरू हुए और लगने लगा कि हरियाणा में कांटे की टक्कर है और जेजेपी के पास बड़ा मौका हाथ लगने वाला है तो दुष्यंत चौटाला बोले- ‘हमारे पास हरियाणा की सत्ता की चाबी है. लोगों ने हमारी पार्टी पर भरोसा जताया है. ये राज्य में आने वाले बदलाव की आहट है. बीजेपी का 75 पार का स्लोगन फेल रहा है. हमने उन्हें यमुना पार भेज दिया.’

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    चुनावों में दुष्यंत चौटाला ने चौधरी देवीलाल का नाम खूब भुनाया


    दुष्यंत चौटाला और उनकी जेजेपी के लिए विधानसभा के चुनाव बड़ी अग्निपरीक्षा थी. पिछले जिंद के उपचुनाव में पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा था. चौटाला परिवार के भीतर चौधरी देवीलाल की विरासत की जंग छिड़ी थी. दुष्यंत चौटाला ने साबित कर दिया है कि देवीलाल के असली राजनीतिक वारिस वही हैं. दुष्यंत चौटाला हरियाणा की राजनीति में उभरते हुए युवा सितारे हैं जो आने वाले वक्त में बड़ी छाप छोड़ सकते हैं.

    चुनावों में भुनाया चौधरी देवीलाल का नाम

    दुष्यंत चौटाला ने अपने परदादा चौधरी देवीलाल को करीब से देखा था. 1996 में चौधरी देवीलाल रोहतक लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे. दुष्यंत उनके साथ चुनावी रैलियों में जाया करते थे. विधानसभा चुनाव में उन्होंने लोगों के बीच अपने परदादा देवीलाल को खूब भुनाया. वो रैलियों में कहा करते- जेजेपी ही देवीलाल की राजनीतिक विरासत संभालने वाली पार्टी है. देवीलाल को लोग प्यार से जननायक कहा करते थे. इसलिए हमने अपनी पार्टी में जननायक नाम रखा है. लोग उनकी इन बातों से कनेक्ट कर पाए.

    चुनाव में युवाओं पर किया फोकस

    चुनाव में दुष्यंत चौटाला का फोकस युवाओं पर रहा. उन्होंने युवाओं को ज्यादा से ज्यादा नौकरियां देने का वादा किया. उन्हें बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया. राज्य सरकार की नौकरियों में स्थानीय युवाओं को आरक्षण देने का वादा किया. इसका काफी असर हुआ. वहीं इंडियन नेशनल लोकदल ने ओमप्रकाश चौटाला की रैलियों पर ज्यादा भरोसा किया. ओमप्रकाश चौटाला पेरोल पर बाहर आकर रैलियां की और फिर 8 अक्टूबर को वापस जेल चले गए. दुष्यंत चौटाला के लगातार चुनावी मैदान में डटे रहने का फायदा मिला.

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    दुष्यंत चौटाला ने सबसे ज्यादा जाट उम्मीदवार उतारे


    जेजेपी ने उतारे सबसे ज्यादा जाट उम्मीदवार

    जेजेपी को जाट वोटर्स का साथ मिला है. जेजेपी ने सबसे ज्यादा 34 जाट उम्मीदवारों को टिकट दिया था. कांग्रेस ने 27 और बीजेपी ने 20 जाट उम्मीदवार उतारे थे. जाट समर्थक दुष्यंत चौटाला के समर्थन में एकजुट हो गए थे. चुनावों के दौरान जाट उम्मीदवारो का दिया एक नारा काफी मशहूर हुआ- करोड़ों चाहने वालों का मेला है, कौन कहता है दुष्यंत चौटाला अकेला है.

    युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं दुष्यंत चौटाला

    दुष्यंत चौटाला काफी पढ़े लिखे और समझदार नेता हैं. उन्होंने कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में ग्रैजुएशन की डिग्री ली है. सनावर के लॉरेंस स्कूल से स्कूलिंग की है. युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता ने उनके पक्ष में काम किया.

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